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Lucknow News: थायरॉयड के मरीजों के लिए विकसित की नई हाइब्रिड तकनीक
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। पीजीआई के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने थायरॉयड मरीजों के लिए नई हाइब्रिड तकनीक विकसित की है। इसे डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन (डीएएमए) विधि कहते हैं। इस विधि से दोनों ओर थायरॉयड गांठ वाले सात मरीजों का सफल इलाज हुआ है।
इलाज के बाद मरीजों की थायरॉयड कार्यक्षमता सामान्य रही। स्वास्थ्य लाभ भी संतोषजनक रहा। यह तकनीक थायरॉयड ग्रंथि को सुरक्षित रखते हुए इलाज का बेहतर विकल्प है। इसे डॉ. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में विकसित किया गया है, जिसमें सर्जरी और माइक्रोवेव एब्लेशन का संयोजन है।
प्रक्रिया में बड़ी गांठ वाले हिस्से की सर्जरी होती है, जबकि दूसरी तरफ की सौम्य गांठ को माइक्रोवेव एब्लेशन से नष्ट करते हैं। इससे दोनों समस्याओं का इलाज एक ही बार में हो जाता है। डॉ. सबारेत्नम ने बताया कि पारंपरिक थायरॉयडेक्टॉमी में पूरी ग्रंथि निकालने से जीवनभर थायरॉक्सिन दवा लेनी पड़ सकती है। कुछ जटिलताओं का खतरा भी रहता है।
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आर्थिक व शारीरिक बोझ में कमी
डॉ. सबारेत्नम ने बताया कि यह तकनीक आधुनिक एंडोक्राइन सर्जरी और इमेज गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन का प्रभावी समन्वय है। ओपन सर्जरी में माइक्रोवेव प्रोब को सटीकता से लगाने से आसपास की नसों, श्वासनली और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा होती है। यह मरीज पर इलाज का आर्थिक व शारीरिक बोझ भी घटा सकती है। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, पर दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए अध्ययन जारी रहेगा।
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इलाज के बाद मरीजों की थायरॉयड कार्यक्षमता सामान्य रही। स्वास्थ्य लाभ भी संतोषजनक रहा। यह तकनीक थायरॉयड ग्रंथि को सुरक्षित रखते हुए इलाज का बेहतर विकल्प है। इसे डॉ. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में विकसित किया गया है, जिसमें सर्जरी और माइक्रोवेव एब्लेशन का संयोजन है।
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प्रक्रिया में बड़ी गांठ वाले हिस्से की सर्जरी होती है, जबकि दूसरी तरफ की सौम्य गांठ को माइक्रोवेव एब्लेशन से नष्ट करते हैं। इससे दोनों समस्याओं का इलाज एक ही बार में हो जाता है। डॉ. सबारेत्नम ने बताया कि पारंपरिक थायरॉयडेक्टॉमी में पूरी ग्रंथि निकालने से जीवनभर थायरॉक्सिन दवा लेनी पड़ सकती है। कुछ जटिलताओं का खतरा भी रहता है।
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आर्थिक व शारीरिक बोझ में कमी
डॉ. सबारेत्नम ने बताया कि यह तकनीक आधुनिक एंडोक्राइन सर्जरी और इमेज गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन का प्रभावी समन्वय है। ओपन सर्जरी में माइक्रोवेव प्रोब को सटीकता से लगाने से आसपास की नसों, श्वासनली और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा होती है। यह मरीज पर इलाज का आर्थिक व शारीरिक बोझ भी घटा सकती है। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, पर दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए अध्ययन जारी रहेगा।