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लखनऊ में प्रदूषण: अपने समय पर ही चली फैक्ट्रियां, उद्यमियों और अफसरों के बीच गतिरोध बरकरार
Sun, 10 Nov 2024 08:06 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 10 Nov 2024 08:06 AM IST
सार
Pollution in Lucknow:लखनऊ में औद्योगिक इकाइयों को रोटेशन के अनुसार चलाने के डीएम के निर्देश के बाद भी शरिवार को फैक्ट्रियां अपने समय पर चलीं। इस मामले में गतिरोध बढ़ गया है।
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वायु प्रदूषण का खतरा (AI)
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
प्रदूषण की वजह से तालकटोरा की औद्योगिक इकाइयों को रोटेशन के अनुसार चलाने के डीएम के निर्देश के बाद उद्यमियों व अफसरों के बीच गतिरोध बरकरार है। उद्यमियों ने जहां डीएम के निर्देशों को अव्यावहारिक बताते हुए विरोध जताया, वहीं रोटेशन कराने के लिए जिम्मेदार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि टाइमिंग तय करने को लेकर अगले हफ्ते उद्यमियों के साथ बैठक करेंगे।
बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में अगले 15 दिन अलग-अलग समय पर उद्योगों को चलाए जाने के डीएम सूर्यपाल गंगवार के निर्देश से उद्यमियों में नाराजगी है। शनिवार को तालकटोरा के उद्यमियों ने तय समय पर ही सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक फैक्टरियां चलाईं। उद्यमियों ने बताया कि उनके पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। न ही कौन-कौन सी फैक्टरियां किस-किस समय पर चलाई जाएंगी, इसकी कोई समय सारिणी है। इसलिए वह अपने तय समय पर ही फैक्टरियां चलाएंगे।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के चेयरमैन विकास खन्ना ने बताया कि उद्यमियों के साथ मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के अफसरों के साथ वार्ता करेंगे। क्योंकि, इंडस्ट्री के भविष्य के लिए ऐसा कोई भी फरमान सही नहीं है। उधर, डीएम के निर्देशों को लागू कराने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी तैयारी है। बोर्ड का कहना है कि अगले सप्ताह उद्यमियों के साथ बैठक कर रोटेशन की टाइमिंग तय की जाएगी।
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तालकटोरा क्षेत्र में हैं 128 फैक्टरियां
तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में 128 फैक्टरियां हैं। इसमें सिलाई मशीन, साबुन, चायपत्ती, फर्नीचर, प्लाईवुड, प्लास्टिक, मेटल फैब्रिकेटर, रबर व बेकरी समेत पैकेजिंग की फैक्टरियां हैं। उद्यमियों का कहना है कि सभी के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र भी है। फिर इंडस्ट्री पर ही मनमाना फैसला क्यों थोपा जा रहा है?
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बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में अगले 15 दिन अलग-अलग समय पर उद्योगों को चलाए जाने के डीएम सूर्यपाल गंगवार के निर्देश से उद्यमियों में नाराजगी है। शनिवार को तालकटोरा के उद्यमियों ने तय समय पर ही सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक फैक्टरियां चलाईं। उद्यमियों ने बताया कि उनके पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। न ही कौन-कौन सी फैक्टरियां किस-किस समय पर चलाई जाएंगी, इसकी कोई समय सारिणी है। इसलिए वह अपने तय समय पर ही फैक्टरियां चलाएंगे।
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के चेयरमैन विकास खन्ना ने बताया कि उद्यमियों के साथ मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के अफसरों के साथ वार्ता करेंगे। क्योंकि, इंडस्ट्री के भविष्य के लिए ऐसा कोई भी फरमान सही नहीं है। उधर, डीएम के निर्देशों को लागू कराने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी तैयारी है। बोर्ड का कहना है कि अगले सप्ताह उद्यमियों के साथ बैठक कर रोटेशन की टाइमिंग तय की जाएगी।
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तालकटोरा क्षेत्र में हैं 128 फैक्टरियां
तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में 128 फैक्टरियां हैं। इसमें सिलाई मशीन, साबुन, चायपत्ती, फर्नीचर, प्लाईवुड, प्लास्टिक, मेटल फैब्रिकेटर, रबर व बेकरी समेत पैकेजिंग की फैक्टरियां हैं। उद्यमियों का कहना है कि सभी के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र भी है। फिर इंडस्ट्री पर ही मनमाना फैसला क्यों थोपा जा रहा है?
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बैठक में समय सारिणी तय की जाएगी
वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
डीएम के निर्देशों का हर हाल में पालन कराया जाएगा। अगले हफ्ते उद्यमियों के साथ बैठक कर रोटेशन की टाइमिंग तय की जाएगी। बैठक में चर्चा कर ऐसी समय सारिणी तय की जाएगी जिससे किसी उद्यमी को नुकसान न पहुंचे और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पा लिया जाए।- उमेश शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
दिन में श्रमिक मिलते नहीं, रात में कैसे मिलेंगे
शहर में अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है, लेकिन जिम्मेदार इंडस्ट्री को ठहराया जा रहा है। एक तरफ इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की बात कही जाती है, तो दूसरी तरफ रोटेशन पर चलाने की। दिन में श्रमिक मिलते नहीं है, रात में कैसे मिलेंगे? फैक्टरियां फ्लॉप हुईं, तो उनका उबर पाना संभव नहीं हो पाएगा।- दिनेश गोस्वामी, तालकटोरा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग संघ
सड़क बना नहीं पा रहे, फैल रहा प्रदूषण
तालकटोरा में सुबह 9 से शाम 6 और 8 से 5 बजे तक फैक्टरी चलती है। बेकरी 24 घंटे चलती हैं। ऐसे में रोटेशन किस हिसाब से करेंगे? इंडस्ट्री चलाना वैसे भी मुश्किल हो रहा है। दो साल से सड़क व नाला बन रहे हैं, जो छह माह से रुके हैं। इंडस्ट्री से ज्यादा इनसे और ट्रैफिक से प्रदूषण फैल रहा है।- अदनान सिद्दीकी, तालकटोरा, उपाध्यक्ष, आईआईए, यूथ विंग
उद्यमी खुद ही सेट करें टाइमिंग
सभी ऐसी इंडस्ट्री जिनसे वायु प्रदूषण हो रहा है, वे अगले 15 दिन अपनी गतिविधियों की टाइमिंग खुद ही सेट करें, जिससे कि प्रदूषण न बढ़े। हमने यही एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन इंडस्ट्री के खिलाफ नहीं है।-सूर्यपाल गंगवार, डीएम
दिन में श्रमिक मिलते नहीं, रात में कैसे मिलेंगे
शहर में अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है, लेकिन जिम्मेदार इंडस्ट्री को ठहराया जा रहा है। एक तरफ इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की बात कही जाती है, तो दूसरी तरफ रोटेशन पर चलाने की। दिन में श्रमिक मिलते नहीं है, रात में कैसे मिलेंगे? फैक्टरियां फ्लॉप हुईं, तो उनका उबर पाना संभव नहीं हो पाएगा।- दिनेश गोस्वामी, तालकटोरा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग संघ
सड़क बना नहीं पा रहे, फैल रहा प्रदूषण
तालकटोरा में सुबह 9 से शाम 6 और 8 से 5 बजे तक फैक्टरी चलती है। बेकरी 24 घंटे चलती हैं। ऐसे में रोटेशन किस हिसाब से करेंगे? इंडस्ट्री चलाना वैसे भी मुश्किल हो रहा है। दो साल से सड़क व नाला बन रहे हैं, जो छह माह से रुके हैं। इंडस्ट्री से ज्यादा इनसे और ट्रैफिक से प्रदूषण फैल रहा है।- अदनान सिद्दीकी, तालकटोरा, उपाध्यक्ष, आईआईए, यूथ विंग
उद्यमी खुद ही सेट करें टाइमिंग
सभी ऐसी इंडस्ट्री जिनसे वायु प्रदूषण हो रहा है, वे अगले 15 दिन अपनी गतिविधियों की टाइमिंग खुद ही सेट करें, जिससे कि प्रदूषण न बढ़े। हमने यही एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन इंडस्ट्री के खिलाफ नहीं है।-सूर्यपाल गंगवार, डीएम