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हुसैन की शहादत पर मातम करना सुन्नत-ए-पैगंबर: कल्बे जवाद

Thu, 18 Jun 2026 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:07 AM IST
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Mourning the martyrdom of Hussain is the Sunnah of the Prophet: Kalbe Jawad
लखनऊ। मौलाना सैय्यद कल्बे जवाद ने बुधवार को इमामबाड़ा गुफरानमआब में मुहर्रम की पहली मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अस) की शहादत पर मातम करना सुन्नत-ए-पैगंबर है, बिदअत (नई धार्मिक परंपरा) नहीं। उन्होंने कहा कि कर्बला के वाकिये की खबर जिबरील ने रसूलुल्लाह (सअव) को दी थी, जिसके बाद पैगंबर ने गिरया फरमाया। आज जो लोग इमाम हुसैन (अस) की शहादत पर गिरया करते हैं, वे सुन्नत-ए-पैगंबर पर अमल करते हैं।
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कल्बे जवाद ने कहा कि इमाम जाफर सादिक से रिवायत है कि इमाम हुसैन की शहादत से मोमिनों के दिलों में ऐसी हरारत पैदा होगी, जो कयामत तक खत्म नहीं होगी। जो मोमिन होगा, उसके दिल में इमाम हुसैन की शहादत का असर जरूर रहेगा।
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उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत पर रोने, रुलाने या रोने जैसी सूरत बनाने वाले के लिए जन्नत की बशारत (शुभ सूचना) दी गई है। आखिर में मौलाना ने कूफे में इमाम हुसैन के सफीर और उनके चचेरे भाई हजरत मुस्लिम बिन अकील की शहादत का बयान किया। इसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो उठीं।
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