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अब केवल ‘श्रेष्ठतम’ अधिकारियों को ही मिलेगी पदोन्नति, 10 साल में 100 अंकों पर होगी ग्रेडिंग
Sat, 28 Sep 2019 12:33 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 28 Sep 2019 12:33 PM IST
सार
- 10 वर्ष की इंट्री में 100 नंबर से ग्रेडिंग, 80 पाने वाले ही पाएंगे पदोन्नति, कम वाले बाहर
- प्रदेश सरकार ने विभागीय पदोन्नति समितियों के अधिकार किए सीमित, तय किए बेंचमार्क
- बृहद दंड मिलने पर पांच वर्ष और लघु दंड मिलने पर दो वर्ष नहीं मिल सकेगी पदोन्नति
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विस्तार
प्रदेश सरकार ने पदोन्नतियों में श्रेष्ठतम अधिकारियों को ही पदोन्नति देने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व स्पष्ट बना दिया है। अब 10 वर्ष की पिछली सेवा में 100 में न्यूनतम 80 नंबर पाने वाले अधिकारी ही पदोन्नति के लिए उपयुक्त माने जाएंगे। 80 से कम नंबर पाने वाले अनुपयुक्त होंगे और पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा बृहद दंड पाने वाले कर्मी पांच वर्ष तक और लघु दंड पाने वाले दो वर्ष तक पदोन्नति से वंचित रहेंगे।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेरिट आधारित चयन के दायरे में आने वाले अधिकारियों (विभागाध्यक्ष/ निदेशक, अपर निदेशक) की पदोन्नति के समय उनके पिछले 10 वर्ष के सेवाकाल में प्राप्त प्रविष्टियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता रहा है।
अभी तक प्रविष्टियों के आधार पर पदोन्नति के लिए फॉर्मूला (बेंच मार्क) तय करने का अधिकार विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) के पास होता था। समय-समय पर डीपीसी ने 30 नंबर के पूर्णांक में कभी 18 नंबर तक पाने वाले को पदोन्नति देने का पैमाना तय किया तो कभी 25 व 21 नंबर तय किया।
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बृहद व लघु दंड पाए कर्मी की पदोन्नति के मामले में भी डीपीसी का मूड अहम होता था। समय-समय पर इन विसंगतियों का मामला न्यायालयों में गया और न्यायालय ने सरकार से बेंचमार्क स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
प्रदेश सरकार ने कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए सेवा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए पदोन्नति का सामान्य फॉर्मूला शासन स्तर से ही तय कर दिया है। विभागीय पदोन्नति समितियों को अब इसी आधार पर कर्मी की पदोन्नति पर विचार करना होगा।
डीपीसी में पक्षपात जैसे आरोप नहीं लगाए जा सकेंगे। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रतिकूल प्रविष्टियों की सूचना देते हुए प्राप्त प्रत्यावेदनों का निस्तारण करने के बाद ही डीपीसी की बैठक की जाएगी।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेरिट आधारित चयन के दायरे में आने वाले अधिकारियों (विभागाध्यक्ष/ निदेशक, अपर निदेशक) की पदोन्नति के समय उनके पिछले 10 वर्ष के सेवाकाल में प्राप्त प्रविष्टियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता रहा है।
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अभी तक प्रविष्टियों के आधार पर पदोन्नति के लिए फॉर्मूला (बेंच मार्क) तय करने का अधिकार विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) के पास होता था। समय-समय पर डीपीसी ने 30 नंबर के पूर्णांक में कभी 18 नंबर तक पाने वाले को पदोन्नति देने का पैमाना तय किया तो कभी 25 व 21 नंबर तय किया।
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बृहद व लघु दंड पाए कर्मी की पदोन्नति के मामले में भी डीपीसी का मूड अहम होता था। समय-समय पर इन विसंगतियों का मामला न्यायालयों में गया और न्यायालय ने सरकार से बेंचमार्क स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
प्रदेश सरकार ने कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए सेवा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए पदोन्नति का सामान्य फॉर्मूला शासन स्तर से ही तय कर दिया है। विभागीय पदोन्नति समितियों को अब इसी आधार पर कर्मी की पदोन्नति पर विचार करना होगा।
डीपीसी में पक्षपात जैसे आरोप नहीं लगाए जा सकेंगे। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रतिकूल प्रविष्टियों की सूचना देते हुए प्राप्त प्रत्यावेदनों का निस्तारण करने के बाद ही डीपीसी की बैठक की जाएगी।
दंड के साथ औसत व लचर प्रदर्शन वाले भी हो जाएंगे बाहर
व्यवस्था के अनुसार बृहद (पदावनत करना, स्थायी रूप से वेतन वृद्धि रोकना) व लघु दंड (परिनिंदा, वेतन वृद्धि किसी निश्चित अवधि के लिए रुकना) का सामने वाले अधिकारी क्रमश: पांच व दो वर्ष तक तो पदोन्नति से बाहर ही रहेंगे, सेवा में औसत व लचर प्रदर्शन कर 80 से कम अंक पाने वाले कर्मी भी बाहर हो जाएंगे। इससे सर्वश्रेष्ठ सेवा देने वाले अफसरों की पदोन्नति का रास्ता बन गया है।
पदोन्नत अधिकारियों में वरिष्ठता का मानक बना रहेगा
100 में 80 नंबर के मानक में कनिष्ठ अधिकारी 80 से अधिक या पूर्ण अंक प्राप्त कर वरिष्ठ के साथ पदोन्नति पा सकता है। लेकिन, पदोन्नति के लिए प्राप्त अंकों के आधार पर वरिष्ठता तय नहीं होगी। पदोन्नत हो रहे अफसरों की वरिष्ठता पूर्व की तरह ही बनी रहेगी। इसके अलावा इस व्यवस्था से दंड मिलने पर अधिकारी का तय समय तक पदोन्नति से बाहर होना तय हो गया है। पहले कई बार दंड मिले होने के बावजूद अधिक नंबर पाने की वजह से अधिकारी पदोन्नति पा जाते थे।
पद रिक्त तो बेंचमार्क घटा सकेगी डीपीसी
शासन ने डीपीसी को छूट दी है कि यदि 80 नंबर के बेंचमार्क के आधार पर रिक्तियों की संख्या के हिसाब से उपयुक्त श्रेणी में चिह्नित किए गए अधिकारी उपलब्ध नहीं हो पाते हैं तो चयन समिति 80 अंक के बेंचमार्क को घटा सकेगी।
पदोन्नत अधिकारियों में वरिष्ठता का मानक बना रहेगा
100 में 80 नंबर के मानक में कनिष्ठ अधिकारी 80 से अधिक या पूर्ण अंक प्राप्त कर वरिष्ठ के साथ पदोन्नति पा सकता है। लेकिन, पदोन्नति के लिए प्राप्त अंकों के आधार पर वरिष्ठता तय नहीं होगी। पदोन्नत हो रहे अफसरों की वरिष्ठता पूर्व की तरह ही बनी रहेगी। इसके अलावा इस व्यवस्था से दंड मिलने पर अधिकारी का तय समय तक पदोन्नति से बाहर होना तय हो गया है। पहले कई बार दंड मिले होने के बावजूद अधिक नंबर पाने की वजह से अधिकारी पदोन्नति पा जाते थे।
पद रिक्त तो बेंचमार्क घटा सकेगी डीपीसी
शासन ने डीपीसी को छूट दी है कि यदि 80 नंबर के बेंचमार्क के आधार पर रिक्तियों की संख्या के हिसाब से उपयुक्त श्रेणी में चिह्नित किए गए अधिकारी उपलब्ध नहीं हो पाते हैं तो चयन समिति 80 अंक के बेंचमार्क को घटा सकेगी।
इस तरह होगी 10 वर्ष की गणना
अंतिम 10 वर्षों का मतलब चयन वर्ष से ठीक 10 वर्ष पूर्व की अवधि होगी। मसलन, चयन वर्ष 2019-20 में यदि चयन 31 अक्तूबर 2019 के पूर्व संपन्न होगा, तो इसके लिए मुख्य रूप से 2008-09 से 2017-18 तक की प्रविष्टि व अन्य अभिलेखों को देखा जाएगा। यदि 31 अक्तूबर 2019 के बाद संपन्न होने वाले चयन के लिए डीपीसी की जानी है तो 2009-10 से 2018-19 तक की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियों व अभिलेखों को देखा जाएगा। 48 महीने से अधिक की प्रविष्टियां पूरी न होने पर संबंधित का चयन रोक लिया जाएगा।
निलंबन अवधि कोई अंक नहीं, किंतु अप्राप्त मानते हुए औसत मूल्यांकन
03 महीने से कम अवधि की प्रविष्टि के लिए कोई अंक नहीं। प्रविष्टि अप्राप्त मानी जाएगी।
चयन समिति प्रविष्टियों के अंक देते समय संपूर्ण प्रविष्टि देखकर ग्रेडिंग करेगी।
12 महीने से कम अवधि के लिए औसत वार्षिक अंक की गणना निम्न सूत्र से होगी :
कुल प्राप्तांक×12/ कुल मूल्यांकित माह
- 10 वर्ष की गोपनीय प्रविष्टियों के लिए इस तरह दिए जाएंगे अंक
- 12 महीने की उत्कृष्ट प्रविष्टि के लिए 10 अंक
- 12 महीने की अति उत्तम प्रविष्टि के लिए 08 अंक
- 12 महीने की उत्तम/ अच्छी प्रविष्टि के लिए 05 अंक
- 12 महीने की संतोषजनक प्रविष्टि के लिए 02 अंक
- 12 महीने की खराब/ असंतोषजनक प्रविष्टि के लिए 05 अंक घटाए जाएंगे
निलंबन अवधि कोई अंक नहीं, किंतु अप्राप्त मानते हुए औसत मूल्यांकन
03 महीने से कम अवधि की प्रविष्टि के लिए कोई अंक नहीं। प्रविष्टि अप्राप्त मानी जाएगी।
चयन समिति प्रविष्टियों के अंक देते समय संपूर्ण प्रविष्टि देखकर ग्रेडिंग करेगी।
12 महीने से कम अवधि के लिए औसत वार्षिक अंक की गणना निम्न सूत्र से होगी :
कुल प्राप्तांक×12/ कुल मूल्यांकित माह