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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   One crore was spent in 18 months, conspiracy was hatched to grab 146 crores, three hackers were hired

Lucknow News : 18 महीने में एक करोड़ खर्च रची थी 146 करोड़ हड़पने साजिश, तीन हैकरों को किया था हायर

Tue, 01 Nov 2022 06:50 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 01 Nov 2022 06:50 PM IST
सार

उत्तरप्रदेश कोआपरेटिव बैंक के खाते से रुपये हड़पने की साजिश 18 महीने पहले रची गई थी। आकाश ने बताया कि मेरे पास एक हैकर है। यदि हम लोग बैंक के किसी अधिकारी को सेट कर लें तो बैंक के सिस्टम को रिमोट एक्सिस पर लेकर हम लोग लगभग 300 करोड़ रूपये अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेंगें।

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One crore was spent in 18 months, conspiracy was hatched to grab 146 crores, three hackers were hired
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तरप्रदेश कोआपरेटिव बैंक के खाते से 146 करोड़ रुपये हड़पने की साजिश 18 महीने पहले रची गई थी। इसके लिए बिल्डर गंगा सागर चौहान, मास्टर माइंड ध्रुव व रामराज व गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों ने मिलकर एक करोड़ रुपये खर्च कर तीन हैकर हायर किये और 6 डिवाइस, 3 की-लागर साफ्टवेयर खरीदा था। वहीं तीन बैंक के अधिकारियों की मदद से सर्वर को हैक कर 146 करोड़ रुपये खाते से उड़ाये थे। यह खुलासा मंगलवार को एसटीएफ की गिरफ्त में आये दो मास्टर माइंड सहित पांच आरोपियों ने पूछताछ में किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस बड़े हेराफेरी के लिए बैंक के अधिकारी व कर्मचारी के अलावा बाहरी मिलाकर 25 व्यक्तियों की पांच टीमें बनाई गई थी। सभी के काम अलग-अलग बांट दिये गये थे।

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कार्यवाहक एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक साइबर हैकरों ने सर्वर को हैक कर, प्रबंधक व कैशियर के लागिन आइडी पासवर्ड प्राप्त किया। इसके बाद सिस्टम को रिमोट एक्सिस पर लेकर एनएडी अनुभाग में खुले 7 खातों से 08 बार लेन-देन कर 146 करोड़ के आरटीजीएस करके ठगी का प्रयास किया गया था। इस मामले में एसटीएफ की टीम ने दो मास्टर माइंड सहित पांच लोगों को पालीटेक्निक चौराहे के पास से सोमवार देर रात को गिरफ्तार किया है।
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पकड़े गये मास्टर माइंड में लोक भवन के गृह अनुभाग में तैनात व पारा के गायत्रीनगर का अनुभाग अधिकारी रामराज और शाहजहांपुर के न्यू कालोनी लोधीपुर  का मूलरुप से रहने वाले कृष्णानगर के अलीनगर सुनहरा निवासी ध्रुव कुमार श्रीवास्तव शामिल है। इसके अलावा आशियाना के शारदानगर रतनखंड का रहने वाला कोआपरेटिव बैंक सीतापुर महमूदाबाद का सहायक प्रबंधक कर्मवीर सिंह, कानपुर नौबस्ता का आकाश कुमार श्रीवास्तव और मूलरुप से औरंगाबाद बिहार के जगरनाथ विघा का लखनऊ के रूचिखंड रायबरेली रोड निवासी भूपेंद्र सिंह  शामिल हैं। एसटीएफ ने इन आरोपियों के पास से एक बैंक का पहचान पत्र, 25 सेट आधार कार्ड, दस्तखत किये ब्लैंक चेक, 25 सेट निवास प्रमाण पत्र, सादे स्टाम्प पेपर, 8 मोबाइल, 7 डेविट कार्ड, एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक मेट्रो कार्ड, एक निवार्चन कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, 15390 रुपये नकदी, 25 सेट हाईस्कूकल व इंटर के प्रमाण पत्र व अंक पत्र, एक चार पहिया वाहन और दो बाइक बरामद की है।

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300 करोड़ रुपये उड़ाने की थी साजिश, मुंबई से बुलाया था हैकर

एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक पकड़े गये मास्टर माइंड ध्रुव श्रीवास्तव ने पूछताछ में कुबूल किया कि वह मई 2021 में लखनऊ अपने मित्र ज्ञानदेव पाल के साथ आया था। जहां आकाश कुमार से मुलाकात हुई। आकाश के जरिए ज्ञानदेव व ध्रुव एक ठेकेदार से मिले। उसने बताया कि मेरे पास एक हैकर है। यदि हम लोग बैंक के किसी अधिकारी को सेट कर लें तो बैंक के सिस्टम को रिमोट एक्सिस पर लेकर हम लोग लगभग 300 करोड़ रूपये अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेंगे। इसके बाद हम लोगों की मीटिंग भूपेंद्र सिंह के माध्यम से  उप्र कोआपरेटिव बैंक लि. महमूदाबाद के सहायक प्रबंधक कर्मवीर सिंह से हुई। इसके बाद मुंबई से एक हैकर को बुलाया गया। जिसको होटल कंफर्ट जोन चारबाग में ठहराया। हैकर ने एक डिवाइस तैयार की। जिसको कर्मवीर सिंह व ज्ञानदेव पाल डिवाइस को बैंक के सिस्टम में लगाते रहे।

आठ बार डिवाइस लगाने में नहीं मिली सफलता
एसटीएफ एसएसपी के मुताबिक पूछताछ में ध्रुव ने बताया कि डिवाइस लगाने का 8 बार प्रयास किया गया पर सफलता नही मिली। इसी बीच इनकी मुलाकात लोक भवन में तैनात अनुभाग अधिकारी रामराज से हुई। इन्हीं की टीम में उमेश गिरी था, जिसने पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे से संपर्क किया। 14 अक्तूबर शुक्रवार को आरएस दुबे, रवि वर्मा व ज्ञानदेव पाल शाम 6  बजे के बाद बैंक गये, कीलागर इंसटॉल कर डिवाइस लगायी। दूसरे दिन सुबह 15 अक्तूबर शनिवार सुबह पांच टीमों के करब 25 लोग के साथ केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास पहुंचे। वहां से रवि वर्मा और पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे बैंक के अंदर गये।

पूर्व प्रबंधक व रवि ट्रांजेक्शन के दौरान निकाल देते थे डिवाइस
ध्रुव ने एसटीएफ की पूछताछ में कुबूल किया कि बैंक के अंदर पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे व रवि वर्मा गये थे। क्योंकि जब बाहर से ट्रांजेक्शन होता है तो वह लोग सिस्टम में इंसटाल साफ्टवेयर को अनइंसटाल कर देते, फिर सिस्टम में लगे डिवाइस व बैंक में लगे डीवीआर को निकाल लेते थे। लेकिन गार्ड ने उनको अंदर टोक दिया। इसके बाद वापस आ गये। लंच के बाद ज्ञानदेव पाल, उमेश गिरी, बैंकर व साइबर एक्सपर्ट के साथ मिलकर 146 करोड़ रुपये गंगा सागर सिंह के कंपनियों के अलग-अलग खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर  दिये।

ढाबे पर रुककर रुपये ट्रांसफर का कर रहे थे इंतजार

एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम के मुताबिक आरोपियों ने रकम गंगा सागर चौहान के खाते में आरटीजीएस करने के बाद लखनऊ-अयोध्या हाइवे पर बाराबंकी स्थित ब्रेक प्वाइंट ढाबे पर गये। वहां दो-तीन घंटे तक रुके और गंगा सागर चौहान के खाते में रकम ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन रुपये गंगा सागर के खाते में ट्रांसफर नहीं हुए। वहीं गंगा सागर का खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ध्रुव ने पुलिस के सामने कुबूल किया इसके बाद वह नैनीताल भाग गया। वहीं अन्य लोग भी अपने छिपने के ठिकाने पर चले गये।

एक साल में हैकर पर खर्च किये 30 लाख रुपये
एसएसपी एसटीएफ के मुताबिक जालसाजों का यह गिरोह 146 करोड़ की हेराफेरी के लिए 18 महीने से लगातार प्रयास कर रहे थे। मास्टर माइंड ध्रुव ने बताया कि उसने हैकर व गिरोह के अन्य सदस्य लगातार चारबाग इलाके के होटल में रुकते थे। एक साल तक लगातार कमरे बुक होते थे। एक साल में हैकरों व अन्य लोगों को रुकने के लिए 30 लाख रुपये खर्च किये। इसके अलावा 15 से 20 लाख रुपये और खर्च किये गये। इसके अलावा डिवाइस के लिए गिरोह के गंगा सागर चौहान, मास्टर माइंड रामराज, पूर्व प्रबंधक आरएस दुबे, सहायक प्रबंधक कर्मवीर सिंह सहित कुछ अन्य सदस्यों ने मिलकर 50 लाख रुपये खर्च किये थे। इस बात की पुष्टि एसटीएफ गिरफ्त में आये अन्य चारों आरोपियों ने भी की है।

नौकरी के नाम पर ठगी का भी हुआ खुलासा
एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक के 146 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में लोक भवन में तैनात अनुभाग अधिकारी रामराज भी गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में एसटीएफ को नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ। आरोपी रामराज के पास से 130 बेरोजगारों के अंक पत्र व प्रमाण पत्र भी मिले। रामराज ने बेरोजगारों को सरकारी विभागाें में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगे। पूछताछ में अनुभाग अधिकारी रामराज ने बताया कि उसने अपने साथी विनय गिरी से मिलकर 130 से अधिक बच्चों को सरकारी विभागों रेलवे में ग्रुप सी व डी, हाईकोर्ट, एनटीपीसी, टीजीटी, पीजीटी, एनम आदि में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली की है। उनके यह प्रमाण पत्र सिक्योरिटी के तौर पर अपने पास रख लिया था।

 

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