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चौंकाने वाला सच: लखनऊ में उपकेंद्रों पर बिजलीकर्मी घट रहे, उपभोक्ता हर साल बढ़ रहे; अनुभव की कमी से बढ़े हादसे

Mon, 05 Oct 2026 09:08 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 05 Oct 2026 09:08 AM IST
सार

लखनऊ में उपकेंद्रों पर बिजलीकर्मी 30 फीसदी तक घट गए हैं, जबकि उपभोक्ता हर साल 15 फीसदी बढ़ रहे हैं। कर्मियों में अनुभव की कमी से हादसे काफी बढ़ गए हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Number of electricity workers at Lucknow substations is declining while consumers rises annually
उपकेंद्र पर बिजली की लाइन सही करता कर्मचारी। (सांकेतिक) - फोटो : बिजली निगम

विस्तार

राजधानी लखनऊ में बिजली उपकेंद्रों पर उपभोक्ताओं की शिकायतें दूर करने वाले संविदाकर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटा दी गई है, जबकि हर साल करीब 15 फीसदी उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। पहले चार कर्मचारियों के गैंग से होने वाला काम अब तीन कर्मियों से कराया जा रहा है। आरोप है कि कई उपकेंद्रों पर 11 और 33 हजार वोल्ट की लाइनों के खंभों पर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव के कर्मियों को चढ़ाया जा रहा है। इससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।

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संविदा यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद के मुताबिक, पहले एक गैंग में एक लाइनमैन, एक पेट्रोलमैन और दो सहयोगी होते थे। खंभे पर चढ़कर काम करने की जिम्मेदारी सिर्फ लाइनमैन की थी। अब तीन कर्मचारियों के गैंग में एक कुशल और दो अकुशल संविदा कर्मी रखे जा रहे हैं। 

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वेतन रोकने की धमकी भी दी जाती

शिकायतों का बोझ बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है। खालिद का आरोप है कि शिकायतों का दबाव बढ़ने पर जेई और एसडीओ संविदाकर्मियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं। नौकरी से निकालने और वेतन रोकने की धमकी भी दी जाती है।

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उपकेंद्रों पर नहीं है ड्यूटी चार्ट

वीआईपी क्षेत्रों के उपकेंद्रों को छोड़कर अधिकांश जगह संविदाकर्मियों का ड्यूटी चार्ट चस्पा नहीं किया जाता। यूनियन का आरोप है कि ड्यूटी चार्ट नहीं होने से तय अवधि से अधिक काम कराने की शिकायतों का रिकॉर्ड सामने नहीं आ पाता।

कर्मी बढ़े तो सुधरी व्यवस्था

मई से जुलाई के बीच राजधानी में बिजली संकट के दौरान मध्यांचल निगम के निदेशक तकनीकी हरीश बंसल ने उपकेंद्रों का निरीक्षण किया था। इस दौरान कर्मचारियों की कमी सामने आई। तत्कालीन एमडी रिया केजरीवाल की अनुमति से तीन-चार माह के लिए कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई, जिससे व्यवस्था में सुधार हुआ।
 

कई हादसे, फिर भी नहीं बदली व्यवस्था

  • फरवरी में कल्याणपुर में परशुराम रावत की मौत।
  • अप्रैल में दुबग्गा उपकेंद्र पर सुहैल करंट से झुलसा।
  • मई में मोहनलालगंज ओल्ड उपकेंद्र में महानंद झुलसे।
  • सितंबर में चिनहट शिवपुरी उपकेंद्र के रंजीत कुमार की मौत।
  • अक्टूबर में आशियाना उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन अभिषेक झुलसे।

पारिश्रमिक : अकुशल संविदाकर्मी 11,200 रुपये और कुशल संविदाकर्मी 14,100 रुपये।

वर्टिकल में कर्मियों का शोषण बढ़ा है। प्रबंधन ने उपकेंद्र कर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटाकर उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ा दी हैं। कुछ उपकेंद्रों पर जेई कर्मचारियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं। -देवेंद्र कुमार पांडेय, प्रदेश महामंत्री, संविदा/आउटसोर्स यूनियन
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