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Lucknow: अब चारबाग आउटर पर नहीं खड़ी रहेंगी ट्रेनें, 40 साल पुरानी सिग्नलिंग व्यवस्था को बदलेगा रेलवे
Wed, 16 Aug 2023 06:22 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 16 Aug 2023 06:22 PM IST
सार
लखनऊ स्टेशन पर पहुंचने वाली ट्रेनों को कई बार आउटर पर काफी देर खड़ा होना पड़ता है। रेलवे इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है।
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- फोटो : डेमो
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विस्तार
चारबाग रेलवे स्टेशन पर 40 साल पुराने सिग्नलिंग सिस्टम को नया रूप मिलेगा। पुराने जर्जर सिग्नलिंग तारों को चूहे कभी कभार क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इन तारों की लम्बाई ढाई सौ किमी के आसपास होगी, जिन्हें बदल दिया जाएगा। रूट रिले इंटरलॉकिंग की नई बिल्डिंग तैयार है, जहां पैनल वगैरह जल्द शिफ्ट किए जाएंगे।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के चारबाग रेलवे स्टेशन पर सिग्नलिंग सिस्टम 40 साल पुराना है। ऐसे में प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बने रिले रूम के पैनलों में आग तक लग चुकी है। इतना ही नहीं रूट रिले इंटरलॉकिंग(आरआरआई) के जो तार स्टेशन पर बिछे हुए हैं, उन्हें चूहे भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है।
ऐसे में रेलवे प्रशासन की ओर से आरआरआई को बदलने की योजना बनाई गई और पहले चरण में 35 करोड़ रुपये जारी किए गए। लॉकडाउन के दौरान आरआरआई का काम शुरू किया गया। जो काफी तेजी से हुआ। आरआरआई की नई बिल्डिंग स्टेशन पर बने पुराने मालगोदामों की ओर बनाई गई। जिसकी फिनिशिंग का काम बाकी है। पर, इसी बीच चारबाग स्टेशन पर सेकेंड एंट्री की ओर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया, जिससे आरआरआई का काम सुस्त हो गया। पर, रेलवे प्रशासन अब इस काम को गति देगा, जिससे सिग्नलिंग सिस्टम अत्याधुनिक हो जाएगा।
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आउटर पर नहीं रुकेंगी ट्रेनें
रेलवे अफसर बताते हैं कि आरआरआई का काम पूरा होने के बाद जिन ट्रेनों को सिग्नलिंग के इंतजार में दिलकुशा व आलमनगर आउटर पर रोकना पड़ता है, उससे निजात मिल जाएगी, जिससे पैसेंजरों का समय व रेलवे का ईंधन बचेगा। इतना ही नहीं बेहतर सिग्नलिंग होने पर चूहों द्वारा कुतरे जाने की आशंका घट जाएगी और ट्रेनों का संचालन भी बाधित नहीं होगा।
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उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के चारबाग रेलवे स्टेशन पर सिग्नलिंग सिस्टम 40 साल पुराना है। ऐसे में प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बने रिले रूम के पैनलों में आग तक लग चुकी है। इतना ही नहीं रूट रिले इंटरलॉकिंग(आरआरआई) के जो तार स्टेशन पर बिछे हुए हैं, उन्हें चूहे भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है।
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ऐसे में रेलवे प्रशासन की ओर से आरआरआई को बदलने की योजना बनाई गई और पहले चरण में 35 करोड़ रुपये जारी किए गए। लॉकडाउन के दौरान आरआरआई का काम शुरू किया गया। जो काफी तेजी से हुआ। आरआरआई की नई बिल्डिंग स्टेशन पर बने पुराने मालगोदामों की ओर बनाई गई। जिसकी फिनिशिंग का काम बाकी है। पर, इसी बीच चारबाग स्टेशन पर सेकेंड एंट्री की ओर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया, जिससे आरआरआई का काम सुस्त हो गया। पर, रेलवे प्रशासन अब इस काम को गति देगा, जिससे सिग्नलिंग सिस्टम अत्याधुनिक हो जाएगा।
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आउटर पर नहीं रुकेंगी ट्रेनें
रेलवे अफसर बताते हैं कि आरआरआई का काम पूरा होने के बाद जिन ट्रेनों को सिग्नलिंग के इंतजार में दिलकुशा व आलमनगर आउटर पर रोकना पड़ता है, उससे निजात मिल जाएगी, जिससे पैसेंजरों का समय व रेलवे का ईंधन बचेगा। इतना ही नहीं बेहतर सिग्नलिंग होने पर चूहों द्वारा कुतरे जाने की आशंका घट जाएगी और ट्रेनों का संचालन भी बाधित नहीं होगा।