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अस्पतालों में दवा आपूर्ति के लिए बनेगी पासबुक
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अब जितनी जरूरत उतनी ही मिलेंगी अस्पतालों को दवाएं, एक्सपायर होने से बचाने को सेंट्रल ड्रग कार्पोरेशन ने बनाई नई रणनीति
सरकारी अस्पतालों में दवाएं एक्सपायर होने से बचाने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सेंट्रल ड्रग कार्पोरेशन ने नई रणनीति बनाई है।
इसके तहत अब हर अस्पताल को उसकी जरूरत के हिसाब से ही दवाएं दी जाएंगी। इनका बजट भी तय कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था सभी जिला स्तरीय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लागू की जाएगी।
अब सरकारी अस्पतालों को सेंट्रल ड्रग कार्पोरेशन के जरिये दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई बार ऐसी शिकायत मिलती रही है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दवा नहीं है और दूसरी दवाएं रखे-रखे बेकार हो गईं। कई अस्पतालों में भारी मात्रा में एक ही दवा पहुंच जाती है तो कुछ अस्पतालों को दवाएं लौटानी पड़ती हैं।
नई रणनीति के तहत संबंधित अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर जरूरी दवाएं ही लेगा। इससे मरीजों को समय से दवाएं मिल सकेंगी और ये एक्सपायर नहीं हो पाएंगी। साथ ही एक डाटा बैंक तैयार होगा, जिससे यह पता चलेगा कि किस इलाके में कौन-कौन सी प्रमुख दवाएं ज्यादा खपत होती हैं।
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हर अस्पताल की होगी पासबुक
हर अस्पताल का बजट तय कर दिया जाएगा और उसे एक पासबुक जारी कर दी जाएगी। जिस अस्पताल को जितनी दवाओं की जरूरत होगी, वे कार्पोरेशन के स्टोर से दवा लेने के बाद उसकी एंट्री करवा लेंगे। इससे निर्धारित बजट और जरूरत के हिसाब से संबंधित अस्पताल सीधे दवाओं के लिए मांगपत्र भेज सकेंगे।
दवाओं के लिए तैयार होगा बजट
सभी सरकारी अस्पतालों की तीन साल में दवा आपूर्ति के डाटा का अध्ययन किया जा रहा है। इसके आधार पर देखा जा रहा है कि किस इलाके में कौन सी दवा की मांग अधिक रही और कौन सी दवा वापस करनी पड़ी। इतना ही नहीं स्टोर में रखने से एक्सपायर होने वाली दवाओं के डाटा का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर संबंधित अस्पताल का बजट तैयार किया जाएगा। फिर उसमें ही संबंधित अस्पताल दवा का उठान कर सकेंगे।
खपत के मुताबिक बढ़ेगा बजट
खास बात यह है कि कार्पोरेशन की इस नई रणनीति में दवा खत्म होने पर बजट बढ़ाने का प्रावधान भी रखा जाएगा। इसके लिए संबंधित अस्पताल की मांगपत्र को कमेटी में रखा जाएगा। वह संबंधित अस्पताल में हुई दवाओं की खपत के अनुसार बजट बढ़ा सकेगी।
दो माह में शुरू होगी नई व्यवस्था
प्रभारी, क्वालिटी कंट्रोल, ड्रग कार्पोरेशन, डॉ. अनिल त्रिपाठी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। अस्पतालों के डाटा का अध्ययन करीब-करीब पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि दो माह के अंदर इस व्यवस्था को कुछ अस्पतालों में लागू कर दिया जाएगा। इसके दूरगामी फायदे होंगे।
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सरकारी अस्पतालों में दवाएं एक्सपायर होने से बचाने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सेंट्रल ड्रग कार्पोरेशन ने नई रणनीति बनाई है।
इसके तहत अब हर अस्पताल को उसकी जरूरत के हिसाब से ही दवाएं दी जाएंगी। इनका बजट भी तय कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था सभी जिला स्तरीय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लागू की जाएगी।
अब सरकारी अस्पतालों को सेंट्रल ड्रग कार्पोरेशन के जरिये दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई बार ऐसी शिकायत मिलती रही है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दवा नहीं है और दूसरी दवाएं रखे-रखे बेकार हो गईं। कई अस्पतालों में भारी मात्रा में एक ही दवा पहुंच जाती है तो कुछ अस्पतालों को दवाएं लौटानी पड़ती हैं।
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नई रणनीति के तहत संबंधित अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर जरूरी दवाएं ही लेगा। इससे मरीजों को समय से दवाएं मिल सकेंगी और ये एक्सपायर नहीं हो पाएंगी। साथ ही एक डाटा बैंक तैयार होगा, जिससे यह पता चलेगा कि किस इलाके में कौन-कौन सी प्रमुख दवाएं ज्यादा खपत होती हैं।
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हर अस्पताल की होगी पासबुक
हर अस्पताल का बजट तय कर दिया जाएगा और उसे एक पासबुक जारी कर दी जाएगी। जिस अस्पताल को जितनी दवाओं की जरूरत होगी, वे कार्पोरेशन के स्टोर से दवा लेने के बाद उसकी एंट्री करवा लेंगे। इससे निर्धारित बजट और जरूरत के हिसाब से संबंधित अस्पताल सीधे दवाओं के लिए मांगपत्र भेज सकेंगे।
दवाओं के लिए तैयार होगा बजट
सभी सरकारी अस्पतालों की तीन साल में दवा आपूर्ति के डाटा का अध्ययन किया जा रहा है। इसके आधार पर देखा जा रहा है कि किस इलाके में कौन सी दवा की मांग अधिक रही और कौन सी दवा वापस करनी पड़ी। इतना ही नहीं स्टोर में रखने से एक्सपायर होने वाली दवाओं के डाटा का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर संबंधित अस्पताल का बजट तैयार किया जाएगा। फिर उसमें ही संबंधित अस्पताल दवा का उठान कर सकेंगे।
खपत के मुताबिक बढ़ेगा बजट
खास बात यह है कि कार्पोरेशन की इस नई रणनीति में दवा खत्म होने पर बजट बढ़ाने का प्रावधान भी रखा जाएगा। इसके लिए संबंधित अस्पताल की मांगपत्र को कमेटी में रखा जाएगा। वह संबंधित अस्पताल में हुई दवाओं की खपत के अनुसार बजट बढ़ा सकेगी।
दो माह में शुरू होगी नई व्यवस्था
प्रभारी, क्वालिटी कंट्रोल, ड्रग कार्पोरेशन, डॉ. अनिल त्रिपाठी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। अस्पतालों के डाटा का अध्ययन करीब-करीब पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि दो माह के अंदर इस व्यवस्था को कुछ अस्पतालों में लागू कर दिया जाएगा। इसके दूरगामी फायदे होंगे।