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डीएचएफएल में जमा 2268 करोड़ की निकासी की मिले अनुमति

Thu, 21 Nov 2019 12:26 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Thu, 21 Nov 2019 12:26 PM IST
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Permission required for withdrawal of 2268 crore deposited in DHFL
PF

यूपी पावर कॉर्पोरेशन ने बुधवार को मुंबई उच्च न्यायालय से दीवान हाउसिंग फाइनेंस कंपनी लि. (डीएचएफएल) में कॉर्पोरेशन कर्मचारियों की भविष्य निधि के जमा 2268 करोड़ रुपये और ब्याज की निकासी की अनुमति मांगी। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। बुधवार दोपहर 1.30 बजे जस्टिस एके मेनन की अदालत में पावर कॉर्पोरेशन की ओर से दायर विशेष याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। 

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इस दौरान कॉर्पोरेशन के वकीलों डेरियस खंबाटा और केविक सीतलवाड़ ने अदालत से कहा कि 45 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की भविष्य निधि का पैसा डीएचएफ एल में जमा है। इनमें बड़ी संख्या में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मामले में यूपी सरकार कार्रवाई कर रही है। प्रथम दृष्टया दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराई जा रही है। 
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इसके बाद रियालंस निप्पन के वकील ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। शाम करीब साढ़े पांच बजे तक चली सुनवाई के बाद कार्यवाही 28 नवंबर तक स्थगित कर दी गई। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार न्यायालय में मौजूद रहे। कॉर्पोरेशन की ओर से 18 नवंबर को मुंबई उच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर की गई थी। 
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डीएचएफएल ने कहा, हम पैसा लौटाने को तैयार
सुनवाई के दौरान डीएचएफएल के वकील ने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट डीएचएफएल से पैसा निकासी पर लगाई रोक हटा दे तो वह पावर कॉर्पोरेशन के साथ हुए अनुबंध की शर्तों और नियमों के तहत बकाया राशि लौटाने को तैयार है।

कार्य बहिष्कार से कॉर्पोरेशन का नुकसान
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से कॉर्पोरेशन का ही नुकसान हो रहा है। सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह संवेदनशील है, कर्मचारियों का एक-एक पैसा लौटाया जाएगा। दो महीने में करीब 14 करोड़ रुपये के पीएफ का भुगतान किया भी गया है।


ट्रस्ट में शामिल पेंशनर्स और इंजीनियर्स ने भी की अनदेखी
उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एम्पलाइज ट्रस्ट के 10 ट्रस्टियों में विद्युत पेंशनर्स परिषद के अध्यक्ष जगमोहन लाल वैश्य, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अधीक्षण अभियंता विवेक कुमार, उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता हरीशचंद्र मौर्य और विद्युत वितरण खंड बांदा टीजी-22 के महेंद्र राय भी ट्रस्टी हैं। ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि कर्मचारियों, पेंशनर्स और इंजीनियर्स का प्रतिनिधित्व कर रहे इन ट्रस्टियों ने भी कर्मचारी हितों की रक्षा नहीं की। यदि ये ट्रस्टी उसी समय विरोध करते या सरकार से शिकायत करते तो डीएचएफएल में पैसा जाने से रोका जा सकता था।

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