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Lucknow News: 80 पार करने वाले बोले, उम्र न पूछिए हुजूर... अभी जवान हैं हम
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87 साल के प्रवीण जैन ने 6000 फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग, 84 साल के पत्रकार उठा रहे जनता क
अभिषेक सहज
लखनऊ। जुनून, जज्बे और जोश के साथ जिंदगी जीने का अंदाज अगर बेहतर हो तो उम्र सिर्फ एक नंबर है। ...और इस बात को राजधानी की कई शख्सियतों ने साबित भी कर दिया है। विश्व वृद्धजन दिवस के मौके पर हम आपकी मुलाकात करा रहे हैं ऐसे ही कुछ लोगों से जिन्होंने उम्र के 80 वसंत भले ही पार कर लिए हों लेकिन उनमें जोश आज भी जवानों जैसा ही है। किसी शायर ने क्या खूब कहा है-
उम्र का बढ़ना तो दस्तूर-ए-जहां है।
महसूस ना करें तो बढ़ती कहां है।
इस खबर के माध्यम से हम आपको सिर्फ यही बताना चाहते हैं कि मन के जीते जीत है और मन के हारे हार। 80 की उम्र पार कर चुके इन लोगों का मानना है कि जीवन में आहार, विहार, व्यायाम और निद्रा के संतुलन का होना बेहद जरूरी है। इन बुजुर्गों ने कहा कि इससे भी ज्यादा जरूरी है कि आपकी इच्छा शक्ति कितनी दृढ़ है और सोच कितनी सकारात्मक। बस यही लंबे और खुशहाल जीवन का रहस्य है। आइए जानते हैं इन बुजुर्गों के बारे में जो समाज के लिए मिसाल बन चुके हैं।
व्यवसायी प्रवीण जैन ने छह हजार फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग
शहर के प्रमुख व्यवसायी प्रवीण कुमार जैन ने 1969 में अपने भाइयों के साथ मिलकर प्रतिभा सिनेमा की नींव रखी थी। 1974 में शुरू हुई यह टाकीज मल्टीप्लेक्स के दौर में आज भी चल रही है। नियमित व्यायाम और संयमित दिनचर्या का पालन करने वाले 87 वर्षीय प्रवीण जैन ने बताया कि पिछले दिनों वे अपने परिवार के साथ आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड गए थे। न्यूजीलैंड में अपने बेटों के साथ छह हजार फीट की ऊंचाई से स्काई डाइविंग की। प्रवीण जैन ने बताया कि उनके एक बेटे मोहित जैन इनकम टैक्स विभाग में प्रिंसिपल कमिश्नर हैं तो दूसरे अनुराग जैन व्यवसाय संभालते हैं। अनुराग जैन ने बताया कि पिताजी आज भी पहले की तरह ही सक्रिय हैं और व्यवसाय में पूरी मदद करते हैं। प्रवीण जैन के अनुसार, जिंदगी जिंदादिली का नाम है।
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84 साल की उम्र में भी समाज के लिए संघर्षरत हैं श्याम कुमार
वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार 84 साल की उम्र में भी आमजन की समस्याओं को लेकर बेहद सजग हैं। सुबह चार बजे उठना, व्यायाम करना, अखबार पढ़ना और अखबार में प्रकाशित जनता की समस्याओं की कटिंग की फाइल तैयार कर उन्हें संबंधित विभाग व सरकार के जिम्मेदार मंत्री-विधायकों तक पहुंचाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। पिछले 40 वर्षों से वे दिन में केवल एक बार ही भोजन करते हैं। ज्यादातर दिन तो केवल फल या दूध ही पीते हैं और फिर निकल पड़ते हैं कांधे पर झोला लटकाकर जन समस्याओं के निस्तारण के लिए। उन्होंने बताया कि कई दशकों तक वे इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने को लेकर संघर्ष करते रहे और फिर आखिरकार सरकार ने उनकी मांग मान ली। उत्तरप्रदेश स्थापना दिवस मनाए जाने की शुरुआत भी उन्हीं के संघर्ष का परिणाम है। चार दशक बाद आखिरकार राज्यपाल राम नाईक ने उनकी मांग सरकार तक पहुंचाई और फिर शुरुआत हुई स्थापना दिवस मनाने की। इसी तरह मूर्ख दिवस, हास्य कवि सम्मेलन और किशोर की जयंती जैसे उनके आयोजन उनकी सक्रियता से शहर में चर्चा का विषय रहते हैं।
आहार, विहार, व्यायाम और निद्रा के संतुलन ने बनाया निरोगी
फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे प्रो. जेएन मिश्रा 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे लेकिन मरीजों को देखना बंद नहीं किया। उनका सबसे ज्यादा ध्यान शोध पर रहा और आज भी वे सर्वाइकल कैंसर को लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 25 से ज्यादा लोगों ने उनके निर्देशन में पीएचडी की और 100 से ज्यादा एमडी रहे। कई देशों में जाकर व्याख्यान देते हैं। 81 वर्ष की उम्र में भी सक्रियता का राज वे बताते हैं कि आयुर्वेद में निरोगी काया के लिए चार उपचार मुख्य हैं विहार, आहार, व्यायाम और निद्रा। इनका संतुलन सही हो तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है। उन्होंने बताया कि वे मुख्यत: उन असाध्य रोगों व रोगियों पर शोध कर रहे हैं जो देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों ने निराश लौट आते हैं। कहा, जब उन्हें मेरे इलाज से राहत मिलती है तो मुझे भी सुकून मिलता है।
रंगमंच में सक्रिय चिरयुवा डॉ. अनिल रस्तोगी
64 साल से रंगमंच पर सक्रिय 82 वर्षीय डॉ. अनिल रस्तोगी आज भी किसी युवा रंगकर्मी से ज्यादा मंचों पर नजर आते हैं। उनकी जीवटता उनकी उम्र को चिढ़ाती है। वे अब तक 99 नाटकों के हजारों शो कर चुके हैं। उनके 99वें नाटक डैडी का मंचन सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के निर्देशन में पिछले दिनों संगीत नाटक अकादमी में हुआ था। इस नाटक में उन्होंने एक डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति का किरदार निभाया जिसे देखकर कतई नहीं लगा कि वे अपनी उम्र के 80 साल पार कर चुके हैं। इश्कजादे समेत कई मशहूर फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि रंगमंच से उनका प्यार और अभिनय के प्रति दीवानगी ने ही उन्हें इतने वर्षों तक लगातार काम करने की प्रेरणा दी।
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लखनऊ। जुनून, जज्बे और जोश के साथ जिंदगी जीने का अंदाज अगर बेहतर हो तो उम्र सिर्फ एक नंबर है। ...और इस बात को राजधानी की कई शख्सियतों ने साबित भी कर दिया है। विश्व वृद्धजन दिवस के मौके पर हम आपकी मुलाकात करा रहे हैं ऐसे ही कुछ लोगों से जिन्होंने उम्र के 80 वसंत भले ही पार कर लिए हों लेकिन उनमें जोश आज भी जवानों जैसा ही है। किसी शायर ने क्या खूब कहा है-
उम्र का बढ़ना तो दस्तूर-ए-जहां है।
महसूस ना करें तो बढ़ती कहां है।
इस खबर के माध्यम से हम आपको सिर्फ यही बताना चाहते हैं कि मन के जीते जीत है और मन के हारे हार। 80 की उम्र पार कर चुके इन लोगों का मानना है कि जीवन में आहार, विहार, व्यायाम और निद्रा के संतुलन का होना बेहद जरूरी है। इन बुजुर्गों ने कहा कि इससे भी ज्यादा जरूरी है कि आपकी इच्छा शक्ति कितनी दृढ़ है और सोच कितनी सकारात्मक। बस यही लंबे और खुशहाल जीवन का रहस्य है। आइए जानते हैं इन बुजुर्गों के बारे में जो समाज के लिए मिसाल बन चुके हैं।
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व्यवसायी प्रवीण जैन ने छह हजार फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग
शहर के प्रमुख व्यवसायी प्रवीण कुमार जैन ने 1969 में अपने भाइयों के साथ मिलकर प्रतिभा सिनेमा की नींव रखी थी। 1974 में शुरू हुई यह टाकीज मल्टीप्लेक्स के दौर में आज भी चल रही है। नियमित व्यायाम और संयमित दिनचर्या का पालन करने वाले 87 वर्षीय प्रवीण जैन ने बताया कि पिछले दिनों वे अपने परिवार के साथ आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड गए थे। न्यूजीलैंड में अपने बेटों के साथ छह हजार फीट की ऊंचाई से स्काई डाइविंग की। प्रवीण जैन ने बताया कि उनके एक बेटे मोहित जैन इनकम टैक्स विभाग में प्रिंसिपल कमिश्नर हैं तो दूसरे अनुराग जैन व्यवसाय संभालते हैं। अनुराग जैन ने बताया कि पिताजी आज भी पहले की तरह ही सक्रिय हैं और व्यवसाय में पूरी मदद करते हैं। प्रवीण जैन के अनुसार, जिंदगी जिंदादिली का नाम है।
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84 साल की उम्र में भी समाज के लिए संघर्षरत हैं श्याम कुमार
वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार 84 साल की उम्र में भी आमजन की समस्याओं को लेकर बेहद सजग हैं। सुबह चार बजे उठना, व्यायाम करना, अखबार पढ़ना और अखबार में प्रकाशित जनता की समस्याओं की कटिंग की फाइल तैयार कर उन्हें संबंधित विभाग व सरकार के जिम्मेदार मंत्री-विधायकों तक पहुंचाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। पिछले 40 वर्षों से वे दिन में केवल एक बार ही भोजन करते हैं। ज्यादातर दिन तो केवल फल या दूध ही पीते हैं और फिर निकल पड़ते हैं कांधे पर झोला लटकाकर जन समस्याओं के निस्तारण के लिए। उन्होंने बताया कि कई दशकों तक वे इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने को लेकर संघर्ष करते रहे और फिर आखिरकार सरकार ने उनकी मांग मान ली। उत्तरप्रदेश स्थापना दिवस मनाए जाने की शुरुआत भी उन्हीं के संघर्ष का परिणाम है। चार दशक बाद आखिरकार राज्यपाल राम नाईक ने उनकी मांग सरकार तक पहुंचाई और फिर शुरुआत हुई स्थापना दिवस मनाने की। इसी तरह मूर्ख दिवस, हास्य कवि सम्मेलन और किशोर की जयंती जैसे उनके आयोजन उनकी सक्रियता से शहर में चर्चा का विषय रहते हैं।
आहार, विहार, व्यायाम और निद्रा के संतुलन ने बनाया निरोगी
फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे प्रो. जेएन मिश्रा 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे लेकिन मरीजों को देखना बंद नहीं किया। उनका सबसे ज्यादा ध्यान शोध पर रहा और आज भी वे सर्वाइकल कैंसर को लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 25 से ज्यादा लोगों ने उनके निर्देशन में पीएचडी की और 100 से ज्यादा एमडी रहे। कई देशों में जाकर व्याख्यान देते हैं। 81 वर्ष की उम्र में भी सक्रियता का राज वे बताते हैं कि आयुर्वेद में निरोगी काया के लिए चार उपचार मुख्य हैं विहार, आहार, व्यायाम और निद्रा। इनका संतुलन सही हो तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है। उन्होंने बताया कि वे मुख्यत: उन असाध्य रोगों व रोगियों पर शोध कर रहे हैं जो देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों ने निराश लौट आते हैं। कहा, जब उन्हें मेरे इलाज से राहत मिलती है तो मुझे भी सुकून मिलता है।
रंगमंच में सक्रिय चिरयुवा डॉ. अनिल रस्तोगी
64 साल से रंगमंच पर सक्रिय 82 वर्षीय डॉ. अनिल रस्तोगी आज भी किसी युवा रंगकर्मी से ज्यादा मंचों पर नजर आते हैं। उनकी जीवटता उनकी उम्र को चिढ़ाती है। वे अब तक 99 नाटकों के हजारों शो कर चुके हैं। उनके 99वें नाटक डैडी का मंचन सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के निर्देशन में पिछले दिनों संगीत नाटक अकादमी में हुआ था। इस नाटक में उन्होंने एक डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति का किरदार निभाया जिसे देखकर कतई नहीं लगा कि वे अपनी उम्र के 80 साल पार कर चुके हैं। इश्कजादे समेत कई मशहूर फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि रंगमंच से उनका प्यार और अभिनय के प्रति दीवानगी ने ही उन्हें इतने वर्षों तक लगातार काम करने की प्रेरणा दी।

87 साल के प्रवीण जैन ने 6000 फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग, 84 साल के पत्रकार उठा रहे जनता क

87 साल के प्रवीण जैन ने 6000 फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग, 84 साल के पत्रकार उठा रहे जनता क

87 साल के प्रवीण जैन ने 6000 फीट की ऊंचाई से की स्काई डाइविंग, 84 साल के पत्रकार उठा रहे जनता क