हड़ताल ने ली 5 जानें: कहीं गर्भवती ने दम तोड़ा तो कहीं बच्चे ने गर्भ में
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डेंगू-वायरल की दहशत के बीच सरकारी अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की हड़ताल मरीजों पर आफत बनकर टूटी। इलाज न मिलने से एक गर्भवती समेत 5 ने दम तोड़ दिया। शहर के 25 सरकारी अस्पतालों (बीएमसी-सीएचसी शामिल) में करीब 25 हजार मरीजों को बिना जांच और दवा के लौटना पड़ा।
वहीं 184 ऑपरेशन टाल दिए गए। मंगलवार सुबह आठ बजे से ही नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन समेत अन्य विभागों के टेक्नीशियन अस्पतालों में इकट्ठा हुए। काम बंद रखा और नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि हड़ताल की घोषणा पहले कर दी गई थी।
ओपीडी पहुंचे मरीजों को निराश ही होना पड़ा। कुछ मरीज-तीमारदार इलाज न मिलने से गुस्सा गए और कर्मचारियों से भिड़ गए, हंगामा शुरू हो गया। कुछ एक जगह तो गुस्साए लोगों ने अस्पताल परिसर में शीशे तोड़ कर अपने गुस्से का इजहार किया।
हड़ताली कर्मचारियों के आगे अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह बेबस और लाचार नजर आए। संविदाकर्मियों को व्यवस्था संभालने के लिए लगाया गया लेकिन स्थिति काबू में नहीं आ सकी। इसकी वजह से अस्पतालों में देर रात तक अव्यवस्था की स्थिति रही।
समय पर मिल जाता इलाज तो बच जाती जिंदगियां
हड़ताल पांच मरीजों की जान पर भारी पड़ गई। चिनहट बाजार की अमरावती की गर्भवती बेटी सावित्री (28) को मंगलवार सुबह तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। परिवारीजन उस चिनहट सीएचसी लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने हड़ताल की बात कहकर लोहिया अस्पताल भेज दिया।
परिवारीजनों ने बताया कि सीएचसी के डॉक्टरों ने हाथ तक नहीं लगाया। पुरानी रिपोर्ट देखकर बता दिया कि मरीज एनेमिक है और यहां ऑपरेशन संभव नहीं है। परिवारीजन जैसे-तैसे लोहिया अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने अभी इलाज शुरू ही किया उसके थोड़ी देर बाद सावित्री की मौत हो गई। परिवारीजनों का कहना था कि हड़ताल की वजह से सावित्री के इलाज में देरी हुई।
इसी तरह तेज बुखार से पीड़ित अजीज हुसैन (40) का इंदिरानगर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने लोहिया अस्पताल भेज दिया। इमरजेंसी में हड़ताल की वजह से इलाज में काफी देर हो गई और एम्बुलेंस में ही उनकी मौत हो गई।
अधिकारियों ने दी सफाई
इसी तरह बलरामपुर अस्पताल में तेज बुखार और पीलिया की शिकायत के बाद भर्ती कराए गए रजनी और अमरदीप की भी मौत हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों मरीजों को डॉक्टरों ने खून की जांच लिखी थी। समय पर जांच न होने व रिपोर्ट न मिलने से इलाज में देरी हुई जो उनकी मौत का कारण बन गई।
मलिहाबाद की सरोज (28) को प्रसव पीड़ा के बाद परिवारीजन सीएचसी लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों व हड़ताली कर्मचारियों ने हड़ताल की बात कहकर चलता कर दिया।
आनन-फानन में परिवारीजन सरोज को डफरिन अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बता दिया कि शिशु की गर्भ में मौत हो गई है। परिवारीजनों का आरोप था कि मलिहाबाद सीएचसी में हड़ताल की वजह से इलाज नहीं मिला। डफरिन में भी थोड़ी देर हुई जिससे गर्भ में नवजात की मौत हो गई।