फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   new policy for wine shops in uttar pradesh.

यूपी: शराब की दुकान खोलने के लिए 'गुड कैरेक्टर' जरूरी, परिवार का भी चरित्र देखेगी सरकार

Sun, 28 Jan 2018 11:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 28 Jan 2018 11:00 AM IST
विज्ञापन
new policy for wine shops in uttar pradesh.

यूपी में अब चरित्रवान व्यक्ति ही शराब की दुकानें चला सकेंगे। आबकारी विभाग ने कैबिनेट से मंजूरी के बाद नई आबकारी नीति का शासनादेश जारी कर दिया है। इसके तहत आपराधिक छवि के लोगों को शराब बेचने का लाइसेंस नहीं मिल सकेगा। लाइसेंस लेने वाले को हैसियत और चरित्र प्रमाण पत्र देना जरूरी होगा। दुकानें ई-लॉटरी से आवंटित होंगी। आधार और पैन नंबर भी अनिवार्य होगा। नई नीति से छोटे कारोबारी भी इस धंधे में अपने हाथ आजमा सकेंगे। अच्छा कारोबार करने वाले व्यवसायियों को एक साल के नवीनीकरण का लाभ मिलेगा।

विज्ञापन


प्रमुख सचिव आबकारी कल्पना अवस्थी की ओर से जारी शासनादेश में बताया गया है कि नई नीति के तहत देसी शराब की दुकान के आवेदन के लिए प्रोसेसिंग फीस 11 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है। इसके साथ जीएसटी भी देना होगा। नई नीति में शराब की उठान का कोटा 8 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। बताया गया है कि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में हाईवे से काफी दुकानें हटाई गई थीं। इनमें से अधिकतर पुनर्स्थापित नहीं हो पाईं, जिससे पिछले साल के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो पाई।
विज्ञापन


देसी शराब के बेसिक लाइसेंस की फीस 225 रुपये प्रति पेटी से बढ़ाकर 252 रुपये प्रति पेटी कर दी गई है। वहीं, प्रतिफल फीस 226 रुपये प्रति बल्क लीटर से घटाकर 222 रुपये प्रति बल्क लीटर कर दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रमुख सचिव आबकारी कल्पना अवस्थी के मुताबिक 2009-10 में आबकारी राजस्व में वृद्धि के मकसद से आबकारी नीति तैयार करने की बात कही गई थी, लेकिन बीते सात वर्षों में औसत वृद्धि 13.97 प्रतिशत रही जबकि सबसे अधिक 25.84 प्रतिशत की वृद्धि 2011-12 में हुई। सबसे कम 3.08 प्रतिशत की वृद्धि 2016-17 में थी। ऐसे में यह अप्रासंगिक हो चुकी थी जिसके कारण नीति का बदला जाना जरूरी था।

दुकानों पर रहेगी मुख्यालय की नजर

new policy for wine shops in uttar pradesh.

जिस कैंपस की परमिशन दी गई है, वहां निकासी गेट पर और गोदाम के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगाना जरूरी होगा। कैमरे ऐसे होने चाहिए जिसे आईपी एड्रेस के माध्यम से मुख्यालय से देखा जा सके। साथ ही शराब की दुकान पर कंप्यूटर और इंटरनेट भी जरूरी होगा।

आबकारी आयुक्त का कोटा घटा
नई नीति में 2018-19 में शराब की व्यवस्थापित कुल दुकानों की संख्या का 10 प्रतिशत दुकानों का सृजन आबकारी आयुक्त कर सकेंगे। पहले उनका कोटा 15 प्रतिशत का था। इसी तरह विदेशी शराब की दुकानों में भी कमिश्नर 10 प्रतिशत ही दुकानों का सृजन करा सकेंगे। वाइन की फुटकर दुकानों के लिए यह कोटा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया है। निर्धारित कोटे से 6 प्रतिशत या उससे अधिक शराब बेचने पर अगले साल का नवीनीकरण आसानी से हो जाएगा।

दुकानदार ही नहीं, उसके परिवार का भी देखा जाएगा कैरेक्टर
शराब की दुकान का लाइसेंस लेने वाले के चरित्र प्रमाण के साथ ही परिवार के लोगों का भी चरित्र देखा जाएगा। परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं होना चाहिए। दुकानदार आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े और संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्ति को नौकरी भी नहीं दे सकेगा।

देसी शराब की थोक आपूर्ति के लिए प्रोसेसिंग फीस 50 हजार

new policy for wine shops in uttar pradesh.

देसी शराब की थोक आपूर्ति के लिए 50 हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। इस पर जीएसटी अलग से चार्ज होगा। वहीं बीयर, वाइन और विदेशी शराब की फुटकर दुकानों के लाइसेंस के लिए 15 प्रतिशत अधिक देना होगा। मॉडल शॉप के  लिए भी लाइसेंस फीस में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। मॉडल शॉप के लिए प्रोसेसिंग फीस 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है।

ब्रांड के रजिस्ट्रेशन की फीस 10 हजार बढ़ी
सरकार ने देसी शराब के ब्रांड की रजिस्ट्रेशन फीस 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दी है। साथ ही लेबुल के अनुमोदन की फीस भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दी गई है। विदेशी शराब के लेबुल के अनुमोदन की फीस 50 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है।

विदेशी शराब के लिए तीन सेक्टर में बांटे गए जिले
फॉरेन लिकर (एफएल 2) के लाइसेंस की प्रोसेसिंग फीस के लिए जिलों को उनकी बिक्री के हिसाब से तीन भागों में बांट कर फीस तय की गई है। वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, अलीगढ़ और मथुरा में लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये और जमानत राशि ढाई लाख रुपये होगी। गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, हाथरस और फिरोजाबाद में लाइसेंस की फीस 20 लाख रुपये और जमानत राशि 2 लाख रुपये होगी। बाकी जिलों में 15 लाख रुपये लाइसेंस फीस और डेढ़ लाख रुपये जमानत केलिए जमा करने होंगे।

बार लाइसेंस की फीस में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी

new policy for wine shops in uttar pradesh.

बार लाइसेंस के लिए भी 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसके लिए तीन लाख 25 हजार से लेकर 19 लाख 30 हजार रुपये तक की फीस तय की गई है। इसमें होटल, रेस्टोरेंट बार, क्लब परमिट शामिल है। इसी तरह ओकेजनल बार लाइसेंस की फीस नॉन कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए 4 हजार रुपये प्रतिदिन और कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए 10 हजार रुपये प्रतिदिन तय की गई है।

नई नीति में यह भी खास
- देसी शराब अब सिर्फ एक ही पैक (200 एमएल) में मिलेगी
- विदेशी शराब के लाइसेंस की आवेदन फीस 11 हजार से बढ़ाकर 15 हजार
- आयातित शराब की परमिट फीस में 50 रुपये की बढ़ोतरी

- भारत निर्मित वाइन पर प्रतिफल फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं
- अन्य देशों से आयातित वाइन पर प्रति ब्रांड रजिस्ट्रेशन की फीस 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed