चुनावी खर्च पर पार्टियों का 'डर्टी गेम'
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पिछले लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों और सांसदों की ओर से चुनाव में खर्च के बावत घोषित आंकड़ों में बड़ा झोल मिला है।
नेशनल इलेक्शन वॉच की ओर से जारी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
इसमें बताया गया है कि कांग्रेस के 90, भाजपा के 25, सपा के दो और बसपा के एक सांसद ने चुनाव आयोग को चुनाव में खर्च संबंधी जो दस्तावेज सौंपे हैं, वे पार्टियों के दावे के विपरीत है।
कांग्रेस ने बोला सबसे बड़ा झूठ
रिपोर्ट में बताया गया है कि कांग्रेस के 81 सांसदों ने आयोग के समक्ष दावा किया था कि पार्टी की ओर से खर्च के नाम पर उन्हें कुछ भी नहीं दिया गया।
यह दावा करने वालों में श्रीप्रकाश जायसवाल, बेनी प्रसाद वर्मा और जितिन प्रसाद सहित यूपी के 10 सांसद हैं। जबकि कांग्रेस का कहना है कि इन 81 सांसदों को करीब 8.09 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई।
इतना ही नहीं आरपीएन सिंह और सीपी जोशी सहित कांग्रेस के नौ सांसदों ने खर्च का जो ब्योरा आयोग को सौंपा है, वह पार्टी के दावे से कम है। खर्च का यह अंतर करीब 65.49 लाख है।
सोनिया ने भी नहीं दिया ब्योरा
सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के 8 सांसदों की ओर से आयोग को दिए गए दस्तावेज में पार्टी की ओर से मिली आर्थिक मदद से संबंधित पेज ही नहीं है।
जबकि पार्टी का कहना है कि सोनिया गांधी को चुनाव खर्च के लिए 25 लाख रुपये दिए गए थे। हालांकि राहुल गांधी ने 25 लाख मिलेने और कांग्रेस की ओर से इतना ही देने की बात दोनों के दस्तावेजों में है।
कांग्रेस ने कहा 10 लाख दिए, इन्हें मिला ही नहीं
उत्तरप्रदेश के 10 कांग्रेसी सांसदों ने आयोग को जो रिपोर्ट दिए हैं उसमें उन्होंने चुनाव खर्च के नाम पर पार्टी की ओर से कुछ भी नहीं मिलने की बात कही है।
जबकि पार्टी ने हर एक को 10 लाख रुपये देने का दावा किया है। इन सांसदों में राजाराम पाल (अकबरपुर), कमल किशोर (बहराइच), जतिन प्रसाद (धौरहरा), बेनी प्रसाद वर्मा (गोंडा), प्रदीप कुमार आदित्य (झांसी), श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर), हर्षवर्धन (महराजगंज्र), डॉ. विनय कुमार विन्नू पाण्डेय (श्रावस्ती), डॉ. संजय सिंह (सुल्तानपुर) और अनु टंडन (उन्नाव) शामिल है।
जोशी, टंडन से खुली भाजपा की पोल
इसी तरह भाजपा ने दावा किया है कि उसने किसी भी सांसद की आर्थिक मदद नहीं की।
जबकि डॉ. मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, मेनका गांधी और मेरठ से सांसद लालजी अग्रवाल सहित 27 सांसदों ने हलफनामा देकर पार्टी की ओर से आर्थिक मदद का दावा किया है।
यह आंकड़ा करीब 2.75 करोड़ का है। ऐसा ही दावा करने वालों में सुषमा स्वराज, यशवंत सिन्हा, करिया मुंडा और दिलीप सिंह जुदेव भी हैं।
पार्टी का अलग राग, सांसद के सुर अलग
राष्ट्रीय पार्टियों के कुल 277 सांसदों 75 सांसदों ने बताया है कि उन्हें उनकी पार्टी की ओर से खर्च के लिए करीब 7.46 करोड़ रुपये मिले थे।
इसके विपरीत, पार्टियों का दावा है कि उन्होंने कुल 138 सांसदों को 14.19 करोड़ रुपये की मदद की थी। इसी तरह 12 क्षेत्रीय पार्टियों के 15 सांसदों के दावे उनकी पार्टी से अलग हैं।
बसपा और राकांपा ने भी किसी तरह की मदद न देने का दावा किया है, लेकिन बसपा के धनंजय सिंह ने पार्टी की ओर से 2.5 लाख और राकांपा के समीर मगन भुजबल ने 4 लाख मिलने की बात कही है।
इसी तरह समाजवादी पार्टी के सांसदों धमेंद्र यादव (बदायूं) ने 21 लाख और कमलेश बाल्मीकि (बुलंदशहर) ने 10 लाख रुपए मिलने का दावा किया है, जबकि सपा ने मदद पाने वालों में उनका जिक्र ही नहीं किया है।
96 ने तो दी ही नहीं जानकारी
लोकसभा के कुल 543 सांसदों में से 388 ने चुनाव के दौरान किए गए खर्च के बारे में जानकारी दी। 59 ने अधूरी और 96 ने कोई जानकारी ही नहीं दी।
निर्दलीय सहित 31 क्षेत्रीय पार्टियों के कुल 171 सांसदों में से सिर्फ 111 ने चुनाव आयोग को चुनाव के दौरान खर्च के बारे में रिपोर्ट सौंपी है।
जबकि नियम के अनुसार सभी सांसदों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के 30 दिनों के भीतर और पार्टियों को 90 दिनों के भीतर खर्च के बारे में दस्तावेज सौंप देने होते हैं।
कई मंत्रियों के भी ऐसे ही दावे
ऐसा ही दावा करने वालों ने अन्य कांग्रेसी सांसदों और मंत्रियों में दिनशा पटेल, सुबोध कांत सहाय, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मनीष तिवारी, सचिन पायलट, गिरिजा व्यास, शीशराम ओला, पी. चिदम्बरम, विजय बहुगुणा शामिल है।
वर्तमान राष्ट्रपति और तत्कालीन केबिनेट मंत्री प्रणव मुखर्जी को कांग्रेस ने 15 लाख रुपये देने का दावा किया है। जबकि प्रणव ने बताया है कि पार्टी की ओर से उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री आरपीएन सिंह (सांसद कुशीनगर) ने महज 3.50 हजार और प्रवीण सिंह ऐरन (सांसद बरेली) ने करीब 1.63 लाख रुपये मिलने की बात कही है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि इन्हें 10-10 लाख रुपये दिए गए।