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Lucknow News: नहीं रहे लखनवी तहजीब को संजोने वाले नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला

Wed, 19 Apr 2023 01:57 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Apr 2023 01:57 AM IST
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nawab jafar meer is no more
माई सिटी रिपोर्टर
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लखनऊ। जीने का अलहदा अंदाज, नवाबी टोपी, मुंह में पान और आदाब...के अपने अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले, हर महफिल की शान नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला (72) नहीं रहे। मंगलवार शाम विवेकानंद हॉस्पिटल में उनका हृदयगति रुकने से निधन हो गया। किडनी में दिक्कत के चलते उनका लंबे समय से इलाज भी चल रहा था। वह न केवल लखनवी तहजीब को बढ़ावा देते थे बल्कि उसे जीते भी थे। उनका पहनावा, मिलने का अंदाज, खानपान सब नवाबी था। शायद यही कारण है कि शहर में बनीं कई मशहूर फिल्मों में निर्माताओं ने उन्हें अभिनय का मौका दिया और इसके जरिये उन्होंने अपने लखनवी अंदाज की छाप छोड़ी।


वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। लोगों के सुख-दुख में हमेशा शरीक होते थे। उन्हें 2016 में यश भारती सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके छोटे भाई नवाब मसूद अब्दुल्ला ने बताया कि उनका जन्म 17 मार्च 1951 को लखनऊ में ही हुआ था। उनकी शिक्षा दीक्षा यहीं लखनऊ में हुई। उन्होंने लामार्टीनियर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विवि से बीएससी ऑनर्स व लखनऊ विवि से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी तीन बेटियां हैं। पत्नी बेगम परवीन जाफर का निधन कुछ समय पहले हो गया था। उन्हें शहर में लोग नवाब साहब कहकर पुकारते थे। किडनी में दिक्कत के चलते कुछ दिन उन्होंने डायलिसिस कराई, लेकिन फिर वह ठीक हो गए थे। शादी ब्याह व सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करने लगे थे। उनके निधन का समाचार पाकर पुराने लखनऊ स्थित उनके आवास पर मंगलवार देर रात तक उनके चाहने वालों का आना जाना लगा रहा। उनके साथ लंबा वक्त गुजार चुके चचा अमीर हैदर ने कहा कि वह लखनऊ की चलती फिरती तहजीब थे। उनका निधन लखनऊ के लिए बड़ा नुकसान है।
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उमराव जान बनीं रेखा ने सीखा था नवाबी अंदाज



नवाब साहब ने उमराव जान, गदर, मेरी शादी में जरूर आना, गुलाबो-सिताबो, मैडम चीफ मिनिस्टर, इश्क जादे समेत कई फिल्मों में अभिनय किया। उनके परिवार के लोगों ने बताया कि उमराव जान फिल्म की शूटिंग के दौरान लखनवी अंदाज सीखने के लिए मशहूर अभिनेत्री रेखा भी कई बार नवाब साहब के पास आई थीं। आने जा रही फिल्म गदर-2 में भी उन्होंने रोल किया है।
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फिल्म में नवाब साहब की ही अंगूठी पहनी थी फारुख शेख ने



उमराव जान में फारुख शेक नवाब सुल्तान बने थे। उन्होंने एक अंगूठी पहनी थी, जो नवाब के हाथों की शान बढ़ाया करती थी। उनके भांजे रजा साहब ने बताया कि मामा गरीब मजलूम की मदद के लिए हमेशा खड़े रहते थे।



हर शेर पर दाद



पूर्व सूचना आयुक्त दोस्त हैदर अब्बास कहते हैं कि उनकी दोस्ती 25 साल पुरानी थी। अक्सर मिलना हो जाया करता था। मुलाकात में नवाब साहब हैदर अब्बास से साहित्य से लबरेज शेरों को सुनकर दाद दिया करते थे।




हर महफिल की शान



साहित्य, शायरी, कविताओं की महफिल हो या फिर कोई भी आयोजन, नवाब साहब हर महफिल की शान हुआ करते थे। उनके निधन की खबर मिलते ही हर तरफ शोक की लहर फैल गई। सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप पर लोग उनसे जुड़ी यादों को, उनके साथ गुजारे पलों को साझा करते हुए दुख जताते रहे। पानदान से पान निकालने से खाने तक का उनका अलहदा अंदाज, लखनऊ के गलावती कबाब का बखान करते नवाब साहब का बेलौस अंदाज सभी को भा जाता था। शीशमहल क्रिकेट क्लब और खेल से रिश्ता सलेमपुर हाउस के राजा सैय्यद तकी हसन, जो कि खुद रणजी के जाने माने खिलाड़ी रहे हैं के जूनियर थे नवाब। राजा साहब के बेटे फिल्म मेकर और लेखक कुंवर सैय्यद रुश्दी हसन कहते हैं कि उनके पूरे खानदान से सलेमपुर हाउस के गहरे ताल्लुक थे। मेरी फिल्म ये इश्क में उन्होंने वाजिद अली शाह का रोल किया था। उनके बिना अब हर महफिल सूनी रहेगी।
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