फर्जी शॉपिंग वेबसाइट बनाकर इस तरह से लूटे लोगों के 2.20 करोड़
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लखनऊ में एक ऐसे अपराधिक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो नकली ऑनलाइन शापिंग वेबसाइट बनाकर लोगों को चूना लगा रहा था। ऑनलाइन शॉपिंग की फर्जी वेबसाइट बनाकर मात्र 170 दिन में 2.20 करोड़ रुपये कमाने वाले प्रतापगढ़ के शातिर साइबर क्रिमिनल हरिओम पांडेय और अजय कुमार दुबे को बुधवार दोपहर एसटीएफ ने कृष्णानगर से दबोच लिया।
दोनों ने एक नामचीन ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल के मिलते-जुलते नाम से वेबसाइट बनाई और मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रानिक्स सामान के ताबड़तोड़ आर्डर बुक करके रुपये जमा करा लिए। आर्डर की डिलीवरी न होने पर ग्राहकों ने शिकायतें शुरू की तब एसटीएफ को जांच सौंपी गई।
एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने साइबर क्रिमिनलों की पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला शातिरों ने राजधानी के कृष्णानगर और नोएडा में दो कॉल सेंटर भी खोले हैं। इन कॉल सेंटर से मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम ठगी जा रही थी।
एसटीएफ ने कॉल सेंटर सील कर दिए हैं। पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि हरिओम पांडेय और अजय कुमार दुबे संगठित गिरोह बनाकर लोगों को ठग रहे हैं। गाजियाबाद के शालीमार अपार्टमेंट में रहने वाला लीजू सैमुअल भी इनका साथी है। उसकी तलाश की जा रही है। एएसपी ने बताया कि गिरोह से कई और लोग जुड़े हैं जिन्हें जल्द पकड़ लिया जाएगा।
वेबसाइट के साथ फर्जी थी कंपनियां भी
हरिओम और अजय फर्जी नाम-पते से ठगी कर रहे थे। उन्होंने शॉपिंग वेबसाइट के अलावा सात कंपनियां भी फर्जी पते से बनाई थीं। यही वजह थी कि शातिरों ने ख्वाब में भी कानून के शिकंजे में फंसने की बात नहीं सोची थी।
एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि हरिओम पांडेय पट्टी प्रतापगढ़ के मझिगवां और अजय कुमार दुबे दफरा, आसपुर, देवसरा गांव का है। हरिओम ने विजयनगर गाजियाबाद के राहुल विहार-2 निवासी देवेश सिंह और अजय ने वहीं के समीर शर्मा व जौनपुर के बदलापुर गडेरिहा निवासी विकास के नाम से फर्जी वोटर आईडी बनवाई थी।
लीजू सैमुअल के पास विकास सिंह की आईडी थी। गाजियाबाद के एक युवक ने 3000 रुपये में एक फर्जी वोटर आईडी बनवाई थीं। इसमें फोटो असली थी, नाम-पते गलत थे। एसटीएफ ने फर्जी आईडी बनवाने वाले युवक का पता लगा लिया है।
फर्जी आईडी के आधार पर ही ठगों ने फर्जी सिमकार्ड खरीदे और पैन कार्ड बनवाए। इसके बाद फर्जी नाम-पते से वेबसाइट और इंफो सॉल्यूशंस, इंफो एज़ सर्विसेज, जिप इंडिया शॉपिंग मार्ट, इंफो ई सर्विसेज, सिविक कम्युनिकेशन, एफएनएफ नौकरी सॉल्यूशंस और आईजे नौकरी सर्विसेज के नाम से सात कंपनियां खोली गईं।
एक दिन पहले बंद हो गया था कॉल सेंटर
गिरोह की पड़ताल में लगी एसटीएफ की टीम के लोग बीते एक सप्ताह से कृष्णानगर स्थित कॉल सेंटर की निगरानी कर रहे थे। आसपास के लोगों और स्टाफ के सदस्यों से कॉल सेंटर के बारे में जानकारी लेने पर यहां का स्टाफ आशंकित हो गया।
करीब चार दिन पहले से स्टाफ के अधिकतर लोगों ने आना बंद कर दिया। एक दिन पहले कॉल सेंटर बंद हो गया। एएसपी ने बताया कि कॉल सेंटर में 50 कर्मचारी रोज सैकड़ों कॉल करके लोगों से मल्टीनेशनल कंपनियों में हाई प्रोफाइल नौकरी के नाम पर ठगते थे।
छानबीन में पता चला है कि कॉल सेंटर सिर्फ चार महीने पुराना है और इसे बनवाने में 35 लाख रुपये खर्च हुए थे। कॉल सेंटर में एयरटेल कंपनी की पीआरआई लाइन (ऐसी लाइन जिसमें एक ही नंबर पर एक साथ 30 कॉल की जा सकती हैं। इस नंबर पर इनकमिंग की सुविधा नहीं होती।) ली गई थी।
कॉल सेंटर से ठगी के लिए शातिर मॉनस्टर डॉट कॉम जैसी बड़ी कंपनियों से 35 पैसे में एक बॉयोडाटा खरीदते थे। इसके बाद बॉयोडाटा के हिसाब से कंपनियां चुनकर संबंधित आवेदक को फोन किया जाता था। अगर किसी युवक ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया है या किसी के पास फाइनेंस से एमबीए की डिग्री है तो उन्हें वैसी ही कंपनियों में देश-विदेश में जॉब ऑफर करके रजिस्ट्रेशन के रूप में ऑनलाइन हजारों रुपये जमा करा लिए जाते थे।
ठगों के पास मिले 14 बैंक अकाउंट
ठगों ने 14 अलग-अलग बैंक में अकाउंट खुलवाए थे। इसमें से कानपुर रोड एलडीए कालोनी स्थित पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया का ब्यौरा एसटीएफ ने जुटा लिया है। बाकी 12 बैंक अकाउंट दिल्ली और नोएडा के हैं जिनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
एसटीएफ अफसर ठगों के कागजातों का वेरीफिकेशन किए बगैर अकाउंट खोलने पर संबंधित बैंक के अफसरों को भी दोषी मान रहे हैं। एसटीएफ के एक अफसर ने कहा कि अगर छानबीन में किसी बैंक अफसर या कर्मचारी का नाम सामने आया तो उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।
सेंट्रो कार, कॉल सेंटर से 150 लैंड लाइन फोन, नौ डेस्कटॉप कंप्यूटर, दो प्रिंटर, छह मोबाइल फोन, अलग-अलग बैंक के नौ एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, तीन पैन कार्ड, छह पासबुक, नौ सिमकार्ड, एक लैपटॉप, तीन वोटर आईडी, तीन फर्जी मुहरें, एक स्टाम्प पैड और 9000 रुपये नकद।