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यहां अस्पताल खुद बीमार, कैसे बचेगी मरीजों की जान?

Fri, 26 Jul 2013 05:19 PM IST
लखनऊ/मनीष सिंह
लखनऊ/मनीष सिंह Updated Fri, 26 Jul 2013 05:19 PM IST
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pollution in hospital

एक अस्पताल भी भला बीमारियां बांट सकता है क्या? यह प्रश्न जितना अहम है उतनी ही सच यह हकीकत है कि बलरामपुर अस्पताल में बीमारियां बांटने के पूरे इंतजाम हैं।

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खुले में पड़ा कचरा, चोक पड़ी सीवर लाइन और बहता गंदा पानी यानी बीमारी फैलाने के पर्याप्त इंतजाम। यह हाल तब है जब प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।
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बलरामपुर अस्पताल में ही प्रत्येक वार्ड के रखरखाव के लिए लाखों का बजट आता है।बजट की रकम कहां खर्च होती है, किसी को पता नहीं।

रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही का ही परिणाम है कि वार्ड के बाहरी हिस्से में बना छज्जा टूट कर गिर चुका है तो वहीं टूटे हुए छज्जे पर गंदगी का अंबार लगा है।
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बलरामपुर अस्पताल के निदेशक कार्यालय के दूसरी तरफ बने प्राइवेट वार्ड के बगल में मौजूद जनरल वार्ड के प्रथम तल पर अस्पताली कचरा खुले में पड़ा है।

मरीज श्रीराम कहते हैं कि कूलर में भरे पानी में मच्छर हो गए हैं, सफाई नहीं होती है। तीमारदार जानकी कहती हैं कि सफाई के नाम पर सिर्फ झाड़ू लगाई जाती है।

फिनायल से पोछा लगते कभी नहीं देखा। इसी वार्ड में भर्ती इमरान कहते हैं कि सीवर बहते रहने के कारण दीवारों पर सीलन हो गई है, जिससे वार्ड में हर समय बदबू रहती है।


सेप्टिक वार्ड में भर्ती मरीजों का हाल लेने वाला कोई नहीं है। वार्ड में फैली गंदगी और सीवर के पानी से उठती दुर्गंध के कारण मरीज-तीमरदार परेशान हैं।

मरीज कहते हैं कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। अस्पताली कचरा, संक्रमित निडल, ग्लूकोज की खाली बोतल और संक्रमित मेडिकल पाइप खुले में पड़ी हैं।

मरीज को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही है लेकिन उसको देखने वाला कोई नहीं है। दूसरा मरीज खुद ग्लूकोज की बोतल में संक्रमित निडिल से छेद कर देता है।

हाथ के जख्म पर बंधी पट्टी खिसक चुकी है, लेकिन कोई उसको ठीक करने वाला नहीं है। वार्ड में भर्ती एक मरीज बताते हैं कि हमारे पास डाक्टर नहीं आते हैं। हम खुद नर्स रूम में जाकर दवा ले लेते हैं।

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