Lucknow: लखनऊ के विकास के लिए मांगे 10 हजार करोड़, 16वें वित्त आयोग की बैठक में प्रतिनिधि ने की मांग
16वें वित्त आयोग की बैठक में नगर निगम के प्रतिनिधि बनकर पहुंचे पार्षद अरुण तिवारी ने शहर के विकास के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की मांग की। कहा कि शहर की जनसंख्या और भौगोलिक सीमाओं में विस्तार किया जा रहा है जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
विस्तार
राजधानी लखनऊ आज ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां उसकी भौगोलिक सीमाएं और जनसंख्या दोनों ही अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है। इस विस्तार ने नगर को प्रगतिशील दिशा में ले जाने की संभावनाओं को बढ़ाया है, साथ ही संसाधनों की उपलब्धता पर भारी दबाव भी डाला है। ऐसे में अब शहर के विकास के लिए नगर निगम ने 16वें वित्त आयोग से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता की मांग की है।
जनसंख्या और क्षेत्रफल में हुई तेज वृद्धि : शहर के होटल में हुई आयोग की बैठक में नगर निगम का प्रतिनिधित्व पार्षद अरुण तिवारी ने किया। उन्होंने बैठक में बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, लखनऊ नगर की जनसंख्या 28.17 लाख थी। वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 48.60 लाख है। इसी प्रकार, नगर निगम का कुल क्षेत्रफल भी 310 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर अब 568 वर्ग किलोमीटर हो चुका है।
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उन्होंने बैठक में कहा कि नगर निगम ने विस्तारित क्षेत्रों के प्रभावी विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार लगभग 7207 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई है। इसके अतिरिक्त नगर की मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए 3500 करोड़ रुपये की अलग मांग की गई है।
बढ़ते क्षेत्रफल और जनसंख्या से उपजीं समस्याएं
बैठक में पार्षद अरुण तिवारी ने बताया कि विस्तारित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं जैसे जल आपूर्ति, सड़क, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पार्क, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक प्रबंधन जैसी सेवाओं का व्यापक अभाव है। 83 प्रतिशत नए क्षेत्र जोड़े गए हैं, लेकिन वहां आज भी न तो पर्याप्त नाले हैं, न सीवर लाइनें, और न ही समुचित पेयजल व्यवस्था। इस कारण शहर के केंद्र से दूर बसी नई कॉलोनियों के लाखों लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में वर्तमान आवश्यकताओं के मद्देनजर और उन्नत तकनीक आधारित व्यवस्था को लागू करने के लिए आगामी वित्त आयोग में और अधिक संसाधनों की आवश्यकता है।
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इसके तहत वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, घरेलू हानिकारक अपशिष्ट व ई-वेस्ट के लिए कलेक्शन सेंटर, मल्टी लेयर प्लास्टिक रिसाइकलिंग प्लांट, सैनिटेशन रिसोर्स पार्क, पब्लिक ई-चार्जिंग स्टेशन, नगर निगम कार्य हेतु ई-व्हीकल्स, नगर निगम भवनों पर सोलर पैनल जैसी परियोजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है।