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प्रदेश के किसानों से सीएम योगी ने की अपील, खेत में न जलाएं पराली
Mon, 14 Oct 2019 09:51 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 14 Oct 2019 09:51 PM IST
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सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने सोमवार को किसानों से पराली न जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदुषण बढ़ता है। साथ ही प्रदेश में नदियों के पानी की गुणवत्ता की स्थिति जानने के लिए 9 अलग-अलग स्थानों पर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसकी घोषणा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अन्तर्गत आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ के अवसर पर सीएम ने की।
उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट के लिए सार्वजनिक स्थलों पर पेड़ काटने की अनुमति देने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि इसके एवज में दूसरी जगह पर उससे ज्यादा पेड़ लगाए जा रहे हों। उनकी देखरेख की भी समुचित व्यवस्था की गई हो। सीएम ने कहा कि विकास एवं पर्यावरण के बीच बेहतर समन्वय में ही मानव जाति का कल्याण निहित है।
मुख्यमंत्री सोमवार को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के नेशनल नॉलेज नेटवर्क की सहायता से प्रभावी क्रियान्वयन विषयक दो दिवसीय कार्यशाला में अपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण वैश्विक समस्या है। प्रकृति के साथ जीव का समन्वय जितना अच्छा रहेगा, हमारा जीवन भी उतना ही अच्छा होगा।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बेहतर करने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संस्थाओं की यह पहल सराहनीय है।
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उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट के लिए सार्वजनिक स्थलों पर पेड़ काटने की अनुमति देने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि इसके एवज में दूसरी जगह पर उससे ज्यादा पेड़ लगाए जा रहे हों। उनकी देखरेख की भी समुचित व्यवस्था की गई हो। सीएम ने कहा कि विकास एवं पर्यावरण के बीच बेहतर समन्वय में ही मानव जाति का कल्याण निहित है।
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मुख्यमंत्री सोमवार को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के नेशनल नॉलेज नेटवर्क की सहायता से प्रभावी क्रियान्वयन विषयक दो दिवसीय कार्यशाला में अपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण वैश्विक समस्या है। प्रकृति के साथ जीव का समन्वय जितना अच्छा रहेगा, हमारा जीवन भी उतना ही अच्छा होगा।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बेहतर करने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संस्थाओं की यह पहल सराहनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास के 17 लक्ष्यों में जलवायु परिवर्तन भी एक है। वायु प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या के निदान के लिए सतत विकास की प्रक्रिया को अपनाना आवश्यक है। सॉलिड वेस्ट को भी उपयोगी बनाने की दिशा में कार्य किए जाने पर जोर दिया। अन्तर्विभागीय समन्वय पर बल देते हुए कहा कि प्रयागराज कुंभ-2019 में इसके अच्छे परिणाम मिले। सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने का उन्होंने एक बार फिर आह्वान किया।
स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छ पेयजल योजना और जन जागरूकता अभियान से इंसेफेलाइटिस रोग में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जाना जरूरी है।
सीएम ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि विकास के लिए ऐसी तकनीक विकसित करें, जो पर्यावरण हितैषी हो। वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। पर्यावरण को बेहतर करने के उद्देश्य से ही यूपी में वर्ष 2020 में 25 करोड़ पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्ययोजना के लिए केंद्र से मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूपी के भी 15 शहरों आगरा, प्रयागराज, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा, रायबरेली और वाराणसी को अति प्रदूषित शहरों में रखा है। इनमें वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसे केंद्र से मंजूरी भी मिल गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण पर जागरूकता के लिए लगाई गई प्रदर्शनी भी देखी।
स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छ पेयजल योजना और जन जागरूकता अभियान से इंसेफेलाइटिस रोग में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जाना जरूरी है।
सीएम ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि विकास के लिए ऐसी तकनीक विकसित करें, जो पर्यावरण हितैषी हो। वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। पर्यावरण को बेहतर करने के उद्देश्य से ही यूपी में वर्ष 2020 में 25 करोड़ पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्ययोजना के लिए केंद्र से मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूपी के भी 15 शहरों आगरा, प्रयागराज, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा, रायबरेली और वाराणसी को अति प्रदूषित शहरों में रखा है। इनमें वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसे केंद्र से मंजूरी भी मिल गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण पर जागरूकता के लिए लगाई गई प्रदर्शनी भी देखी।
सस्ती तकनीक ईजाद करने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों का आह्वान किया कि वे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की सस्ती तकनीक ईजाद करें। अभी इस काम में कभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तो कभी कोई और विभाग बाधक बनता है। एसटीपी की मौजूदा तकनीक में इतनी ज्यादा बिजली खर्च होती है कि उद्यमी रात में इन्हें बंद कर देते हैं।
उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे आम लोगों के साथ बैठक पर्यावरण संबंधी चिंताओं को साझा करें। सीएम ने कहा कि विकास को बाधित नहीं किया जा सकता, पर पर्यावरण को भी नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
गोमती समेत कई नदियों के लिए स्थापित होंगे केंद्र
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ‘स्वच्छ वायु मोबाइल एप’ का लोकार्पण किया। इसके अलावा मेरठ शहर के अंतर्गत 3 स्वचालित सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्रों का शुभारंभ किया। साथ ही 9 क्षेत्रीय पर्यावरण अनुश्रवण कंट्रोल रूम यानी रिवर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की।
ये केंद्र नदियों के जल की गुणवत्ता पर निगरानी रखने का काम करेंगे। ये केंद्र गंगा एवं वरुणा नदी के लिए वाराणसी, यमुना के लिए आगरा, हिंडन के लिए गाजियाबाद, बेतवा के लिए झांसी, घाघरा, राप्ती व आमी के लिए गोरखपुर, रामगंगा के लिए मुरादाबाद, काली के लिए मेरठ, गोमती एवं सई के लिए लखनऊ और तमसा व सरयू के लिए अयोध्या में स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे आम लोगों के साथ बैठक पर्यावरण संबंधी चिंताओं को साझा करें। सीएम ने कहा कि विकास को बाधित नहीं किया जा सकता, पर पर्यावरण को भी नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
गोमती समेत कई नदियों के लिए स्थापित होंगे केंद्र
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ‘स्वच्छ वायु मोबाइल एप’ का लोकार्पण किया। इसके अलावा मेरठ शहर के अंतर्गत 3 स्वचालित सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्रों का शुभारंभ किया। साथ ही 9 क्षेत्रीय पर्यावरण अनुश्रवण कंट्रोल रूम यानी रिवर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की।
ये केंद्र नदियों के जल की गुणवत्ता पर निगरानी रखने का काम करेंगे। ये केंद्र गंगा एवं वरुणा नदी के लिए वाराणसी, यमुना के लिए आगरा, हिंडन के लिए गाजियाबाद, बेतवा के लिए झांसी, घाघरा, राप्ती व आमी के लिए गोरखपुर, रामगंगा के लिए मुरादाबाद, काली के लिए मेरठ, गोमती एवं सई के लिए लखनऊ और तमसा व सरयू के लिए अयोध्या में स्थापित किए जाएंगे।
वायु प्रदूषण कम करने के लिए गठित की कमेटी : दारा सिंह
प्रदेश के पर्यावरण एवं वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि प्रदूषित पर्यावरण आज एक विकट समस्या बन चुका है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत चिह्नित प्रदेश के 15 प्रदूषित शहरों की वायु गुणवत्ता के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी गठित की गई है।
उन्होंने कहा कि सीएम के निर्देशन में बनी कार्ययोजना पर कार्य करके वर्ष 2024 तक हम 30 फीसदी तक वायु प्रदूषण कम कर लेंगे। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन जेपीएस राठौर ने कहा कि हम सब मिलकर प्रदूषण कम करने में अवश्य सफल होंगे।
पर्यावरण राज्यमंत्री अनिल शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन एसपीएस परिहार, केंद्रीय संयुक्त सचिव निधि खरे, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करांदिकर, यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव आशीष तिवारी और वन विभागाध्यक्ष पवन कुमार भी शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि सीएम के निर्देशन में बनी कार्ययोजना पर कार्य करके वर्ष 2024 तक हम 30 फीसदी तक वायु प्रदूषण कम कर लेंगे। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन जेपीएस राठौर ने कहा कि हम सब मिलकर प्रदूषण कम करने में अवश्य सफल होंगे।
पर्यावरण राज्यमंत्री अनिल शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन एसपीएस परिहार, केंद्रीय संयुक्त सचिव निधि खरे, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करांदिकर, यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव आशीष तिवारी और वन विभागाध्यक्ष पवन कुमार भी शामिल रहे।