{"_id":"5f16edc48ebc3e9ff12e0de8","slug":"nasimuddin-siddique-membership-legislative-council-cancelled","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नसीमुद्दीन सिद्दीकी की विधान परिषद सदस्यता खत्म, कांग्रेस में शामिल होना पड़ा भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की विधान परिषद सदस्यता खत्म, कांग्रेस में शामिल होना पड़ा भारी
Tue, 21 Jul 2020 06:59 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 21 Jul 2020 06:59 PM IST
विज्ञापन
नसीमुद्दीन सिद्दीकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधान परिषद सभापति रमेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को विधान परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया है। वे बसपा से विधान परिषद के लिए चुने गए थे, पर बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। सभापति ने लंबी सुनवाई के बाद दिए अपने आदेश में कहा है कि कांग्रेस में शामिल होने की तिथि 22 फरवरी 2018 से ही वे अयोग्य माने जाएंगे।
विज्ञापन
विधान परिषद में बसपा दल के तत्कालीन नेता सुनील कुमार चित्तौड़ ने उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए 28 फरवरी 2018 को याचिका दी थी। नसीमुद्दीन सिद्दीकी 23 जनवरी 2015 को बसपा की ओर से विधान परिषद केसदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे।
विज्ञापन
कांग्रेस की औपचारिक सदस्यता ग्रहण किए जाने के बाद बसपा की ओर से संविधान की दसवीं अनुसूची और उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली-1987 के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी।
विज्ञापन
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की ओर से तर्क दिया गया कि विपक्षी को बसपा से निष्कासित कर दिया गया था। इस पर विधान परिषद के सभापति ने उनको असंबद्ध घोषित करते हुए सदन में मान्यता प्रदान की। सिद्दीकी केअनुसार उन्होंने असंबद्ध सदस्य के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। विपक्षी की ओर से इस पर अत्यधिक जोर दिया गया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत असंबद्ध सदस्य के बारे में कोई व्याख्या नहीं की गई है।
सभापति ने अपने आदेश में कहा है कि यह अविवादित है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 22 फरवरी 2018 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने स्वयं इसको स्वीकार किया। सर्वोच्च न्यायालय ने कीहोटोहोलोहान, रवि एस नायर एवं जी विश्वनाथन के मामले में पारित निर्णयों के माध्यम से यह विधिक सिद्धांत स्थापित किया जा चुका है कि कोई सदस्य अपने मूल राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग सकता है।
अगर सदस्य मूल राजनीतिक दल त्यागकर अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धता को परिवर्तित करता है, तो उसे सदन की सदस्यता त्याग कर पुन: निर्वाचन में जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश से स्पष्ट है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी 22 फरवरी 2018 को सदस्यता से अयोग्य हो गए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य आदेश राजेंद्र सिंह राणा प्रति स्वामी प्रसाद मौर्य ‘एससी-2007(4)-270’ में पारित निर्णय का हवाला भी दिया गया है।
सभापति ने अपने आदेश में कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूल राजनीतिक दल बसपा की सदस्यता को त्यागने के आधार पर अयोग्य हुए हैं। इसलिए भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विधान परिषद की उनकी सदस्यता खत्म की जाती है। यहां बता दें कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कार्यकाल 30 जनवरी 2021 तक है।
अगर सदस्य मूल राजनीतिक दल त्यागकर अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धता को परिवर्तित करता है, तो उसे सदन की सदस्यता त्याग कर पुन: निर्वाचन में जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश से स्पष्ट है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी 22 फरवरी 2018 को सदस्यता से अयोग्य हो गए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य आदेश राजेंद्र सिंह राणा प्रति स्वामी प्रसाद मौर्य ‘एससी-2007(4)-270’ में पारित निर्णय का हवाला भी दिया गया है।
सभापति ने अपने आदेश में कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूल राजनीतिक दल बसपा की सदस्यता को त्यागने के आधार पर अयोग्य हुए हैं। इसलिए भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विधान परिषद की उनकी सदस्यता खत्म की जाती है। यहां बता दें कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कार्यकाल 30 जनवरी 2021 तक है।