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75 के पार, कौन संभालेगा पॉलिटिक्स और परिवार?

Sat, 22 Nov 2014 07:51 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 22 Nov 2014 07:51 AM IST
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mulayam singh 75th birthday celebration.

आजम भले ही मुलायम के को रामपुर में राजशाही का अहसास करवाना चाहते हों, लेकिन मुलायम जानते हैं कि 75 बरस की उनकी यात्रा का सबसे कठिन मोड़ यही है।

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यहां परिवार, पॉलिटिक्स और परेशानियों की एक नई लिस्ट मुलायम के सामने है। सवाल भी है कि समाजवाद की साइकिल अब चलाएगा कौन। दरअसल, 2012 विधानसभा चुनाव में मिली अभूतपूर्व जीत के बावजदू ये दौर सपा सुप्रीमो मुलायम के सियासी करियर में आए मुश्किल पड़ाव में से है।
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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा के लिए बीजेपी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर आई है। ऐसे में जब 2017 का चुनाव करीब है तो पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देना स्वाभाविक है।
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दो दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब समाजवादी पार्टी की लोकसभा में सीटें इतनी घट गईं। पांच सीटों पर आ पहुंचना वाकई मुलायम के लिए चिंता करने वाली बात तो है ही। इसके अलावा बेटा बनाम बेटा और बहु बनाम बहु के साथ परिवार में इस वक्त चल रही उथल-पुथल को संभालना मुलायम सिंह के लिए चुनौती भरा है।

युवाओं को कैसे दी जाए समाजवादी सीख?

mulayam singh 75th birthday celebration.

मुलायम के समाजवाद के साथ युवाओं को जोड़ना एक बड़ा चैलेंज है। वह चाहते हैं कि पार्टी के युवा सदस्य समाजवादी विचारधारा को समझें ही नहीं ‌बल्कि आगे भी ले जाएं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, हाल ही में सपा के महिला सम्मेलन के दौरान सपा सुप्रीमो पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को अपनी जवानी के दिनों के संघर्ष की कहानी सुना रहे थे।

उस वक्त भीड़ में मौजूद ज्यादातर युवा और यहां तक की पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अपने स्मार्टफोन में बिजी थे। उनका भाषण खत्म होने से पहले लोग कई बार बीच में ही उठ खड़े हुए ।

उस सम्मेलन के दौरान नेताजी ने लोगों के रिस्पांस और भीड़ के हाव-भाव को भी परखा। यहां तक कि जब डिंपल को पार्टी का महिला चेहरा बनाने की बात उठी तो मुलायम भी लोगों से मिलने वाले पॉजिटिव रिस्पांस पर गौर किया।

पार्टी से जुड़े एक तजुर्बेकार का मानना है कि अब स्मार्ट फोन और वर्चुअल दुनिया में दिन बिताने वाले युवाओं को समाजवादी विचारधार से जोड़ना मुलायम सिंह के लिए टेढ़ी खीर है।

परिवार में उथल-पुथल और बदलाव की सुगबुगाहट!

mulayam singh 75th birthday celebration.

बीजेपी से‌ मिली करारी हार के जख्म ताजा थे तब क नेताजी की बहुरानी अपर्णा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करके सुर्खियों में आ गईं।

अपर्णा के बयान कि व्यक्तिगत तौर पर देश के प्रधानमंत्री की तारीफ करना उनका हक है, ये बात पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गई। हालांकि, इस बारे में पार्टी की तरफ से कोई सफाईनामा पेश नहीं किया गया।

चर्चा है कि नेताजी के परिवार में भी काफी उठा-पटक चल रही है। एक ओर नेताजी की जन्मदिन पर शानदार जलसा हो रहा है वही उनकी छोटी बहु अपर्णा इस जलसे में शामिल नहीं हो रही हैं।

बेटे और बहुओं के बीच ताजपोशी की खींचतान

mulayam singh 75th birthday celebration.

खबर है कि मुलायम सिंह के जन्मदिन के जश्न में न शामिल होकर अपर्णा छुट्टियां मनाने दुबई गई हैं। सपा की बागडोर किसे सौंपी जाए इसे लेकर काफी खींचतान है। ताजपोशी के लिए कई दावेदार हैं।

एक तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश दूसरी तरफ नेतीजी के दूसरे बेटे प्रतीक भी इस रेस में हैं। एक तरफ बड़ी बहु डिंपल राजनीतिक गलियारों में अपनी पैंठ बना रही हैं।

दूसरी तरफ छोटी बहु अपर्णा ने भी अपने एनजीओ हर्ष की शुरुआत करके लोगों के बीच जगह बनानी शुरू की है। वहीं एक तरफ चचा शिवपाल ने उम्मीद लगा रही है और वह अखिलेश से ज्यादा जनता दरबार लगाते देखे जा रहे हैं।

मुलायम के जन्मदिन पर कौन क्या बोला?

mulayam singh 75th birthday celebration.
समाजवादी पार्टी लोहिया के नाम पर बनी थी। मगर जिस सामंती तरीके से ये 75वां जन्मदिन मनाया जा रहा है, ये दर्शाता है कि पार्टी किस कदर अपने समाजवादी सिद्धांतों से अलग चल रही है?
सत्यदेव त्रिपाठी, कांग्रेस

मुलायम सिंह यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी पार्टी के लोगों की लगाम कसना है। वह उनकी कारगुजारियों से शर्मिंदा होते रहे हैं खासतौर पर जमीनी कार्यकर्ताओं की।
स्वामी प्रसाद मौर्या- बसपा

मुलायम सिंह यादव बड़े नेता हैं लेकिन उनकी पार्टी को उन किसानों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है जिन्होंने 2012 के चुनाव में सपा के लिए अहम योगदान दिया। अब किसानों का ध्यान रखना अखिलेश यादव की जिम्मेदारी है।
मुन्ना सिंह चौहान-रलोद

सपा के लोग पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। मोदी जी ने तो अपना जन्मदिन सियाचीन में देश के जवानों के साथ मनाया था और मुलायम अपने जन्मदिन पर 75 फीट का केक काट रहे हैं।
लक्ष्मीकांत वाजपेयी, बीजेपी

नेताजी के जिंदगी के सफर पर एक नजर

mulayam singh 75th birthday celebration.

जन्म: 22 नवंबर 1939
माता-पिता: मूर्ति देवी और सुघर सिंह
शिक्षा: बीए, बीटी और एमए
पहली बार विधायक बने: 1967
पहली बार राज्यमंत्री बने: 1977
लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए: 1980
नेता प्रतिपक्ष चुने गए: 1982
पहली बार मुख्यमंत्री बने: 1989
समाजवादी पार्टी की स्‍थापना की: 1992
दूसरी बार सीएम बने: 1993 (बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जनता दल और कांग्रेस के सहयोग के सरकार बनाई)
मैनपुरी से जीतकर लोकसभा पहुंचे और संयुक्त मोर्चा सरकार में रक्षा मंत्री: 1996
बसपा, भाजपा सरकार के पतन के बाद बसपा के बागियों और लोकदलियों की मदद से तीसरा बार यूपी के मुख्यमंत्री: 2003
चुनाव के बाद प्रदेश में सपा की शानदार वापसी पर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया: 2012

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