{"_id":"62d5160275e2ad25ad24bb7f","slug":"next-hearing-on-ayodhya-structure-demolition-on-1-august","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya issue: अयोध्या ढांचा विध्वंस मामला, हाईकोर्ट ने निगरानी याचिका को अपील में बदलने का दिया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya issue: अयोध्या ढांचा विध्वंस मामला, हाईकोर्ट ने निगरानी याचिका को अपील में बदलने का दिया आदेश
Mon, 18 Jul 2022 07:16 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 18 Jul 2022 07:16 PM IST
सार
अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में कोर्ट ने दाखिल की गई निगरानी याचिका को अपील में बदलने का आदेश दिया है। याचिका में सत्र अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका को अपराधिक अपील के रूप में बदलने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश निगरानी याचिका दायर करने वालों के वकीलों के आग्रह पर दिया।
विज्ञापन
याचिका में मामले में अभियुक्तों को बरी किए जाने के सत्र अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। साथ ही इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी. मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत सभी 32 लोगों को दोषी करार दिए जाने की भी गुजारिश भी की गई। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद व सैयद अखलाक अहमद की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। सोमवार को याचियों के अधिवक्ता ने याचिका को अपराधिक अपील के रुप में बदलने की गुजारिश कोर्ट से की। जिसे मंजूर कर कोर्ट ने याचिका को अपील के रुप में परिवर्तित करने का आदेश रजिस्ट्री (अदालत का दफ्तर) को दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को नियत की है।
विज्ञापन
विदित हो कि लखनऊ की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने 30 सितंबर 2020 को फैसला सुनाते हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, लोक सभा सदस्यों साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया कि दोनों याची इस मामले में न सिर्फ गवाह थे बल्कि घटना के पीड़ित भी हैं। उन्होंने विशेष अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल कर खुद को सुने जाने की मांग भी की थी लेकिन विशेष अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। याचियों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार के दबाव में सीबीआई ने सत्र अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील नहीं दाखिल की जबकि कई मुस्लिम संगठनों ने सीबीआई से अपील दाखिल करने के लिए अनुरोध किया था।