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Lucknow News: पीजीआई को फेफड़ा प्रत्यारोपण शुरू कराने का जिम्मा
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एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई (एसजीपीजीआई) के दीक्षांत समारोह में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन को फेफड़ा प्रत्यारोपण शुरू करने के निर्देश दिए।
राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण और धूम्रपान की वजह से प्रदेश में फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फेफड़ों के सिकुड़ने जैसी गंभीर स्थितियों में प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है।
फिलहाल प्रदेश के किसी भी सरकारी संस्थान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को दिल्ली या दक्षिण भारत जाना पड़ता है। पीजीआई अगर देश का नंबर-वन संस्थान बनना चाहता है तो उसे फेफड़ा प्रत्यारोपण शुरू करना ही होगा।
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बांड पूरा होने के बाद करते रहें प्रदेश की सेवा :
चिकित्सा स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने डिग्री और पदक पाने वाले डॉक्टरों को बधाई देते हुए कहा कि दो साल का बांड पूरा होने के बाद भी प्रदेश में सेवा करते रहें। प्रदेश को आपकी जरूरत है।
निजी संस्थान में एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है खर्च :
देश में फेफड़ा प्रत्यारोपण का खर्च एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इसमें प्रत्यारोपण, अस्पताल का खर्च, दवाएं और प्रत्यारोपण के बाद आने वाला खर्च शामिल होता है। सरकारी संस्थान में प्रत्यारोपण शुरू होने पर इस खर्च में काफी कमी आ जाएगी।
इन शहरों में है सुविधा : चेन्नई, हैदराबाद, बंगलूरू, दिल्ली
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राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण और धूम्रपान की वजह से प्रदेश में फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फेफड़ों के सिकुड़ने जैसी गंभीर स्थितियों में प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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फिलहाल प्रदेश के किसी भी सरकारी संस्थान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को दिल्ली या दक्षिण भारत जाना पड़ता है। पीजीआई अगर देश का नंबर-वन संस्थान बनना चाहता है तो उसे फेफड़ा प्रत्यारोपण शुरू करना ही होगा।
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बांड पूरा होने के बाद करते रहें प्रदेश की सेवा :
चिकित्सा स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने डिग्री और पदक पाने वाले डॉक्टरों को बधाई देते हुए कहा कि दो साल का बांड पूरा होने के बाद भी प्रदेश में सेवा करते रहें। प्रदेश को आपकी जरूरत है।
निजी संस्थान में एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है खर्च :
देश में फेफड़ा प्रत्यारोपण का खर्च एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इसमें प्रत्यारोपण, अस्पताल का खर्च, दवाएं और प्रत्यारोपण के बाद आने वाला खर्च शामिल होता है। सरकारी संस्थान में प्रत्यारोपण शुरू होने पर इस खर्च में काफी कमी आ जाएगी।
इन शहरों में है सुविधा : चेन्नई, हैदराबाद, बंगलूरू, दिल्ली

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।

एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह।