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शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में उठी मांग, किसी भी मजहबी किताब की तौहीन करने वाले पर हो कार्रवाई
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लखनऊ। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी के जलसे में बृहस्पतिवार को किसी भी मजहब की किताब का अपमान करने वाले पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई। कुरान की 26 आयतों को हटाने के वसीम के बयान की निंदा करते हुए उलमा ने कहा कि कुरान में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता है। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से वसीम की याचिका खारिज करने का अनुरोध किया। जलसे में अजान से नींद में खलल पड़ने के इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति के बयान की निंदा भी की गई। इसके अलावा छह सूत्रीय प्रस्ताव पास हुए।
शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने कुरान से 26 आयतें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर तर्क दिया है कि इन आयतों से दहशतगर्दी को बढ़ावा मिलता है। इसके विरोध में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी का जलसा सीतापुर शिया पीजी कॉलेज स्थित खतीब-ए-अकबरलाइब्रेरी में आयोजित हुआ। इसमें बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद साएम मेंहदी ने कहा कि इस्लाम अमन व शांति का धर्म है। हजरत मोहम्मद साहब ने कभी तलवार नहीं चलाई। नबी ने हमेशा समझौते और सुलह से काम लिया है। जेहाद का मतलब खून खराबा नहीं है, बल्कि बुराई के खिलाफ जद्दोजहद करना है। शिया समुदाय कुरान में किसी भी तरह के बदलाव का समर्थक नहीं है। कुरान में बदलाव के बारे में सिर्फ सोचने भर से ही इंसान इस्लाम से खारिज हो जाता है। वसीम के बयान और याचिका से मुसलमानों के मजहबी जज्बात को ठेस पहुंची है, इसलिए सुप्रीमकोर्ट को चाहिए कि याचिका को खारिज कर दें। बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना जाहिद अहमद ने कहा कि कुरान की आयतों को हटाने की बात वसीम के दिमाग की उपज नहीं है। इसके पीछे इस्लाम विरोधी ताकतें काम कर रही हैं। प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रखेगा। जलसे में मुख्य रूप से मौलाना इन्तेजाम हैदर, जाफर अब्बास, रजा अब्बास, अनवर हुसेन रिजवी, प्रो. अजीज हैदर ने शिरकत की। जलसे में मुसलमानाें से अपील की गई कि 22 मार्च को रात 9 बजे अपने घरों, मस्जिदों या इमामबाड़ों में कुरान मजीद की तिलावत करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालें और डीपी पर कुरान की तसवीर भी लगाएं।
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शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने कुरान से 26 आयतें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर तर्क दिया है कि इन आयतों से दहशतगर्दी को बढ़ावा मिलता है। इसके विरोध में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी का जलसा सीतापुर शिया पीजी कॉलेज स्थित खतीब-ए-अकबरलाइब्रेरी में आयोजित हुआ। इसमें बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद साएम मेंहदी ने कहा कि इस्लाम अमन व शांति का धर्म है। हजरत मोहम्मद साहब ने कभी तलवार नहीं चलाई। नबी ने हमेशा समझौते और सुलह से काम लिया है। जेहाद का मतलब खून खराबा नहीं है, बल्कि बुराई के खिलाफ जद्दोजहद करना है। शिया समुदाय कुरान में किसी भी तरह के बदलाव का समर्थक नहीं है। कुरान में बदलाव के बारे में सिर्फ सोचने भर से ही इंसान इस्लाम से खारिज हो जाता है। वसीम के बयान और याचिका से मुसलमानों के मजहबी जज्बात को ठेस पहुंची है, इसलिए सुप्रीमकोर्ट को चाहिए कि याचिका को खारिज कर दें। बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना जाहिद अहमद ने कहा कि कुरान की आयतों को हटाने की बात वसीम के दिमाग की उपज नहीं है। इसके पीछे इस्लाम विरोधी ताकतें काम कर रही हैं। प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रखेगा। जलसे में मुख्य रूप से मौलाना इन्तेजाम हैदर, जाफर अब्बास, रजा अब्बास, अनवर हुसेन रिजवी, प्रो. अजीज हैदर ने शिरकत की। जलसे में मुसलमानाें से अपील की गई कि 22 मार्च को रात 9 बजे अपने घरों, मस्जिदों या इमामबाड़ों में कुरान मजीद की तिलावत करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालें और डीपी पर कुरान की तसवीर भी लगाएं।
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