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अंधाधुंध परियोजनाएं स्वीकृत करके मुश्किल में फंसी एनएचएआई
Sat, 07 Sep 2019 06:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजीत बिसारिया, लखनऊ
अजीत बिसारिया, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 07 Sep 2019 06:28 AM IST
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अंधाधुंध परियोजनाएं स्वीकृत करके मुश्किल में फंस गई है। ये परियोजनाएं लेटलतीफी का शिकार और घाटे का सौदा होने के कारण तमाम निजी निवेशक भाग खड़े हुए हैं।
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पीएमओ ने एनएचएआई को काम रोकने के साथ ही बड़े पैमाने पर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इससे उत्तर प्रदेश में भी लखनऊ-दिल्ली को वाया सीतापुर जोड़ने वाले हाईवे समेत कई सड़कों का निर्माण लटक गया है।
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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय से कहा है कि अनियोजित ढंग से काम करने के कारण एनएचएआई की समस्याएं बेइलाज हो गई हैं।
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अंधाधुंध ढंग से सड़कों को एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) घोषित किए जाने से इनकी कुल लंबाई 1.9 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा हो गई है। तमाम बार एनएचएआई को जमीन की कीमत भी देनी पड़ती है। निर्माण लागत में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
वित्तीय लिहाज से सड़कों का ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) घाटे का सौदा बन चुका है। निजी निवेशक और कंपनियां ग्रीन फील्ड सड़क परियोजनाओं को छोड़कर भाग रही हैं। ईपीसी मोड में काम कराने के लिए सरकार जो निवेश कर रही है, उसमें भी तमाम खामियां हैं और ये स्थाई साबित नहीं हो रहा है।
पीएमओ ने इसके लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत एनएचएआई को रोड असेट मैनेजमेंट कंपनी के रूप में बदला जाएगा। वर्ष 2030 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे ग्रिड ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। इसमें उन सड़कों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें ट्रैफिक गणना के लिहाज से हाईवे ग्रिड में शामिल किया जाने की जरूरत है।
स्वीकृत प्रत्येक परियोजना की वित्तीय लिहाज से उपयोगिता की भी समीक्षा की जाएगी। अगर वित्तीय लिहाज से उपयुक्त नहीं पाई गई कोई सड़क परियोजना स्वीकृत की जाती है तो यह पहले तय करना होगा कि इस संभावित घाटे की भरपाई कैसे होगी। अगर सरकार इस भरपाई के लिए तैयार होती है तो फंड की अग्रिम व्यवस्था करनी होगी।
अगर कोई परियोजना वित्तीय लिहाज से उपयुक्त पाई जाती है तो इसके लिए बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मोड में बिड निकाली जाएगी। एनएचआई को सड़क परियोजनाएं तत्काल रोकने के लिए भी कहा गया है। वर्तमान में एनएचएआई की पूरी हो चुकी और निर्माणाधीन परियोजनाओं को इन तय सिद्धांतों के आधार पर ही चलाया जाएगा।
तत्काल फंड जुटाने के लिए टीओटी (टोल, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मोड में इन परियोजनाओं को दिया जाएगा। इसके तहत निवेशक जो राशि निवेश करेंगे, उसे एक निश्चित अवधि में टोल के माध्यम से वसूलने के बाद सड़क एनएचएआई को ट्रांसफर कर देंगे।