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आदेश के बाद भी शहर में सफाई न होने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मांगी रिपोर्ट

Thu, 16 May 2019 01:01 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 16 May 2019 01:01 AM IST
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no cleanliness in city after order makes high court angry, orders report
Lucknow High Court
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ की सफाई को लेकर दिए गए आदेशों पर अमल न होने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि साफ-सफाई को लेकर बड़ी रकम खर्च की जा रही है पर शहर के हर क्षेत्र में कूड़ा व गंदगी दिख रही है। 
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अदालत ने कहा कि शहर को आवारा जानवरों से मुक्त कराया जाए, पालीथिन के प्रयोग पर लगे प्रतिबंध को कड़ाई से लागू किया जाए, शहर में चल रही डेयरियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए और वर्षा से पहले नालों की सफाई कर निकाले जाने वाली गंदगी जो सड़क पर छोड़ दी जाती है, को हटाया जाए। कोर्ट ने सभी बिंदुओं पर संबंधित विभागों, अधिकारियों-कर्मचारियों व ठेकेदारों के शपथपत्र चार दिन में दाखिल करे जाने के आदेश दिए।
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न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी व न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 मई को नियत की है। अदालत ने बुधवार को दिए अपने आदेश में कहा कि कोर्ट के आदेशों के बाद भी नगर निगम द्वारा प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है। 
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डिफाल्टर ठेकेदारों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। सफाई के काम के नाम पर एजेंसियों या ठेकेदारों को एक मोटी रकम अदा की जा रही है। बावजूद इसके शहर के हर क्षेत्र में कूड़ा व गंदगी दिखाई दे रहा है।

अदालत को सौंपी सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों व ठेकेदारों की सूची

कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में बुधवार को नगर निगम, एलडीए व आवास विकास परिषद के अधिकारी अदालत में पेश हुए। इन विभागों द्वारा अपने-अपने विभागों में साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार सुरवाइजर, अधिकारी व कर्मचारी और विभिन्न एजेंसियों के ठेकेदारों की सूची दाखिल की। कोर्ट ने इसे रिकार्ड पर ले लिया।

प्रतिबंध के बाद भी हो रहा पालीथिन का इस्तेमाल
कोर्ट ने यह भी आदेश दिए कि इन तीनों सरकारी विभागों के जिम्मेदार अफसरों को भी यह शपथपत्र देना होगा कि सरकार के आदेशों के मुताबिक पालीथिन पर प्रतिबंध लग गया है। अगर कोई दुकानदार या अन्य इसका प्रयोग करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ जो कार्रवाई हुई उसकी व सरकार के आदेशों पर प्रभावी अमल के लिए हो रहे निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट देनी होगी। 

अदालत ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सरकार के आदेशों पर गंभीरता से अमल हो क्योंकि इस पालीथिन से न सिर्फ गंदगी में इजाफा हो रहा है बल्कि आवारा पशु भी इसे खाकर मर रहे हैं। 

कोर्ट ने कहा कि अदालत की जानकारी में आया है कि शहर में तय मानक से अधिक मोटाई से की प्रतिबंधित पालीथिन के इस्तेमाल हो रहा है। कोर्ट ने आदेश दिए कि पालीथिन पर लगे प्रतिबंध को लागू करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी इस संबंध में चार दिनों में शपथपत्र देना होगा।

नालों की सफाई को लेकर भी जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने नालों की सफाई के मुद्दे पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षा से पहले नाले-नालियों की सफाई का काम किया जाता है और उसमें से निकला सिल्ट तीन-चार दिन में हटाए जाने के बजाए वहीं सड़क पर छोड़ दिया जाता है जो बारिश होने पर भी नहीं हटाया जाता है और इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। 

कोर्ट ने कहा कि इस काम के लिए जो जिम्मेदार अधिकारी है वह भी यह शपथपत्र देगा कि उक्त कार्य सही तरीके से किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि इस सिल्ट से शहर में मच्छरों की संख्या में बढ़त हो रही है लिहाजा इस पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है। अदालत ने यह चेतावनी भी दी कि शपथपत्र में गलत तथ्य दिए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ के डीएम व एसएसपी को नोटिस

यह मुद्दा उठने पर कि पुलिस व प्रशासन का सहयोग न मिलने की वजह से इनमें से कई बिंदुओं पर प्रभावी अमल नहीं हो पा रहा है कोर्ट ने लखनऊ के डीएम व एसएसपी को नोटिस जारी करे जाने के  निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा है कि नोटिस में इन दोनों अधिकारियों से पूछा जाए कि सरकार के आदेश व संबंधित बिंदुओं पर अमल व निरीक्षण के लिए उन्हें भी क्यों न आदेश दिए जाएं।
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