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'हमें, CM साहब से कोई नाराजगी नहीं'
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 23 Mar 2014 10:08 AM IST
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प्रदेश के नए कैबिनेट व राज्यमंत्रियों को काम जरूर देर से मिला है लेकिन इसका उन्हें कोई गिला नहीं है।
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कृषि, माध्यमिक शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, ऊर्जा, वन व खनन जैसे अहम विभाग खाते में आने से वे खासा उत्साहित हैं।
मंत्री कैबिनेट हैं अथवा राज्य, उनके मन में अपने विभाग को आगे ले जाने के लिए बड़े-बड़े सपने हैं जिसे हकीकत में बदलने की जुगल में लगने को तैयार हैं।
नए कृषि मंत्री मनोज पांडेय अपने नेता मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की भूमि सेना को और सशक्त तरीके से लागू करना चाहते हैं तो प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी से बढ़ाना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।
अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में माध्यमिक शिक्षा के मंत्री बनाए गए इकबाल महमूद सरकारी स्कूलों में प्राइवेट संस्थानों से बेहतर गुणात्मक शिक्षा के लक्ष्य के साथ काम शुरू करना चाहते हैं।
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ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश को 24 घंटे बिजली देने के मुख्यमंत्री के वादे को तेजी से हकीकत में बदलना है। वन राज्यमंत्री फरीद महफूज किदवई जंगल बढ़ाने और वन्य जीव संरक्षण पर फोकस करेंगे।
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स्वतंत्र प्रभार से भूतत्व एवं खनन विभाग के कैबिनेट मंत्री बनाए गए गायत्री प्रसाद प्रजापति की अवैध रवन्ना और अवैध खनन रोकने के लिए नई नीति लाने की योजना है।
मत्स्य व उद्यम विभाग के मंत्री महबूब अली के मन में अपने विभाग को अलग पहचान दिलाने का प्लान है। श्रम एवं सेवायोजन मंत्री शाहिद मंजूर मजदूरों को हक दिलाने के लिए बड़ा से बड़ा बदलाव करने में हिचकने की बात करते हैं।
हालांकि प्राविधिक शिक्षा मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा पहले विभाग का काम जानने की कोशिश करेंगे, इसके बाद विभाग को आगे ले जाने की योजना बनाएंगे।
देर से विभागों के बंटवारे को लेकर मंत्रियों को कोई गिला नहीं है। मंत्री कहते हैं कि यह मुख्यमंत्री का विवेकाधिकार है कि वह कब किसे मंत्री बनाएं या निकालें, कब विभाग दें, कब तक बिना विभाग के काम लें।
अहम था मंत्री बनाना जिससे सम्मान बढ़ा है। वे लोग मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुसार पार्टी के घोषणापत्र और सरकार केविकास एजेंडे को समयबद्ध ढंग से लागू करवाकर प्रदेश को तेजी से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।