‘फिश टेस्ट’ ढूंढ निकालेगा कैंसर जीन
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डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज फेफड़े के कैंसर की जीन का पता लगाने के लिए फ्लोरेसेंस इन सिटू हाइब्रिडाइजेशन (फिश) टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराएगा।
अभी तक प्रदेश में यह सुविधा किसी भी चिकित्सा संस्थान में नहीं है। इस टेस्ट से खराब जीन का पता चल जाता है। इसके बाद उसे विशेष दवा देकर खत्म कर दिया जाता है।
लोहिया इंस्टीट्यूट की निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन और पैथोलॉजी विभाग के हेड डॉ. प्रद्युम्न सिंह ने यह जानकारी शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में दी।
प्रो. नुजहत हुसैन ने बताया कि फिश टेस्ट से जीन की अनुवांशिक गड़बड़ी का पता लगाया जा सकता है। इससे कैंसर के मरीज की खराब जीन का पता लग जाएगा और फिर उसे ‘टारगेट थेरेपी’ से खत्म किया जा सकेगा।
फेफड़े और स्तन कैंसर के कारक खराब जीन को इस टेस्ट की मदद से पकड़ा जा सकेगा। डॉ. प्रद्युम्न सिंह ने बताया कि फिश टेस्ट काफी महंगी जांच है, लेकिन लोहिया इंस्टीट्यूट में निजी केंद्रों के मुकाबले एक तिहाई ही शुल्क लिया जाएगा।
पैथोलॉजी तकनीक की कान्फ्रेंस शुरू
लोहिया इंस्टीट्यूट 11 से 13 अक्तूबर तक पैथोलॉजी तकनीक पर एक कान्फ्रेंस का आयोजन भी कर रहा है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (यूपीपैथकॉन-2014) की वार्षिक संगोष्ठी में ऐसे ही कई नई तकनीक की जानकारी कान्फ्रेंस में दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन करेंगे। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत होंगे।