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कोरोना मरीजों के लिए कारगर साबित होगी ऑक्सीजन थेरेपी, होम आइसोलेशन को मिलेगा बढ़ावा
Thu, 30 Jul 2020 10:37 AM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 30 Jul 2020 10:37 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पतालों में बेड की समस्या आने लगी है। ऐसे में ऑक्सीजन थेरेपी कारगर साबित होगी। इससे होम आइसोलेशन को बढ़ावा मिलेगा और अस्पतालों में बेड की समस्या कम होगी। इस पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ने मॉडल बनाया है।
इसमें ऑक्सीजन थेरेपी के साथ ब्लड प्रेशर, थर्मामीटर जांच आदि को भी शामिल किया गया है। इसे संस्थान के माध्यम से प्रदेश सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भेजने की तैयारी है। प्रदेश में होम आइसोलेशन की प्रक्रिया शुरू किए जाने से सरकारी तंत्र को काफी राहत मिली है।
अकेले राजधानी में सामान्य मरीजों के हाेम आइसोलेशन से गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने की समस्या कुछ कम हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लेवल टू और थ्री के अस्पताल भेजे जाने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए तो इसमें भी 20 से 30 फीसदी को घर पर रोका जा सकता है। इसके लिए ऑक्सीजन थेरेपी अपनानी होगी।
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लोगों को इसके बारे में जागरूक करना होगा। लोहिया संस्थान के एसो. प्रो. डॉ. राजीव रतन सिंह ने इस दिशा में प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें बताया गया है कि होम ऑक्सीजन थेरेपी से अस्पतालों में कम बेड में भी काम चलाया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल छात्रों और नर्सिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने की रणनीति है, ताकि वे घर-घर जाकर होम आइसोलेशन वाले मरीजों को थेरेपी के बारे में जानकारी दे सकें।
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इसमें ऑक्सीजन थेरेपी के साथ ब्लड प्रेशर, थर्मामीटर जांच आदि को भी शामिल किया गया है। इसे संस्थान के माध्यम से प्रदेश सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भेजने की तैयारी है। प्रदेश में होम आइसोलेशन की प्रक्रिया शुरू किए जाने से सरकारी तंत्र को काफी राहत मिली है।
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अकेले राजधानी में सामान्य मरीजों के हाेम आइसोलेशन से गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने की समस्या कुछ कम हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लेवल टू और थ्री के अस्पताल भेजे जाने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए तो इसमें भी 20 से 30 फीसदी को घर पर रोका जा सकता है। इसके लिए ऑक्सीजन थेरेपी अपनानी होगी।
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लोगों को इसके बारे में जागरूक करना होगा। लोहिया संस्थान के एसो. प्रो. डॉ. राजीव रतन सिंह ने इस दिशा में प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें बताया गया है कि होम ऑक्सीजन थेरेपी से अस्पतालों में कम बेड में भी काम चलाया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल छात्रों और नर्सिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने की रणनीति है, ताकि वे घर-घर जाकर होम आइसोलेशन वाले मरीजों को थेरेपी के बारे में जानकारी दे सकें।
होम ऑक्सीजन थेरेपी को समझेें
घर में बीमार व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया को होम ऑक्सीजन थेरेपी कहा जाता है। बाजार में घरेलू ऑक्सीमीटर मशीन और ऑक्सीजन कंसट्रेट मशीन सहित तमाम उपकरण आ गए हैं। इसमें कुछ बैटरी तो कई बिजली से चलते हैं। इन मशीनों से मरीज का ऑक्सीजन लेवल जांचा जा सकता है और उसी हिसाब से ऑक्सीजन दी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए विधिवत प्रशिक्षण की जरूरत है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो सके और लोगों का आत्मविश्वास बना रहे।
...इसलिए है इसकी जरूरत
यदि फेफड़ों का काम कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है तो शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में मरीज की जान जा सकती है। उसे तत्काल ऑक्सीजन देने की जरूरत होती है। इसके लिए मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है, लेकिन अब पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन की जरूरत नापने को ऑक्सीमीटर उपलब्ध हैं।
...इसलिए है इसकी जरूरत
यदि फेफड़ों का काम कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है तो शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में मरीज की जान जा सकती है। उसे तत्काल ऑक्सीजन देने की जरूरत होती है। इसके लिए मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है, लेकिन अब पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन की जरूरत नापने को ऑक्सीमीटर उपलब्ध हैं।
कितनी होती है आक्सीजन की जरूरत
उम्रदराज लोगों में खून में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा होती है। सामान्य तौर पर पल्स ऑक्सीमीटर यदि ऑक्सीजन सेचुरेशन लेबल 95 से 100 के बीच दिखाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह 95 से 80 तक है तो हाइपोक्सेमिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी है। ऐसे में ऑक्सीजन देना जरूरी है। यदि लेबल 80 से कम है तो यह इमरजेंसी है। ऐसे में तत्काल ऑक्सीजन देना शुरू कर दें और डॉक्टर के पास पहुंचें। कोरोना के मरीजों में लेबल 90 से कम होते ही सचेत होने की जरूरत है।
प्रशिक्षण की जरूरत इसलिए...
डॉ. राजीव रतन बताते हैं कि हर मरीज को अलग-अलग स्टेज की ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में मेडिकल छात्र और नर्सिंग छात्र को सप्ताहभर की ट्रेनिंग देकर उनके जरिये आम लोगों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। प्रोजेक्ट में बताया गया है कि एक रेजीडेंट की निगरानी में पांच से 10 छात्रों की टीम लगा दी जाए।
यह शहर में लोगों को प्रशिक्षित कर देगी। इस दौरान ब्लड प्रेशर नापने, थर्मामीटर से बुखार नापने के तरीके, सिलेंडर में इस्तेमाल होने वाले मास्क को प्रयोग करने के तरीके, स्वच्छता, ऑक्सीजन ट्यूब रखने के तरीके, उसे अपनाने के तरीके आदि भी सिखाए जा सकते हैं। वीडियो के जरिये भी इसे आम लोगों में पहुंचाया जाएगा।
प्रशिक्षण की जरूरत इसलिए...
डॉ. राजीव रतन बताते हैं कि हर मरीज को अलग-अलग स्टेज की ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में मेडिकल छात्र और नर्सिंग छात्र को सप्ताहभर की ट्रेनिंग देकर उनके जरिये आम लोगों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। प्रोजेक्ट में बताया गया है कि एक रेजीडेंट की निगरानी में पांच से 10 छात्रों की टीम लगा दी जाए।
यह शहर में लोगों को प्रशिक्षित कर देगी। इस दौरान ब्लड प्रेशर नापने, थर्मामीटर से बुखार नापने के तरीके, सिलेंडर में इस्तेमाल होने वाले मास्क को प्रयोग करने के तरीके, स्वच्छता, ऑक्सीजन ट्यूब रखने के तरीके, उसे अपनाने के तरीके आदि भी सिखाए जा सकते हैं। वीडियो के जरिये भी इसे आम लोगों में पहुंचाया जाएगा।
इन बीमारियों में भी मिलेगी राहत
डॉ. राजीव रतन बताते हैं कि यदि ऑक्सीजन लेवल जांचने और उसे मेंटेन करने के बारे में लोगों को प्रशिक्षित कर दिया जाए तो कोरोना काल ही नहीं सामान्य दिनों में क्रोनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, अस्थमा, निमोनिया, लंग कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या में भी कुछ वक्त के लिए राहत दी जा सकेगी। ऑक्सीमीटर को अंगुली पर लगाने से डिजिटल स्क्रीन पर खून में ऑक्सीजन का प्रवाह दिखता है। इससे गंभीर मरीजों को इलाज देने में सहूलियत होगी।
इन देशों में पहले से चल रही थेरेपी
चीन, जापान, अमेरिका, जर्मनी आदि देशों में होम ऑक्सीजन थेरेपी को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मई 2020 में जर्मन में हुए शोध में यह बात सामने आई कि लोगों को ऑक्सीजन थेरेपी के बारे में जागरूक करके 50 फीसदी बेड बचाने में कामयाबी मिली है।
इन देशों में पहले से चल रही थेरेपी
चीन, जापान, अमेरिका, जर्मनी आदि देशों में होम ऑक्सीजन थेरेपी को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मई 2020 में जर्मन में हुए शोध में यह बात सामने आई कि लोगों को ऑक्सीजन थेरेपी के बारे में जागरूक करके 50 फीसदी बेड बचाने में कामयाबी मिली है।