भाजपा के मिशन यूपी के लिए इसलिए बेहद खास है बरेली रैली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को बरेली में होने वाली रैली पर सभी की निगाहें लगी हुई है। माना जा रहा है कि मोदी की इस रैली से भाजपा 2017 के चुनावी समर का एजेंडा भी सेट करने की कोशिश करेगी।
साथ ही मोदी की तरफ से आगे के चुनावी समर में आजमाए जाने वाले हथियारों की झलक भी देखने को मिलेगी तो जुटने वाली भीड़ यूपी की जनता की मंशा का भी कुछ न कुछ संदेश जरूर देगी। भीड़ बताएगी कि लोगों में मोदी का क्रेज 2013-14 जैसा ही है या उससे कुछ घटा या बढ़ा है।
मोदी की यह रैली रेल बजट, बजट पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण और आम बजट के बीच हो रही है। रैली का नाम ‘किसान कल्याण रैली’ रखा गया है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि रैली की तारीख तय करने या नामकरण के पीछे सिर्फ संयोग नहीं है। कहीं न कहीं सियासी संदेश देने की कोशिश भी है। बरेली से मोदी की रैलियों की शुरुआत कराकर भगवा टोली के रणनीतिकार एक साथ कई काम करना चाहते हैं।
रणनीतिकारों ने इस रैली के जरिये लोकसभा चुनाव के दौरान रुहेलखंड की जमीन पर मोदी की रैली की भरपाई की कोशिश की है। वह किसानों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार के काम बताकर भविष्य का एजेंडा सेट करना चाहते हैं। वैसे तो अभी मोदी की आगे की रैलियों की तारीखें तय नहीं हैं लेकिन इनके बारे में जल्द ही फैसला होना है।
इसलिए मोदी की रैली पर लगाए जा रहे हैं कयास
जिस तरह आर्थिक सर्वेक्षण में आम बजट में किसानों के लिए सतरंगी क्रांति जैसी घोषणाओं के संकेत दिए गए है उससे भी यही साबित होता है। इस लिहाज से यह रैली भविष्य का एजेंडा सेट करने का लिटमस टेस्ट लग रही है।
किसानवाद व राष्ट्रवाद
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री के भाषण के लिए जो बुलेट प्वाइंट भेजे गए हैं उनमें प्रमुखता से इस क्षेत्र की प्रमुख फसलों और किसानों की समस्याएं भेजी गई हैं। उसके मद्देनजर भी माना जा रहा कि मोदी का इरादा 2017 के चुनावी समर में किसान एजेंडे के साथ उतरने की है।
इस लिहाज से प्रधानमंत्री बरेली में केंद्र सरकार के किसानों के कल्याण के लिए किए गए काम बताने के साथ आगे के इरादों का संकेत भी दे सकते हैं। चर्चा है कि मोदी इस इलाके के महीने चावल के निर्यात सहित कुछ अन्य घोषणाओं का संकेत देने की कोशिश करेंगे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मोदी से ठीक पहले आना और बहराइच, बलरामपुर की सभाओं में जेएनयू के बहाने राष्ट्रवाद नारा बुलंद करना और बरेली में मोदी की रैली, लगता है कि भगवा टोली ‘किसानवाद और राष्ट्रवाद’ के चेहरे के साथ 2017 के चुनावी समर में उतरने की तैयारी कर रही है।