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छिन सकती है महारथियों से लाल बत्ती

Sun, 16 Feb 2014 01:01 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Feb 2014 01:01 PM IST
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politicians may loose their red light

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बड़े से बड़े नेताओं और दर्जा प्राप्त मंत्रियों की लाल बत्ती छीन सकती है। निकाय और बोर्डों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सरकारी विभागों के सलाहकारों को कैबिनेट, राज्य या उपमंत्री शामिल हैं।

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इन लोगों को दर्जा देकर लालबत्ती से नवाजने को सही ठहराने की प्रदेश सरकार की दलील सुप्रीम कोर्ट में ठुकरा दिए जाने के बाद कई बड़े नेताओं का रुतबा छिन सकता है। मंत्री स्तर का ओहदा पाने वाले आशंकित हैं।
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सपा सरकार 23 महीने के कार्यकाल में करीब डेढ़ सौ लोगों को मंत्री स्तर का दर्जा दे चुकी है। इनमें अधिकांश नेता और कुछ नौकरशाह हैं।

कोई भी सरकार 15 फीसदी से ज्यादा विधायकों को मंत्री नहीं बना सकती है। ऐसे में मंत्री का दर्जा देकर तमाम पार्टी नेताओं को उपकृत किया जाता है।

दर्जा पाने वाले नेताओं को अन्य सुविधाओं के साथ लालबत्ती और हूटर लगी कार और गनर मिलते हैं, मंत्री संबोधन मिलता है। इसी स्टेट्स के लिए दर्जा प्राप्त मंत्री बनने को मारामारी मची हुई है।
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बसपा सरकार के कार्यकाल में 18 जुलाई 2007 को राज्यमंत्री का दर्जा देने का शासनादेश जारी करके तमाम नेताओं को लालबत्तियां बांटी गई। सपा सरकार ने बड़ी उदारता से उसी परंपरा को आगे बढ़ाया।

इसी आदेश को हाईकोर्ट ने अवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था। इसकी बहाली के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन उसे राहत नहीं मिल सकी।

इससे मंत्री का रुतबा पाने वाले लोग बत्ती छिनने को लेकर आशंकित हैं। लोक प्रहरी के संयोजक एसएन शुक्ला कहते हैं कि अनावश्यक रूप से वीआईपी कल्चर बढ़ने पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है।

लोकतंत्र में यह नहीं चल सकता कि एक तरफ राजा हो और दूसरी तरफ प्रजा। जनतंत्र बराबरी के सिद्धांत पर आधारित है।

सिर्फ संवैधानिक पद वाले लोगों को लालबत्ती दी जानी चाहिए ताकि उन्हें पहचानने और आने-जाने में सुविधा हो। सुप्रीम कोर्ट ने दर्जा प्राप्त मंत्रियों की नियुक्ति को मंत्रिपरिषद गठन के सिद्धांतों के खिलाफ माना है।

वोटों का समीकरण दुरुस्त करने की कवायद
दरअसल लालबत्ती से नवाजने का काम वोटों का समीकरण दुरुस्त करने की कवायद का हिस्सा है। जिलों में हारे नेताओं, पूर्व विधायकों, वरिष्ठ नेताओं, के ओहदेदारों और टिकट न पाने वाले लोगों को भी लालबत्तियां दी गईं।


मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वोटों के समीकरण को साधने की रणनीति का हिस्सा माना गया। एक दर्जन मुस्लिम और जाट नेताओं को लालबत्तियां दी गई।

बिजनौर सीट से अनुराधा चौधरी का टिकट कटा तो अगले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद का उपाध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया।

सांसद रेवतीरमश सिंह के बेटे उज्जवल रमण सिंह चुनाव हारे तो उन्हें बीज विकास निगम का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिश्त है।

बसपा सरकार में युवाओं की अगुवाई करने वाले राजपाल कश्यप, सुनील यादव जैसे नेताओं को पहले ही चरण में राज्यमंत्री का रुतबा दे दिया गया था।

प्रोन्नत होकर आईएएस बने तपन प्रसाद ने वीआरएस लेकर सपा में शामिल होने की तो उन्हें प्रशासनिक सुधार विभाग का सलाहकार बनाकर मंत्री का दर्जा दे दिया गया।

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