फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   police noticed then SP of CBCID

सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी को बयान के लिए नोटिस

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2020 03:01 AM IST
विज्ञापन
police noticed then SP of CBCID
लखनऊ। ठेका दिलाने के नाम पर 9.72 करोड़ रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा है। उधर, विवेचना में स्थानीय पुलिस के सहयोग को एसटीएफ ने कुछ इंस्पेक्टर की मांग की है। मामले में प्रदेश सरकार की सख्ती के चलते एसटीएफ और लखनऊ पुलिस कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। विवेचक व गोमतीनगर के एसीपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मामले में प्रकाश में आए सभी आरोपियों को बयान के लिए नोटिस भेजा है। इसमें सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी, जो अब डीआईजी के पद पर हैं, उनके भी बयान दर्ज होने हैं। अन्य आईपीएस अधिकारी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के बयान भी दर्ज करने हैं। बुधवार को विवेचक ने एसटीएफ से मिले दस्तावेजों और शासन के आदेश पर पूर्व में की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया। इसमें सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य और बयान हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले में सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के अलावा कई रडार पर हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए साक्ष्य जमा किए जा रहे हैं। इंदौर निवासी व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया को ठेका दिलाने के नाम पर पशुधन विभाग के मंत्री के प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार, पत्रकार अनिल राय, कथित पत्रकार एके राजीव समेत 11 लोगों ने 9.72 करोड़ रुपये ठग लिए थे। एसटीएफ ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी सचिवालय में ऑफिस में बैठकर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। एफआईआर में आईपीएस का नाम न लिखकर बचाने का प्रयास एफआईआर में ठगों के साथी आईपीएस का नाम न लिखकर पुलिस अफसरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। पीड़ित के सीएम से शिकायत के बाद एसटीएफ ने जांच की और सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी की भूमिका संदिग्ध पाई थी। जांच में साफ हो गया था कि जब मंजीत ने अपना रुपया वापस मांगा तो आरोपियों ने आईपीएस के जरिये उसे दबाव में लेने व धमकाने का प्रयास किया। सीबीसीआईडी के ऑफिस में उस वक्त मंजीत को लेकर गए तथाकथित पत्रकार समेत अन्य की रजिस्टर में एंट्री भी पाई गई है। इसके बाद भी आईपीएस का नाम एफआईआर में नहीं लिखा गया। चूंकि पूरी जांच एसटीएफ ने की थी, इसलिए साफ है कि इसके अधिकारियों ने आईपीएस को बचाने का पूरा प्रयास किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed