'भारत माता की जय' बोलने के ऐतराज पर मामला गर्माया, जानें, क्या कहते हैं मुस्लिम
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राजधानी में सभा की इजाजत न मिलने से एआईएमआईएम के अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी का दो दिवसीय प्रदेश दौरा टलते ही भारत माता की जय बोलने पर उनके ऐतराज का मुद्दा गरमा गया है। अधिकतर मुस्लिम विद्वान इस मुद्दे पर विवाद को सियासत से जुड़ा मानते हैं।
उनका कहना है कि मां के रूप में हिंदुस्तान की जय बोलने में हर्ज क्या है? लेकिन कुछ लोग विवाद की आड़ में वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहते हैं।
एआईएमआईएम नेता कहते हैं कि वे हिंदुस्तान जिंदाबाद या जय हिंद बोलेंगे लेकिन उस भारत माता की जय नहीं बोलेंगे जिसका हरिद्वार में मंदिर है। जिसमें मूर्ति के रूप में भारत माता को प्रदर्शित किया गया है। कहते हैं, आरएसएस के कहने पर भारत माता की जय क्यों बोलें ?
तीन दिन पहले असदुद्दीन ओवैसी और बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में उनके विधायक के भारत माता की जय न बोलने का मसला महाराष्ट्र होते हुए यूपी पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने लखनऊ में 18 मार्च को प्रस्तावित ओवैसी की सभा पर 48 घंटे पहले रोक लगा दी। इसके विरोध में एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने जीपीओ पार्क पर विरोध जताया।
ओवैसी व आरएसएस कर रहे हैं ध्रुवीकरण की कोशिश
मुस्लिम बुद्धिजीवी व धर्मगुरु इस विवाद को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। उनका मानना है कि 2017 में यूपी में असेंबली चुनाव होने हैं। इसीलिए वोटों की ध्रुवीकरण की कोशिशें चल रही है। ओवैसी और आरएसएस ऐसे मुद्दे खड़ा करेंगे जिनसे ध्रुवीकरण हो सके।
हालांकि एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वह कहते हैं, 1983 में हरिद्वार में भारत माता का मंदिर बना था। 1984 में इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया।
मंदिर में सात घोड़ों की लगाम कसते जिस मूर्ति को भारत माता बताया गया है, उसकी जय बोलने के लिए हम तैयार नहीं हैं। हिदुस्तान हमारा मुल्क है, हम देश के प्रति वफादार हैं।
हमें भाजपा से राष्ट्रवाद और कांग्रेस से सेकुलरिज्म का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। हम हिंदुस्तान जिंदाबाद, जय हिंद के नारे लगाएंगे लेकिन संघ के इशारे पर भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।
नारे लगाने से कोई राष्ट्रवादी नहीं हो जाता
ऐशबाग ईदगाह के इमाम खालिद रशीद फरंगी महली कहते हैं कि यह बहस देश के लिए नुकसानदेह है। यहां रहने वाले सभी राष्ट्रवादी हैं। सभी को मुल्क की इज्जत कायम रखने की कोशिश करनी चाहिए।
उनका कहना है कि नारे लगाने से कोई राष्ट्रवादी नहीं हो जाता और नारे नहीं लगाने से कोई राष्ट्रविरोधी नहीं हो जाता।
उन्होंने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की बयानबाजी की कड़ी निंदा की। कहा, इससे देश और समाज का नुकसान हो रहा है। सबका अपना-अपना नजरिया है। सभी को अपने मजहब पर अमल करने की आजादी है। मुल्क की इज्जत कायम रहे यह सबकी जिम्मेदारी है।
ओवैसी से आम मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं
शिबली नेशनल कॉलेज, आजमगढ़ के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. गयास असद खान का कहना है कि आरएसएस और ओवैसी सियासी खेल खेल रहे हैं। वे वोटों का पोलेराइजेशन चाहते हैं।
वह कहते हैं, हम हिंदुस्तानी हैं। जय हिंद बोल सकते हैं, जय भारत बोल सकते हैं तो भारत माता की जय बोलने में एक सेंकड भी नहीं लगना चाहिए।
ओवैसी जो कह रहे हैं, उसका आम मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है। मुसलमानों को अलग करके नहीं देखना चाहिए। वे भी उतने ही देशभक्त हैं जितने हिंदू। दरअसल, आरएसएस और ओवैसी जैसे लोग समाज और वोटों का ध्रुवीकरण चाहते हैं।
तस्वीर सामने रखकर नारे लगवाने पर ऐतराज मुमकिन
मजलिसे उलमा-ए-हिंद से जुड़े लखनऊ के मौलाना हबीब हैदर कहते हैं कि इस्लाम में अपने मुल्क से मोहब्बत करने का हुक्म है, हर मुसलमान इसका पालन करता है। वहीं, कुरआन में मूर्ति पूजा पर भी रोक है।
ओवैसी या आरएसएस जैसे लोग और संगठन हर बात में विवाद तलाशते हैं ताकि इनकी सियासत चलती रहे। ताजा विवाद इसी का नतीजा है। ऐसे लोग किसी तस्वीर को सामने रख कर जब कुछ कहलाना चाहते हैं तो इसमें कुछ लोगों को एतराज हो सकता है पर अगर मुल्क को मां समझ कर जिंदाबाद कहना हो तो कुछ भी गलत नहीं है।
मेरे नजरिए के मुताबिक ‘भारत माता की जय’ कहना बिल्कुल गलत नहीं है। दूसरा पहलू यह भी है कि क्यों मुसलमानों से ऐसा कहलाना जरूरी समझा जा रहा है? क्या मुसलमानों को वतन परस्ती का सर्टिफिकेट आरएसएस से लेना पड़ेगा।
इस मामले में कोई फतवा नहीं
अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के इस्लामिक स्टडीज विभाग के प्रोफेसर मो. इस्माइल भारत माता के नारे को लेकर उठे विवाद को इश्यू नहीं मानते। वह कहते हैं कि गम जिस मुल्क में हम रहते हैं, उसकी जय बोलते हैं, उनकी तरक्की और शांति चाहते हैं। मुल्क को मां कहने में क्या दिक्कत है। उनका कहना है कि मैं कोई आलिम नहीं जो इस मामले में फतवा दूं।
कुछ मसलों पर सार्वजनिक चुप्पी ठीक : जमशेदपुरी
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के उर्दू विभाग के हेड प्रो. असलम जमशेदपुरी कहते हैं कि इस्लाम में केवल खुदा (एक भगवान) की इबादत की जाती है। इसके अतिरिक्त किसी दूसरे की इबादत जायज नहीं है। मुल्क से वफादारी और मुल्क के लिए कुर्बानी का जज्बा इस्लाम का हिस्सा है। हिंदुस्तान जिंदाबाद या जय हिंद कहना कहीं से गलत नहीं है।
हिंदुस्तान को मां मानते हुए इबादत करने पर कुछ लोगों को ऐतराज हो सकता है। मुल्क के प्रति वफादारी रखने वालों से ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिसकी इस्लाम से टकराहट हो।
वह कहते हैं- दिल मिले रहें, इसके लिए कुछ मसलों पर सार्वजनिक तौर पर चुप्पी अख्तियार करना ठीक रहता है। जहां तक ओवैसी या उनकी पार्टी के एमएलए के बयान का सवाल है, वे सियासी नफा नुकसान देखकर बात करते हैं।
सपा ने मुसलमानों को बेवा औरत का माल समझा है
सांसद ओवैसी को 18 व 19 मार्च को प्रदेश का दो दिवसीय दौरा करना था। 18 मार्च को राजधानी में रिफाह-ए-आम क्लब में उनकी सभा होनी थी। उनका नदवा जाने, मौलाना कल्बे जव्वाद से मिलने और देवाशरीफ जाने का कार्यक्रम था। 19 मार्च को उन्हें फैजाबाद,अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जाना था।
एआईएमआईएम के प्रदेश संयोजक शौकत अली का कहना है अनुमति न मिलने से उनका दौरा टल गया है। अगले हफ्ते वह फिर प्रदेश के दो या तीन दिन के दौरे पर आएंगे।
बकौल शौकत, यह 16वां मौका है जब ओवैसी की सभाओं को इजाजत नहीं दी गई है। आजमगढ़, आगरा और इलाहाबाद में तो कई बार सभाओं की मंजूरी नहीं मिली। दो बार अनुमति लेकर निरस्त की र्गइं। प्रशासन ने अगली बार अनुमति देने का भरोसा दिलाया है।
मुलायम डरते हैं, इसलिए सभा की इजाजत नहीं
शौकत अली का कहना है कि एआईएमआईएम के प्रति मुस्लिमों और वंचितों में रुझान से सपा खौफजदा है। सपा ने मुसलमानों को बेवा औरत का माल समझकर इस्तेमाल किया है। उन्हें 18 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था, लेकिन पूरा नहीं किया।
सपा मुखिया मुलायम सिंह एआईएमआईएम से खतरा मानते हैं। उन्हें लगता है कि मुसलमान हाथ से निकल जाएगा तो सत्ता चली जाएगी। इसीलिए ओवैसी की सभा को अनुमति नहीं दी जा रही।