अपने पतियों के दवाब में सीएए और एनआरसी का विरोध कर रही हैं मुस्लिम महिलाएंः तारिक फतेह
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प्रख्यात समालोचक और पाकिस्तानी मूल के कनाडियन पत्रकार तारिक फतेह ने बुधवार को रामलला व हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। उन्होंने हरिधामगोपाल पीठ पहुंचकर ज.गु.रामदिनेशाचार्य से आशीर्वाद लिया। करीब एक घंटे तक उनके साथ मंदिर के महात्म पर चर्चा की। रामलला के दर्शन कर वह अभिभूत दिखे। कहा कि अयोध्या आने से हज जैसा अहसास हो रहा है। उन्होंने राममंदिर बनने पर पुन: अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करने की इच्छा जताई।
पीस पार्टी की ओर से राम मंदिर मामले पर रिव्यू पिटिशन दाखिल करने पर तारिक फतेह ने कहा कि रिव्यू पिटिशन दाखिल करने से उनकी हिंदी और इंग्लिश ठीक हो जाएगी। उसी बहाने सीएए भी पढ़ लेंगे, दिमाग ठीक नहीं है उनका, अपने धर्म के विरोध में जाएंगे। बाबर पर हमलावर होते हुए कहा कि बाहर से आकर किसी ने एक मस्जिद बनवा दी तो उस पर बड़ा दर्द है। मक्के में कई मस्जिद टूटीं उस पर कोई दर्द नहीं है। इस तरह का दोगलापन उर्दू में चल सकता है दुनिया में नहीं चल सकता।
तारिक ने एनआरसी पर कहा कि मुस्लिम महिलाएं एनआरसी और सीएए का विरोध नहीं कर रही हैं। उनके पतियों ने उन्हें विरोध में बैठाया है। मुस्लिम पति पहले बीवियों को बुर्के से बाहर करें। उनसे पाबंदी हटाएं। एनआरसी का विरोध मुस्लिम समाज में बांग्लादेशी हिंदुओं के भारत में आने पर जगी असुरक्षा की भावना है। अभी भी पार्टीशन के दौर में नहीं निकले हैं मुस्लिम समाज के लोग वरना एनआरसी का विरोध मुस्लिम यूनिवर्सिटी से न शुरू होकर जेएनयू से शुरू होता। उन्होंने कहा मुस्लिम यूनिवर्सिटी बंद की जाए, जिन्ना की तस्वीर उतारी जाए तब माना जाएगा कि आप देश के लिए बात कर रहे हैं।
नमाज के लिए मस्जिद की जरूरत नहीं
सुप्रीम कोर्ट के मुस्लिम समाज को पांच एकड़ जमीन देने पर बोले कि हिंदुस्तान में मस्जिद की कमी है क्या। जहां मस्जिद है जुम्मे की नमाज वहां पर भी हमारे भाई सड़कों पर अदा कर रहे हैं। नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की जरूरत नहीं है। घर बैठे भी नमाज अदा की जा सकती है लेकिन वहां पर मौलवी नहीं होगा घर पर आप नमाज अदा करते हैं तो जिसकी दुकान लगी है वह कुछ नहीं कर सकता है।
राममंदिर की लड़ाई लड़ने वाले ट्रस्ट में हों शामिल
राममंदिर ट्रस्ट पर कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर निर्माण की लड़ाई लड़ी है, वह लोग ट्रस्ट में शामिल हों। राम मंदिर की जंग 500 साल की थी। अंग्रेज न आए होते तो अब तक फैसला हो चुका होता। कोई नहीं पूछता कि बाबर कौन है इसको यहां आने का वीजा किसने दिया था। वहीं राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद राम जन्मभूमि के दर्शन पर बोलते हुए कहा कि अगर वीजा मिलता है तो जरूर राम मंदिर का दर्शन करूंगा।