30 जून को रिटायर होंगे यूपी के मुख्य सचिव, नए की नियुक्ति में अहम हो सकते हैं जातीय समीकरण
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प्रदेश की अफसरशाही की सबसे बड़ी कुर्सी जल्द ही खाली होने वाली है। लिहाजा, इसके लिए नए अफसरों के नाम पर अटकलबाजी बढ़ गई है। मुख्य सचिव पद के दावेदार माने जा रहे अफसरों के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क गिनाए जा रहे हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले इस पद के लिए नाम फाइनल होने में जातीय समीकरण भी काम करेगा, इसके पुख्ता दावे किए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव राजीव कुमार 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। वरिष्ठता के लिहाज से पहला नाम राजस्व परिषद के चेयरमैन और काडर के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी प्रवीर कुमार (1982 बैच) का आता है। यदि पिछली बार की तरह वह फिर सरकार की पसंद नहीं बने तो 1984 बैच के तीन अफसरों अनूप चंद्र पांडेय, संजय अग्रवाल और दुर्गाशंकर मिश्र में से कोई भी सरकार की पसंद बन सकता है।
अनूप चंद्र पांडेय अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास तथा संस्थागत वित्त की जिम्मेदारी देख रहे हैं। संजय अग्रवाल लोक निर्माण, उच्च व माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव हैं। 1984 बैच के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दुर्गाशंकर मिश्र केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय में सचिव हैं।
जानकार बताते हैं कि 1983 बैच के किसी अफसर के नाम पर फिलहाल गौर नहीं किए जाने के संकेत हैं। लेकिन इस पद के लिए सत्ता से संगठन तक से पर्दे के पीछे चल रही पैरोकारी के बीच यह बात तेजी से उभरी है कि अफसरशाही का एक बड़ा तबका प्रदेश में कार्यरत अफसरों के बजाय केंद्र से दुर्गाशंकर मिश्र को इस पद पर लाने की हिमायत कर रहा है।
हालांकि प्रदेश की सियासत में बसपा की तेजी से अहम होती भूमिका में सरकार बसपा सुप्रीमो मायावती के विश्वस्त अफसरों में शामिल चेहरे को मौका देगी, यह देखने वाली बात होगी। गौर करने वाली बात ये भी है कि सरकार के पास मुख्य सचिव चुनने के लिए 1982 बैच से 1987 बैच तक के अफसरों का विकल्प उपलब्ध है।
मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प खुला
वैसे मुख्य सचिव राजीव कुमार का कार्यकाल बढ़ाए जाने का विकल्प खुला है। सपा शासनकाल में तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन का कार्यकाल तीन महीने बढ़ने की नजीर जल्दी की है। राजीव के सेवा विस्तार की पैरवी करने वालों का समीकरण ये है कि सितंबर तक राजीव का एक्सटेंशन हो और उसके बाद चुनाव के ठीक पहले दलित अफसर के रूप में चंद्रप्रकाश को मुख्य सचिव बनाकर बड़ा मेसेज दिया जा सकता है। हालांकि इस समीकरण में चंद्रप्रकाश की आम शोहरत सबसे अहम होगी।
जातीय समीकरण से तय होगा मुख्य सचिव
दावे तो यह भी किए जा रहे हैं कि चुनावों के लिए जिस तरह प्रत्याशी चयन में जातीय व सामाजिक समीकरण देखे जाते हैं, लोकसभा चुनाव से पहले अफसरशाही के भारी-भरकम ओहदों पर तैनाती में भी इस फॉर्मूले का असर जरूर नजर आएगा। सरकार ने पंचम तल पर दूसरे दलित अफसर की तैनाती कर इसका संकेत कर दिया गया है।
नए मुख्य सचिव को लेकर इसलिए बढ़ीं अटकलें
मौजूदा मुख्य सचिव राजीव कुमार रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार के खिलाफ रहे हैं। सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार देने की व्यवस्था अपवादस्वरूप छोड़ दी जाए तो उनके समय में समाप्त ही हो गई है। अन्य संवर्ग को छोड़ दिया जाए, तो कई आईएएस अधिकारियों के सेवा विस्तार का प्रस्ताव रद्द हुआ है। ऐसे में राजीव खुद शायद ही सेवा विस्तार के लिए रुचि दिखाएं।
दूसरा, यदि राजीव को तीन महीने का सेवा विस्तार दे भी दिया जाता है तो भी लोकसभा चुनाव से पहले नए मुख्य सचिव की नियुक्ति करनी होगी। तब सितंबर तक उनका विकल्प खोजना पड़ेगा। ऐसी परिस्थिति में नए मुख्य सचिव के लिए चुनाव के पहले करने के लिए कुछ ज्यादा नहीं होगा। तब तक चुनावी सरगर्मी बढ़ चुकी होगी। ऐसे में सेवा विस्तार की गुंजाइश बहुत कम नजर आ रही है। चुनाव के लिहाज से नए मुख्य सचिव की तैनाती की उम्मीद ज्यादा है।
मुख्य सचिव पद के लिए इन नामों की ज्यादा चर्चा
प्रवीर कुमार, (1982 बैच) राजस्व परिषद के चेयरमैन
पक्ष में : मुख्य सचिव राजीव कुमार के बाद काडर के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी। जुलाई 2019 तक कार्यकाल।
विपक्ष में : योगी सरकार ने राहुल भटनागर को मुख्य सचिव पद से हटाने के बाद प्रवीर को नजरअंदाज कर प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में तैनात राजीव कुमार को बुलाकर मुख्य सचिव बनाया।
डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, (1984 बैच) अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त
पक्ष में : कर्जमाफी और यूपी इन्वेस्टर्स समिट जैसे कामयाब आयोजन। समिट में हुए निवेश के करार में से 50 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट शिलान्यास के लिए तैयार होने का दावा।
विपक्ष में : फरवरी, 2019 तक ही कार्यकाल।
इन दो नामों पर चर्चा
संजय अग्रवाल, (1984 बैच) अपर मुख्य सचिव माध्यमिक व उच्च शिक्षा
पक्ष में : नई सरकार में दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ काम करना। सरकार का मन पढ़ने में माहिर। किसी भी तरह का निर्णय लेने में हिचकिचाहट नहीं। मार्च 2022 तक कार्यकाल।
विपक्ष में : पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पसंदीदा अफसरों में एक और ऊर्जा जैसे महकमे की जिम्मेदारी। मौजूदा सरकार द्वारा ऊर्जा विभाग के निर्णयों पर लगातार सवाल उठाना।
दुर्गा शंकर मिश्र, (1984 बैच) सचिव शहरी विकास मंत्रालय
पक्ष में : प्रदेश में कार्यरत अफसरों के पसंद न बनने पर मौजूदा मुख्य सचिव राजीव कुमार की तरह केंद्र की पसंद साबित हो सकते हैं। दिसंबर 2021 तक कार्यकाल।
विपक्ष में : पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के प्रमुख सचिव थे। बसपा शासनकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय की सोशल इंजीनियरिंग में अफसरशाही में ब्राह्मण चेहरा के रूप में जाने जाते थे।