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Lucknow News: नया पैंतरा... महिलाओं के जरिये हाइड्रोपोनिक वीड की तस्करी
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आरोपी महिला।
लखनऊ। लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें विदेशी महिलाओं के जरिये महंगी और प्रतिबंधित नशे की खेप लाने का पैंतरा अपनाया जा रहा है। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी एयरपोर्ट) पर एक महीने के भीतर हाइड्रोपोनिक वीड की दूसरी बड़ी खेप पकड़ी गई है। शनिवार सुबह दुबई से आई फ्लाइट (एफजेड-443) से उतरी युगांडा की महिला यात्री अनीताह नाबाफू वामुकूता को कस्टम ने गिरफ्तार किया। महिला के पास से लगभग 25 करोड़ रुपये मूल्य की हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई।
इससे पहले, लगभग एक माह पूर्व थाईलैंड से आई एक अन्य विदेशी महिला के पास से भी इसी प्रकार की और लगभग समान मूल्य की हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई थी। इन दोनों मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार दो विदेशी महिलाओं के जरिए तस्करी की पुष्टि के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या लखनऊ अब इस तरह की ड्रग्स की खपत और सप्लाई का नया केंद्र बनता जा रहा है?
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ड्रग तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए महिला यात्रियों को माध्यम बनाना शुरू कर दिया है। सोने की तस्करी में पिछले पांच वर्षों में पकड़े गए शातिरों में 90 प्रतिशत से अधिक पुरुष ही रहे हैं। माना जा रहा है कि महिला यात्रियों पर कम संदेह होने के कारण उन्हें तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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एनसीआर तक पहुंचाई जा रही ड्रग्स
सूत्रों के अनुसार, यह ड्रग्स केवल लखनऊ में ही नहीं, बल्कि पूर्वी-पशि्चम यूपी और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी खपाई जा रही है। बताया जा रहा है कि ड्रग्स को हवाई मार्ग से लखनऊ लाकर, फिर ट्रेन के जरिये दिल्ली और आसपास के इलाकों में भेजा जाता है। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को इसके लिए माध्यम बनाया जा रहा है।
लोकल नेटवर्क से जुड़ रहीं कड़ियां
कस्टम और अन्य एजेंसियां युगांडा की महिला से गहन पूछताछ कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि विदेशी महिलाओं का काम सिर्फ खेप पहुंचाने तक सीमित होता है। एयरपोर्ट से आगे की सप्लाई का जिम्मा स्थानीय नेटवर्क संभालता है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, ताकि पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।
अफसरों की चुप्पी, पर सवाल कई
दोनों मामलों में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन लगातार पकड़ी जा रही बड़ी-बड़ी खेपों से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करों ने लखनऊ को एक सुरक्षित रूट मानकर यहां अपने नेटवर्क को सक्रिय कर लिया है।
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इससे पहले, लगभग एक माह पूर्व थाईलैंड से आई एक अन्य विदेशी महिला के पास से भी इसी प्रकार की और लगभग समान मूल्य की हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई थी। इन दोनों मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार दो विदेशी महिलाओं के जरिए तस्करी की पुष्टि के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या लखनऊ अब इस तरह की ड्रग्स की खपत और सप्लाई का नया केंद्र बनता जा रहा है?
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जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ड्रग तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए महिला यात्रियों को माध्यम बनाना शुरू कर दिया है। सोने की तस्करी में पिछले पांच वर्षों में पकड़े गए शातिरों में 90 प्रतिशत से अधिक पुरुष ही रहे हैं। माना जा रहा है कि महिला यात्रियों पर कम संदेह होने के कारण उन्हें तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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एनसीआर तक पहुंचाई जा रही ड्रग्स
सूत्रों के अनुसार, यह ड्रग्स केवल लखनऊ में ही नहीं, बल्कि पूर्वी-पशि्चम यूपी और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी खपाई जा रही है। बताया जा रहा है कि ड्रग्स को हवाई मार्ग से लखनऊ लाकर, फिर ट्रेन के जरिये दिल्ली और आसपास के इलाकों में भेजा जाता है। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को इसके लिए माध्यम बनाया जा रहा है।
लोकल नेटवर्क से जुड़ रहीं कड़ियां
कस्टम और अन्य एजेंसियां युगांडा की महिला से गहन पूछताछ कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि विदेशी महिलाओं का काम सिर्फ खेप पहुंचाने तक सीमित होता है। एयरपोर्ट से आगे की सप्लाई का जिम्मा स्थानीय नेटवर्क संभालता है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, ताकि पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।
अफसरों की चुप्पी, पर सवाल कई
दोनों मामलों में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन लगातार पकड़ी जा रही बड़ी-बड़ी खेपों से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करों ने लखनऊ को एक सुरक्षित रूट मानकर यहां अपने नेटवर्क को सक्रिय कर लिया है।