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Lucknow News: छात्रा को ऑस्कर पाता देख गर्व से चौड़ा हुआ शिक्षक का सीना
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लखनऊ। किसी भी गुरु के लिए सबसे बड़ा सुख उसके शिष्यों का सफलता की सीढ़ी चढ़ना होता है। शहर के बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने भी ऐसे ही एक गुरु होने का सौभाग्य हासिल किया है। उनकी शिष्य रह चुकीं गुनीत मोंगा की फिल्म- द एलीफैंट व्हिस्परिंग ने ऑस्कर में डॉक्यूमेंट्री की श्रेणी में पुरस्कार हासिल किया है। गुनीत को इससे पहले वर्ष 2019 में इंड ऑफ सेन्टेंस, डॉक्यूमेंट्री के लिए भी अवाॅर्ड मिल चुका है।
प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि बीबीएयू ज्वाॅयन करने से पहले वे दिल्ली में मधुबाला इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एंड इलेक्ट्रिकॉनिक मीडिया में शिक्षण कार्य करते थे। यहीं पर वर्ष 2002 के दौरान गुनीत मोंगा ने ज्वाॅइन किया था। प्रो. पांडेय के अनुसार, विभिन्न विषयों के प्रति उसकी समझ और संवेदनशीलता हमेशा से ही ध्यान खींचती थी। बेजुबानों के प्रति उसकी हमदर्दी और जुड़ाव देखने लायक था। गुनीत को पहला ऑस्कर जिस फिल्म के लिए मिला था, उसके निर्माता विदेशी थे। जबकि इस फिल्म का निर्माण गुनीत और उसकी साथी कार्तिकी गोंजाल्विस ने किया है। यह और भी गर्व वाली बात है। प्रो. पांडेय के अनुसार, अन्य छात्रों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उड़ान के लिए आकाश की कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ इच्छाशक्ति की।
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प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि बीबीएयू ज्वाॅयन करने से पहले वे दिल्ली में मधुबाला इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एंड इलेक्ट्रिकॉनिक मीडिया में शिक्षण कार्य करते थे। यहीं पर वर्ष 2002 के दौरान गुनीत मोंगा ने ज्वाॅइन किया था। प्रो. पांडेय के अनुसार, विभिन्न विषयों के प्रति उसकी समझ और संवेदनशीलता हमेशा से ही ध्यान खींचती थी। बेजुबानों के प्रति उसकी हमदर्दी और जुड़ाव देखने लायक था। गुनीत को पहला ऑस्कर जिस फिल्म के लिए मिला था, उसके निर्माता विदेशी थे। जबकि इस फिल्म का निर्माण गुनीत और उसकी साथी कार्तिकी गोंजाल्विस ने किया है। यह और भी गर्व वाली बात है। प्रो. पांडेय के अनुसार, अन्य छात्रों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उड़ान के लिए आकाश की कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ इच्छाशक्ति की।
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