आलू से भरे पड़े हैं गोदाम पर आसमान छू रहीं कीमतें, पुराना 45-50 तो नया 60 रुपये किलो
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उत्तर प्रदेश में आलू और प्याज के दाम लगातार ऊपर चढ़ रहे हैं। गोदामों में अब भी आलू भरा पड़ा है, लेकिन शासन-प्रशासन दाम नियंत्रित करने में असफल साबित हो रहा है। आसमान छूती कीमतों की मुख्य वजहों में से एक आलू व प्याज को आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम (ईसी एक्ट) को बाहर करना माना जा रहा है। इसका खामियाजा आम ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है।
उद्यान निदेशालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, अभी कोल्ड स्टोरेज में 30.56 लाख मीट्रिक टन आलू है। इसमें से 8 लाख मीट्रिक टन आलू ही बीज के रूप में इस्तेमाल होगा, क्योंकि ज्यादातर बोआई हो चुकी है। यानी कोल्ड स्टोरेज में खाने के लिए अब भी करीब 22 लाख मीट्रिक टन आलू उपलब्ध है।
नवंबर में यूपी का अपना नया आलू आने तक बमुश्किल 10 लाख मीट्रिक टन आलू की ही खपत होगी। इसके बावजूद दाम नीचे नहीं आ रहे हैं। अभी पुराने आलू के खुदरा दाम 45-50 रुपये किग्रा और कर्नाटक से आ रहा नया आलू 60 रुपये किग्रा है।
अपर मुख्य सचिव, उद्यान मनोज सिंह ने सभी कोल्ड स्टोरेज में 31 अक्तूबर के बाद कूलिंग मशीनें न चलाने और पुराने आलू की निकासी के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अधिक भंडारण की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही। वहीं, खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने कहा कि आलू-प्याज के रेट नियंत्रित करने के लिए जिलों के अधिकारियों से लगातार बात हो रही है। नई फसल भी शीघ्र आने वाली है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि आलू-प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिए जाने से अब व्यापारी कितनी भी मात्रा स्टॉक कर सकते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती है। इसलिए शासन से दाम नियंत्रण के लिए बार-बार निर्देश जाने के बावजूद जिला प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
ज्यादा भंडारण क्षमता से व्यापारियों की चांदी जानकारों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में प्रदेश में 100 कोल्ड स्टोरेज बढ़े हैं। भंडारण क्षमता ज्यादा होने से व्यापारियों के सामने पुराना आलू कोल्ड स्टोरेज से निकालने की समस्या नहीं है। नया आलू आने के बाद पुराने आलू के साथ उसे भी भंडारित करने के लिए पर्याप्त स्थान है। पंजाब और प. बंगाल को भी बड़े पैमाने पर आलू निर्यात किया जा रहा है।
व्यापारी चढ़ा रहे दाम
हाथरस के आलू उत्पादक डॉ. अनिल चौधरी कहते हैं कि अभी किसान भी बीज के लिए आलू खरीद रहा है। सारा आलू व्यापारियों के हाथ में है, इसलिए किसानों और आम ग्राहकों, दोनों को आलू महंगा मिल रहा है। जैसे ही किसान के पास अपना आलू बिक्री के लिए होगा, इसके दाम गिरा दिए जाएंगे। शाहजहांपुर के प्रगतिशील किसान पंकज कहते हैं कि जमाखोरी के कारण दाम तेजी से चढ़ रहे हैं। यह न किसान के हित में है और न आम ग्राहकों के।
प्याज के दाम में कमी के लिए करना होगा इंतजार
उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यूपी में हर साल 12-13 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है और उत्पादन बमुश्किल 3-4 लाख मीट्रिक टन ही होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से नई प्याज आने के बाद दाम नीचे आने की पूरी संभावना है।