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NRHM: कौन है कुशवाहा का वह खास अधिकारी

Wed, 16 Apr 2014 08:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 16 Apr 2014 08:28 AM IST
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officer helps kushwaha in scam

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कई सौ करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जितने एनजीओ के नाम सामने आए हैं, वे पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी एक आईएएस अधिकारी के भरोसे वाले हैं।

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इसी के जरिये इन एनजीओ को काम मिला और पूर्व मंत्री से नजदीकी बनी।

ईडी को इस बात के भी संकेत मिले हैं कि एनजीओ द्वारा की गई मनी लॉन्ड्रिंग से अधिकारी के तार भी जुड़े हैं। ईडी अब इसके साक्ष्य तलाश रही है।

ईडी ने एनआरएचएम के बजट की बंदरबांट के बाद हड़पी गई रकम की मनी लॉन्ड्रिंग कर उसे काला से सफेद बनाने में लगी एनजीओ की पड़ताल शुरू की है।

अभी तक सामने आई संपत्तियों के अलावा इन संस्थाओं में जो रकम लगाई गई, उससे ईडी का यह आकलन है कि मनी लॉन्ड्रिंग में लगाई गई रकम चार सौ करोड़ से कहीं अधिक है।
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ईडी अब इस नतीजे पर पहुंचने की कोशिश में है कि मनी लॉन्ड्रिंग की रकम असलियत में कितनी है।

सूत्रों के अनुसार इस बात के साक्ष्य तलाशे जा रहे हैं कि पूर्व मंत्री के करीबी आईएएस के इन एनजीओ से कैसे रिश्ते हैं।

जिस तरह के संकेत मिले हैं उससे यह पुष्ट करने की कोशिश हो रही है कि यह आईएएस भी मनी लॉन्ड्रिंग के खेल से जुड़े हैं या नहीं।

हालांकि, ईडी को यह जानकारी मिली है कि लखनऊ के एक कारोबारी के नाम से राजधानी में लगभग 80 करोड़ की जमीन में इस आईएएस अधिकारी की भी साझेदारी है।

यह कारोबारी मनी लॉन्ड्रिंग करने वाली एनजीओ के संचालक का भी करीबी है।

ईडी को पुख्ता जानकारी मिल चुकी है कि यह कारोबारी और बीएसएनएल की नौकरी छोड़ कर एनजीओ के धंधे में उतरा शख्स, दोनों ही उक्त आईएएस के खासे करीब और भरोसेमंद लोगों में से एक हैं।
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ईडी को यह भी जानकारी मिल चुकी है कि इस अफसर का हाथ इन दोनों पर होने की वजह से ही ये पूर्व मंत्री के भी करीब आए।

फिर उन्हें नियमों की अनदेखी कर करोड़ों का काम और उसका कई बार अग्रिम भुगतान भी किया गया।

लखनऊ, वाराणसी, देवरिया, मिर्जापुर व कानपुर के कुछ कारोबारियों के नाम भी ईडी को पता चले हैं। इन सभी को पूर्व मंत्री का वरदहस्त हासिल था।

फिलहाल, ईडी जांच के दायरे में आई एनजीओ व उनके संचालन से जुड़े लोगों और उनके करीबियों के खातों की जांच कर रही है ताकि इस बात के साक्ष्य जुटाए जा सकें कि आईएएस अधिकारी ने भी इस घोटाले से सीधा लाभ उठाया।

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