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अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शिया वक्फ बोर्ड के हलफनामे पर अलग है उलमाओं की राय

Thu, 10 Aug 2017 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 10 Aug 2017 02:02 AM IST
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 Muslim leaders view on ayodhya issue is different from shia waqf board.

अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने के संबंध में शिया वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे को लेकर उलमा एकमत नहीं हैं। शिया उलमा जहां शिया वक्फ बोर्ड के रुख का समर्थन कर रहे हैं, वहीं सुन्नी समुदाय के उलमा इसे अयोध्या मामले में बेवजह का दखल मान रहे हैं।

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जमीन की मिल्कियत का मामला : फरंगी महली
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य व सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि मस्जिद अल्लाह का घर होती है। मस्जिद में शिया व सुन्नी दोनों नमाज पढ़ते हैं। यह शिया व सुन्नी फिरके का नहीं, बल्कि जमीन की मिल्कियत का मामला है। शिया उलमा पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से हाईकोर्ट में अपनी गवाही दर्ज करा चुके हैं। इसलिए इतनी देर के बाद यह मुददा उठाना बेमानी है।
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हलफनामे की कानूनी हैसियत नहीं : जिलानी
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का दावा है कि शिया वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे की कोई कानूनी हैसियत नहीं है। जिलानी का कहना है कि हलफनामे में जो बातें कही गई हैं, वे कभी हाईकोर्ट के सामने नहीं आईं जबकि शिया वक्फ बोर्ड 1989 से अयोध्या मामले में पार्टी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कोई नई दलील व बात नहीं कही जा सकती।

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देर से उठाया सही कदम

 Muslim leaders view on ayodhya issue is different from shia waqf board.
विवादित ढाचा - फोटो : amar ujala

शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी का कहना है कि शिया वक्फ बोर्ड का यह देर से उठाया गया सही कदम है। अयोध्या में बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनवाई गई थी। इतिहास इसका गवाह है। हालांकि शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दावा काफी अंतराल के बाद पेश किया गया है। हाईकोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अब यह मुश्किल है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुददे पर दाखिल हलफनामे का संज्ञान ले।

नतीजा निकाल कर विवाद खत्म होना चाहिए : मालिकी
बेगमात रॉयल फैमली ऑफ अवध की अध्यक्ष फरहाना मालिकी का कहना है कि अयोध्या मस्जिद की मिल्कियत के मामले में शिया वक्फ बोर्ड का दावा काफी देर से किया गया है। इस मस्जिद पर शिया समुदाय अपना दावा काफी पहले ही छोड़ चुका था क्योंकि मस्जिद की जमीन पर विवाद होने से वहां नमाज अदा करना नाजायज है। अब शिया वक्फ बोर्ड की यह पहल शायद इस मामले को नतीजे तक ले जाए। इस मामले का नतीजा निकलना चाहिए और विवाद हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए।

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