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घोटाले के बाद जागी योगी सरकार, अब ईपीएफओ में जमा होगा बिजली कर्मियों का पैसा

Sun, 03 Nov 2019 12:19 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 03 Nov 2019 12:19 PM IST
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Now electricity worker money will be deposited in EPFO
सांकेतिक तस्वीर
पावर सेक्टर एम्पलॉइज ट्रस्ट में जमा बिजली कर्मियों के जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लि. (डीएचएफसीएल) में फंसने के  बाद पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अब पैसा ईपीएफओ में जमा कराने का फैसला किया है। 
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पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने दावा किया है कि कर्मचारियों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। डीएचएफसीएल में जमा धनराशि निकालने के लिए हर तरीके से प्रयास किया जा रहा है। अगर किसी तरह का जोखिम हुआ तो पॉवर कॉर्पोरेशन कर्मचारियों का पूरा पैसा वापस करेगा।
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प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने कहा कि पॉवर सेक्टर एम्पलॉइज ट्रस्ट में जमा धनराशि के निवेश में अनियमितता सामने आने के बाद अब कर्मचारियों के भविष्य निधि की धनराशि ईपीएफओ में जमा कराने का फैसला किया गया है। कर्मचारियों का पूरा पैसा वापस दिया जाएगा। किसी को नुकसान नहीं होगा। 
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उन्होंने कहा कि डीएचएफसीएल में निवेश के लिए जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ  विभागीय कार्रवाई के  साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है। निवेश में मानकों के विपरीत जाकर जो गलतियां की गई हैं, उसकी जांच एक कमेटी के जरिए की जा रही है।

उधर, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों के भविष्य निधि की धनराशि के निवेश का मामला गंभीर है। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार सुनिश्चित करेगी कि किसी का अहित न हो।

भड़के कर्मचारी, सीबीआई जांच की मांग
पावर सेक्टर एम्पलॉइज ट्रस्ट में जमा भविष्य निधि की 2631 करोड़ रुपये की धनराशि डीएचएफसीएल में निवेश किए जाने पर बिजली कर्मचारी भड़क गए हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ट्रस्ट में हुए अरबों रुपये के घोटाले की सीबीआई से जांच कराई जाए और घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन के आला अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। 

संघर्ष समिति ने सरकार से यह भी मांग की है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और उसमें पूर्व की तरह कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों ने साझा बयान में पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि ट्रस्ट में जमा धनराशि और उसके निवेश पर तत्काल एक श्वेतपत्र जारी किया जाए, जिससे यह पता चल सके कि कर्मचारियों की खून-पसीने की कमाई की धनराशि कहां-कहां निवेश की गई है। 

पदाधिकारियों ने कहा कि मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफ सीएल में 2631 करोड़ रुपये जमा किए गए। मार्च 2017 से आज तक ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई। इस लिहाज से यह बहुत सुनियोजित और गंभीर घोटाला है। पॉवर कॉर्पोरेशन के  अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में अभियंता संघ ने कर्मचारियों के सामान्य भविष निधि (जीपीएफ ) और अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ ) से संबंधित धनराशि को निवेश करने के निर्णय पर सवाल उठाया है। 

संघर्ष समिति का कहना है कि अभी भी 1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीएचएफ सीएल में फंसी हुई है। सरकार यह पैसा वापस लाए। पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मिलकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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