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लापरवाही : केजीएमयू में वेंटिलेटर शिफ्टिंग में गई मरीज की जान
Sun, 21 Apr 2019 01:37 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Sun, 21 Apr 2019 01:37 AM IST
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- फोटो : डेमो
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केजीएमयू में दो विभागों के बीच चल रही शिफ्टिंग के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। परिवारीजनों का आरोप है कि वेंटिलेटर के उपकरण लगाते समय अधिक ऑक्सीजन दे दिया गया, जिससे मरीज का फेफड़ा फट गया। हालांकि केजीएमयू प्रशासन इस बात से इनकार कर रहा है।
उसका कहना है कि मरीज की हालत गंभीर थी। प्रयागराज निवासी जयशंकर तिवारी (45) को 24 मार्च को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। उन्हें ब्रेन हैमरेज होने के साथ ही सांस लेने की दिक्कत थी। कैजुअल्टी से उन्हें पल्मोनरी क्रिटिकल केयर विभाग के आरआईसीयू यूनिट में भर्ती किया गया।
शिवाकांत ने बताया कि उनके भाई जयशंकर की हालत में सुधार होने लगा था। इसी बीच17 अप्रैल को आरआइसीयू को यहां से शताब्दी अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। तत्कालीन तौर पर आरआईसीयू यूनिट के वेंटिलेटर नहीं चल रहे थे।
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ऐसे में मरीज जयशंकर को आरआइसीयू से क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के सीसीएम यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया। शिवाकांत का आरोप है कि वेंटिलेटर शिफ्टिंग के दौरान लापरवाही बरती गई। ऑक्सीजन पाइप लगाते समय मरीज की हालत बेकाबू हो गई।
आशंका है कि ऑक्सीजन अधिक दे दिया गया, जिससे उनका फेफड़ा फड़ गया। उस वक्त विभाग में मौजूद चिकित्सकों से शिकायत की गई, लेकिन उन्होंने जल्द ही रिकवरी होने की बात बताई। सुधार नहीं हुआ और शनिवार को मौत हो गई।
कोई लापरवाही नहीं है
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि मरीज काफी गंभीर स्थिति में था। शिफ्टिंग के दौरान कोई लापरवाही नहीं हुई है। मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अभी तक किसी ने लापरवाही के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की है।
क्या है शिफ्टिंग का चक्कर
दरअसल अभी तक आरआईसीयू यूनिट ट्रॉमा सेंटर की पांचवीं मंजिल पर चल रही थी। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग को शताब्दी अस्पताल फेज टू के दूसरी मंजिल पर पूरी तरह से शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में इस विभाग के अंतर्गत आने वाले आरआईसीयू यूनिट को भी शताब्दी अस्पातल के फेज टू में शिफ्ट कर दिया गया। यहां के छह वेंटिलेटर शताब्दी में भेजे गए हैं। जबकि नौ को वही छोड़ दिया गया। आरआईसीयू यूनिट के चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के शताब्दी में जाने के दौरान यहां पहले से भर्ती मरीजों को क्रिटिकिल केयर मेडिसिन विभाग की निगरानी में छोड़ा गया था। आरआईसीयू यूनिट शिफ्ट हो रही थी। ऐसे में यहां के मरीज को सीसीएम यूनिट में रखा गया था।
पांच लाख खर्च, फिर भी नहीं बची जान
शिवाकंत का कहना है कि मरीज को पेशाब हो रही थी, लेकिन शिफ्टिंग के दौरान बरती गई लापरवाही केबाद पेशाब होना बंद हो गई। इतना ही नहीं करीब पांच लाख रुपया खर्च किया गया। इसके बाद भी मरीज की जान नहीं बच सकी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
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उसका कहना है कि मरीज की हालत गंभीर थी। प्रयागराज निवासी जयशंकर तिवारी (45) को 24 मार्च को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। उन्हें ब्रेन हैमरेज होने के साथ ही सांस लेने की दिक्कत थी। कैजुअल्टी से उन्हें पल्मोनरी क्रिटिकल केयर विभाग के आरआईसीयू यूनिट में भर्ती किया गया।
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शिवाकांत ने बताया कि उनके भाई जयशंकर की हालत में सुधार होने लगा था। इसी बीच17 अप्रैल को आरआइसीयू को यहां से शताब्दी अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। तत्कालीन तौर पर आरआईसीयू यूनिट के वेंटिलेटर नहीं चल रहे थे।
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ऐसे में मरीज जयशंकर को आरआइसीयू से क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के सीसीएम यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया। शिवाकांत का आरोप है कि वेंटिलेटर शिफ्टिंग के दौरान लापरवाही बरती गई। ऑक्सीजन पाइप लगाते समय मरीज की हालत बेकाबू हो गई।
आशंका है कि ऑक्सीजन अधिक दे दिया गया, जिससे उनका फेफड़ा फड़ गया। उस वक्त विभाग में मौजूद चिकित्सकों से शिकायत की गई, लेकिन उन्होंने जल्द ही रिकवरी होने की बात बताई। सुधार नहीं हुआ और शनिवार को मौत हो गई।
कोई लापरवाही नहीं है
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि मरीज काफी गंभीर स्थिति में था। शिफ्टिंग के दौरान कोई लापरवाही नहीं हुई है। मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अभी तक किसी ने लापरवाही के बारे में कोई शिकायत भी नहीं की है।
क्या है शिफ्टिंग का चक्कर
दरअसल अभी तक आरआईसीयू यूनिट ट्रॉमा सेंटर की पांचवीं मंजिल पर चल रही थी। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग को शताब्दी अस्पताल फेज टू के दूसरी मंजिल पर पूरी तरह से शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में इस विभाग के अंतर्गत आने वाले आरआईसीयू यूनिट को भी शताब्दी अस्पातल के फेज टू में शिफ्ट कर दिया गया। यहां के छह वेंटिलेटर शताब्दी में भेजे गए हैं। जबकि नौ को वही छोड़ दिया गया। आरआईसीयू यूनिट के चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के शताब्दी में जाने के दौरान यहां पहले से भर्ती मरीजों को क्रिटिकिल केयर मेडिसिन विभाग की निगरानी में छोड़ा गया था। आरआईसीयू यूनिट शिफ्ट हो रही थी। ऐसे में यहां के मरीज को सीसीएम यूनिट में रखा गया था।
पांच लाख खर्च, फिर भी नहीं बची जान
शिवाकंत का कहना है कि मरीज को पेशाब हो रही थी, लेकिन शिफ्टिंग के दौरान बरती गई लापरवाही केबाद पेशाब होना बंद हो गई। इतना ही नहीं करीब पांच लाख रुपया खर्च किया गया। इसके बाद भी मरीज की जान नहीं बच सकी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।