यूपी के 'आजम' ने फिर की अपनी मनमानी!
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अल्पसंख्यकों के लिए प्रदेश में शुरू होने वाली एजुकेशन हब योजना के तहत निजी क्षेत्र को भी मॉडल इंटर कॉलेज खोलने का मौका दिया जाएगा। सरकार निजी संस्थानों को जिलों में एक मॉडल इंटर कॉलेज के लिए तीन करोड़ रुपये अनुदान देगी।
जिन जिलों में सरकार को राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज खोलने के लिए जमीन नहीं मिल रही है, वहां दोनों ही मॉडल कॉलेज निजी क्षेत्र खोल सकते हैं। सरकार ने इसकी शर्तें भी तय कर दी हैं। इससे उन निजी क्षेत्रों के लोगों को फायदा होगा जो पहले से शैक्षणिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
मॉडल कॉलेज खोलने के लिए निजी क्षेत्रों के ऐसे विद्यालय, महाविद्यालय व विश्वविद्यालयों को हरी झंडी दी जाएगी जिनके पास मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षा देने की सभी सुविधाएं हैं।
एजुकेशन हब के लिए कम से कम 5000 वर्गमीटर की भूमि होनी चाहिए। निजी क्षेत्रों को मॉडल इंटर कॉलेज तैयार करने के लिए सरकार 50-50 फीसदी की दो किस्तों में पैसा देगी।
निर्माण कार्य में निगरानी के लिए डीएम, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (डीएमओ) व डीएम की ओर से नामित लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की एक समिति बनेगी। इस समिति के तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट पर ही अगली किस्त जारी होगी। विद्यालय का संचालन माध्यमिक शिक्षा विभाग की निगरानी में चलेगा। डीएम व डीएमओ के पास यह अधिकार होगा कि वे कभी भी इन कॉलेजों का निरीक्षण कर सकेंगे।
सरकारी पैसे को यूं बहाएंगे
अल्पसंख्यकों की एजुकेशन हब योजना के तहत पहले चरण में 20 जिलों में 40 मॉडल इंटर कॉलेज खोले जाने हैं। इसमें सबसे ज्यादा विवाद इसी बात पर था कि सभी मॉडल इंटर कॉलेज सरकार खुद खोले। इनमें निजी क्षेत्र के लोगों को न जोड़ा जाए।
आशंका जताई जा रही थी कि निजी क्षेत्रों को जोड़ने से सरकारी योजना अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाएगी। साथ ही सरकारी पैसों का दुरुपयोग हो सकता है। लेकिन इन विरोधों और आशंकाओं को दरकिनार कर विभागीय मंत्री मो. आजम खां ने निजी क्षेत्र को योजना से जोड़ दिया।
ऐसी संस्थाएं खोल सकेंगी मॉडल कॉलेज जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से माध्यमिक या उच्च शिक्षा का कॉलेज चला रही हों, संस्था अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में कॉलेज खोलने की इच्छुक हो, तीन वर्ष पुरानी संस्था में खाली जमीन है तो वहां भी मॉडल कॉलेज खोला जा सकता है।
ऐसी संस्था जो तीन वर्ष से कम समय से विद्यालय चला रही हैं या नहीं भी चला रही हों, लेकिन उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं। मॉडल इंटर कॉलेजों को अल्पसंख्यक संस्था घोषित करना होगा ताकि इनमें न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रवेश अल्पसंख्यक वर्ग को मिल सके।