बदायूं कांड: CBI का खुलासा, बहनों ने किया था सुसाइड!
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यूपी में जिस एक वारदात ने सियासत से लेकर पुलिसिया कार्रवाई के तौर-तरीकों को हिला कर रख दिया, उसमें सीबीआई जांच अंतिम मोड़ पर आ गई है।
सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि तथाकथित बदायूं गैंगरेप केस में सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है और शुक्रवार को ही इसका खुलासा भी कर दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट को सीबीआई निदेशक ने भी स्वीकृति दे दी है।
खबरिया चैनलों के हवाले से आ रही खबर पर यकीन किया जाए तो बदायूं की बहनों की न हत्या हुई थी और न ही उनके साथ बलात्कार किया गया था। सीबीआई रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों बहनों ने आत्महत्या की थी। हालांकि, आत्महत्या की वजह का पता नहीं चल सका है।
गौरतलब है कि इस अकेले मामले ने सूबे की अखिलेश सरकार को भी चुनाव में काफी नुकसान पहुंचाया था। मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की तो एक के बाद एक आरोप गलत साबित होने लगे। नार्को टेस्ट से लेकर पॉलीग्राफ टेस्ट तक किया गया और दोनों बहनों की लाश खोदकर फिर से पोस्टमार्टम करने की बात भी कही गई, हालांकि वो गंगा नदी के बढ़े जलस्तर की वजह से मुमकिन नहीं हो सका।
पुलिस रिकॉर्ड में थी कमी
बदायूं रेप मामले में पीड़िताओं के शव हासिल करने में नाकाम रही सीबीआई ने उनके कपड़ों और शरीर के अंगों से लिए गए नमूनों के डीएनए सैंपल की जांच कराई थी। पीड़ित के शव की जांच न कर पाने की स्थिति में मेडिकल बोर्ड कपड़ों और शरीर के अंगों आदि से लिए गए सैंपल से आगे की जांच करता है।
सीबीआई को यकीन था कि जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद मामले में काफी चीजें साफ हो जाएंगी और दोषी तक पहुंचना आसान हो जाएगा। जांच से जुड़े रहे सीबीआई के एक अधिकारी ने यह भी बताया था कि घटना वाली रात इलाके में कई ऐसी बातें हुईं जिन्हें पुलिस ने रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किया। मामले के पांच आरोपियों को लड़कियों के पिता और दो गवाहों के कहने पर गिरफ्तार किया गया।
जांच में यह बात भी सामने आई थी कि सभी आरोपियों का संबंध एक ही जाति से था। जांच में कई बातें गलत पाई गईं। सूत्रों के मुताबिक उस रात जो कुछ भी हुआ उसके तथ्यों को बदल कर राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई।
लाई डिटेक्टर टेस्ट से उलझा था मामला
सीबीआई ने चचेरी बहनों के साथ रेप और हत्या के मामले की जांच में लड़कियों के पिता, उनके एक रिश्तेदार और एक गवाह का नारको टेस्ट किया था।
इससे पहले इनका लाई डिटेक्टर टेस्ट और पॉलीग्राफी टेस्ट भी करवाया गया था, लेकिन सीबीआई को मामले की जटिलता साफ करने में कोई खास मदद नहीं मिली।
जांच से जुड़े अधिकारी ने अमर उजाला को बताया था, "लाई डिटेक्टर टेस्ट ने मामले को और उलझा दिया है। इसके तह तक पहुंचने के लिए नारको टेस्ट ही विकल्प बचता है।"
सीबीआई ने तीन आरोपी भाई पप्पू यादव, अवधेश यादव और उर्वेश यादव का भी पॉलीग्राफ टेस्ट कराया था। इसके अलावा दो पुलिस कांस्टेबल सर्वेश यादव और छत्रपाल सिंह को भी झूठ पकड़ने वाली मशीन से गुजरना पड़ा था, लेकिन सारी कोशिशें मामले को सुलझाने के बजाए और उलझाती रहीं।
अब देखना यह है कि शुक्रवार को सीबीआई किस थ्योरी और कहानी के साथ सामने आती है।