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रिवर बैंक कॉलोनी लीज पर देगा नगर निगम, सहमत न होने वाले लोगों को खाली करना होगा बंगला
Sat, 26 Sep 2020 02:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2020 02:03 AM IST
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नगर निगम लखनऊ
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम प्रशासन रिवर बैंक कॉलोनी को जल्द लीज पर देगा। इसके लिए किरायेदारी सिस्टम को खत्म किया जाएगा। नई व्यवस्था में पॉश रिवर बैंक कॉलोनी में वही रह सकेंगे, जो उसे डीएम सर्किल रेट पर लीज पर लेने को तैयार होंगे। जो इस पर सहमत नहीं होंगे, उन्हें नगर निगम का मकान खाली करना होगा।
निगम प्रशासन जल्द नई व्यवस्था लागू करेगा। इस कॉलोनी के आलीशान बंगलों, फ्लैटों में महज 20, 50, 100 और 200 रुपये महीने किराये पर दशकों से काबिज किरायेदारों को अब जेब ढीली करनी होगी। फ्लैटों, बंगलों को लीज पर देने की तैयारी शुरू हो गई है।
कमेटी बनाकर इनकी नापजोख का काम भी निगम प्रशासन कर रहा है। इस कॉलोनी में करीब 300 बंगले और फ्लैट हैं। निगम प्रशासन के दो साल पहले बढ़ोतरी करने के बाद बंगलों, फ्लैटों का कम से कम किराया 1000 रुपये महीना हो गया था। हालांकि, किरायेदारों ने इसका विरोध किया और ज्यादातर ने किराया नहीं जमा किया। ये बंगले दो से छह हजार वर्गफीट तक के हैं।
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निगम प्रशासन जल्द नई व्यवस्था लागू करेगा। इस कॉलोनी के आलीशान बंगलों, फ्लैटों में महज 20, 50, 100 और 200 रुपये महीने किराये पर दशकों से काबिज किरायेदारों को अब जेब ढीली करनी होगी। फ्लैटों, बंगलों को लीज पर देने की तैयारी शुरू हो गई है।
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कमेटी बनाकर इनकी नापजोख का काम भी निगम प्रशासन कर रहा है। इस कॉलोनी में करीब 300 बंगले और फ्लैट हैं। निगम प्रशासन के दो साल पहले बढ़ोतरी करने के बाद बंगलों, फ्लैटों का कम से कम किराया 1000 रुपये महीना हो गया था। हालांकि, किरायेदारों ने इसका विरोध किया और ज्यादातर ने किराया नहीं जमा किया। ये बंगले दो से छह हजार वर्गफीट तक के हैं।
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आधी कॉलोनी में अवैध कब्जा
रिवर बैंक कॉलोनी के आधे से अधिक बंगलों और फ्लैटों में रहने वाले अवैध कब्जेदार हैं। मूल आवंटी अवैध तरीके से इन्हें मकान बेचकर चले गए हैं और नगर निगम कर्मचारियों की मिलीभगत से इनके नाम किरायेदारी भी ट्रांसफर करा गए हैं। इसके लिए गलत तथ्यों और दस्तावेजों का सहारा लिया गया है। नगर निगम के नियम के तहत किरायेदारी सिर्फ खून के रिश्ते वाले को ही ट्रांसफर हो सकती है। इसमें फर्जीवाड़ा कर बहुत लोगों ने करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है।
हाउस टैक्स भी नहीं देते बंगले और फ्लैट वाले
छह-छह हजार वर्गफीट के आलीशान बंगले में नाममात्र के किराये पर रहने वाले हाउस टैक्स भी नहीं देते। इससे हर साल नगर निगम को करोड़ों की चपत लगती है। करीब चार साल पहले यह मामला उठा भी, लेकिन दबाव में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इसका कारण है कि रिवर बैंक कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर लोग प्रभावशाली और पैसे वाले हैं। इस कारण कई बार प्रयास के बाद भी निगम प्रशासन न तो किराया बढ़ा पाया और न ही इनसे हाउस टैक्स वसूल कर पाया। अब नए नगर आयुक्त अजय द्विवेदी, के आने बाद एक बार फिर किराया बढ़ाने की कवायद शुरू हुई है।
रिवर बैंक कॉलोनी के फ्लैट और बंगलों को अब लीज पर आवंटित किया जाएगा। डीएम सर्किल रेट कीमत की गणना होगी। जो किरायेदार लीज पर आवंटन कराने को तैयार नहीं होंगे, उनका ई-अनुबंध निरस्त कर मकान को खाली कराया जाएगा। - अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
हाउस टैक्स भी नहीं देते बंगले और फ्लैट वाले
छह-छह हजार वर्गफीट के आलीशान बंगले में नाममात्र के किराये पर रहने वाले हाउस टैक्स भी नहीं देते। इससे हर साल नगर निगम को करोड़ों की चपत लगती है। करीब चार साल पहले यह मामला उठा भी, लेकिन दबाव में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इसका कारण है कि रिवर बैंक कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर लोग प्रभावशाली और पैसे वाले हैं। इस कारण कई बार प्रयास के बाद भी निगम प्रशासन न तो किराया बढ़ा पाया और न ही इनसे हाउस टैक्स वसूल कर पाया। अब नए नगर आयुक्त अजय द्विवेदी, के आने बाद एक बार फिर किराया बढ़ाने की कवायद शुरू हुई है।
रिवर बैंक कॉलोनी के फ्लैट और बंगलों को अब लीज पर आवंटित किया जाएगा। डीएम सर्किल रेट कीमत की गणना होगी। जो किरायेदार लीज पर आवंटन कराने को तैयार नहीं होंगे, उनका ई-अनुबंध निरस्त कर मकान को खाली कराया जाएगा। - अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त