काशी में मंदिर पर चुप्पी तोड़ेंगे नरेंद्र मोदी!

अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ Updated Sun, 24 Nov 2013 01:27 PM IST
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नरेंद्र मोदी की पांचवी रैली संघ परिवार के एजेंडे के हिस्से वाली जमीन पर काशी में होने जा रही है।
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लोगों में उत्सुकता इस बात को लेकर है कि मोदी इस जमीन पर भी भगवा एजेंडे का आधार अयोध्या, मथुरा व काशी पर चुप्पी बरकरार रखते हैं या उसे तोड़ते हैं।
काशी की रैली वैसे कई मामलों में दूसरी रैलियों से अलग होगी। न सिर्फ जगह के लिहाज से बल्कि स्थितियों के मद्देनजर भी। अब देखना यह है कि मोदी के तेवरों व भाषा में बदलाव दिखता है या नहीं।

जमीनी मुद्दों से दूर दिखे मोदी

दरअसल, मोदी उत्तर प्रदेश में अभी तक भगवा एजेंडे से जुड़ी जमीनों से कुछ दूर ही दिखे हैं। बात बहराइच रैली की हो या आगरा की। उनकी रैली अयोध्या से लगभग सो किमी. दूर बहराइच में हुई तो मथुरा से लगभग 60 किमी. दूर आगरा में हुई। पर, अब 20 दिसंबर को होने जा रही विजय शंखनाद रैली काशी में ही होने जा रही है।

वह काशी, जहां के विश्वनाथ मंदिर के उद्धार के नारे 90 के दशक में लोगों के शरीर में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर उद्धार जैसा करंट ही दौड़ाते थे। इसलिए लोगों की यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि मोदी काशी में पिछली रैलियों जैसी भाषा ही बोलते हैं या उनके तेवर कुछ भगवा रंगत वाले होते हैं।

यह है वजह
मोदी की भाषा और तेवरों में बदलाव दिखने की संभावना इसलिए भी ज्यादा दिख रही है, क्योंकि काशी रैली ही मोदी के यूपी में लोकसभा चुनाव अभियान की वास्तविक शुरुआत होगी। जब तक रैली होगी तब तक मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली व छत्तीसगढ़ के चुनाव ही नहीं निपट हो चुके होंगे बल्कि नतीजे भी आ चुके होंगे।

जैसे नतीजे आने की संभावना दिख रही है उसके लिहाज से काशी में मोदी के पास नए तेवर दिखाने और विरोधियों को जवाब देने के लिए नए तर्क व नए आधार भी हाथ में हो सकते हैं।

उनके सामने यह असमंजस नहीं होगा कि कुछ ऐसा मुंह से निकल जाए तो उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में भाजपा के चुनावी अभियान को कोई नुकसान पहुंचा दे।

बड़े नेताओं की भी परीक्षा
पर, उत्सुकता सिर्फ मोदी को लेकर ही नहीं है बल्कि काशी रैली पार्टी के कई बड़े नेताओं की पकड़ व पहुंच की परीक्षा भी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह काशी से लगे जिला चंदौली के रहने वाले हैं। चंदौली पहले वाराणसी जिला की तहसील थी।

काशी उनकी जन्मभूमि व कर्मभूमि रही है तो पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र व ओमप्रकाश सिंह की भी यह कर्मस्थली है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी काशी (वाराणसी) से ही सांसद हैं।

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यही नहीं, अगर इन नेताओं के मूल जिलों की बात करें तो डॉ. मुरली मनोहर जोशी व केशरी नाथ त्रिपाठी का इलाहाबाद, कलराज मिश्र का गाजीपुर, ओमप्रकाश सिंह का मिर्जापुर, काशी क्षेत्र में ही आता है।

और तो और, भगवा चेहरों की बात करें तो चिन्मयानंद जौनपुर से सांसद रहे हैं। वह फिर यहां से टिकट के दावेदार है। रामविलास वेदांती मछलीशहर से सांसद रह चुके हैं। काशी क्षेत्र में आने वाले सुल्तानपुर से वरुण गांधी भी टिकट के दावेदार हैं।

स्वाभाविक है कि रैली में जुटने वाली भीड़ इन नेताओं की अपने घरों में जनाधार की कसौटी भी बनने वाली है।

इस समय है यह स्थिति
काशी अतीत में भाजपा के दुर्ग जैसा रहा है। इस समय काशी क्षेत्र में लोकसभा की 15 और विधानसभा की 72 सीटें है। भाजपा के पास लोकसभा की वाराणसी और विधानसभा की 5 सीटे हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों से केदारनाथ सिंह और डा.यज्ञदत्त शर्मा के रूप में विधान परिषद में दो सदस्य हैं।

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