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इन्वेस्टर्स समिट के एमओयू को जमीन पर उतारेगी सरकार, 1045 एमओयू पर सहमति, 371 पर हो रहा काम
Fri, 05 Jun 2020 02:47 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: अवधेश कुमार
Updated Fri, 05 Jun 2020 02:47 PM IST
सार
- सरकार ने शासनादेश के जरिये रखा एमओयू का लेखा-जोखा
- मुख्य सचिव बोले- 106 परियोजनाओं ने शुरू कर दिया वाणिज्यिक उत्पादन
- 2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की एपीसी व आईआईडीसी करेंगे समीक्षा
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इन्वेस्टर्स समिट
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती व अन्य विपक्षी दलों ने पिछले दिनों फरवरी 2018 की इन्वेस्टर्स समिट में किए गए एमओयू से हुए निवेश की प्रगति का हिसाब मांगा था। बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने एमओयू की प्रगति का शासनादेश के जरिये लेखा-जोखा रखा और समिट में किए गए प्रत्येक एमओयू के क्रियान्वयन की नई कार्ययोजना संबंधी गाइडलाइन जारी कर दी। सरकार के नए प्रयासों से लंबित एमओयू के क्रियान्वयन को रफ्तार मिलने की संभावना है।
मुख्य सचिव ने बताया है कि 21 व 22 फरवरी, 2018 को आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों ने 4.28 लाख करोड़ के 1045 सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद सरकार ने 29 जुलाई, 2018 को पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया जिसमें 81 निवेश प्रस्तावों का शुभारंभ हुआ। इसी तरह दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 28 जुलाई-2019 को हुई। इसमें 290 निवेश प्रस्तावों का शुभारंभ हुआ। इन दोनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए 371 एमओयू क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
17 मार्च, 2020 तक इन 371 में से 106 निवेश परियोजनाओं में वाणिज्यिक संचालन सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। सरकार ने इनवेस्टर्स समिट में किए गए एमओयू के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसमें ऑनलाइन एमओयू ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने के साथ निवेश प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा व नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है। प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को लेकर कई स्तर पर नए सिरे से जिम्मेदारी तय की गई है।
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मुख्य सचिव ने बताया है कि 21 व 22 फरवरी, 2018 को आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों ने 4.28 लाख करोड़ के 1045 सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद सरकार ने 29 जुलाई, 2018 को पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया जिसमें 81 निवेश प्रस्तावों का शुभारंभ हुआ। इसी तरह दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 28 जुलाई-2019 को हुई। इसमें 290 निवेश प्रस्तावों का शुभारंभ हुआ। इन दोनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए 371 एमओयू क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
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17 मार्च, 2020 तक इन 371 में से 106 निवेश परियोजनाओं में वाणिज्यिक संचालन सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। सरकार ने इनवेस्टर्स समिट में किए गए एमओयू के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसमें ऑनलाइन एमओयू ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने के साथ निवेश प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा व नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है। प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को लेकर कई स्तर पर नए सिरे से जिम्मेदारी तय की गई है।
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2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की एपीसी व आईआईडीसी करेंगे समीक्षा
शासन ने निवेश प्रस्तावों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत कर दी है। अब तक विभाग के बाद निवेश संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) के स्तर पर होती थी। अब कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) व आईआईडीसी के स्तर पर एमओयू से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। दोनों का क्षेत्र तय कर दिया गया है। कृषि व उससे जुड़े विभागों के 2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा एपीसी करेंगे। अन्य समस्त विभागों के 2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा आईआईडीसी करेंगे।
इसी तरह 500 करोड़ से 2000 करोड़ तक के एमओयू की समीक्षा एमओयू से जुड़े विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव के रूप में प्रशासनिक प्रमुख करेंगे। 500 करोड़ से कम निवेश वाले प्रोजेक्ट की समीक्षा संबंधित मंडलायुक्त करेंगे, जहां परियोजना प्रस्तावित है। मंडलीय अपर या संयुक्त निदेशक उद्योग मंडलायुक्त के स्तर पर समीक्षा कराएंगे। प्रत्येक दो माह पर परियोजनाओं की समीक्षा विभागीय अपर अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव य सचिव की अध्यक्षता में होगी।
शासन ने निवेश प्रस्तावों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत कर दी है। अब तक विभाग के बाद निवेश संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) के स्तर पर होती थी। अब कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) व आईआईडीसी के स्तर पर एमओयू से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। दोनों का क्षेत्र तय कर दिया गया है। कृषि व उससे जुड़े विभागों के 2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा एपीसी करेंगे। अन्य समस्त विभागों के 2000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा आईआईडीसी करेंगे।
इसी तरह 500 करोड़ से 2000 करोड़ तक के एमओयू की समीक्षा एमओयू से जुड़े विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव के रूप में प्रशासनिक प्रमुख करेंगे। 500 करोड़ से कम निवेश वाले प्रोजेक्ट की समीक्षा संबंधित मंडलायुक्त करेंगे, जहां परियोजना प्रस्तावित है। मंडलीय अपर या संयुक्त निदेशक उद्योग मंडलायुक्त के स्तर पर समीक्षा कराएंगे। प्रत्येक दो माह पर परियोजनाओं की समीक्षा विभागीय अपर अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव य सचिव की अध्यक्षता में होगी।
जिन विभागों में 1 लाख करोड़ से अधिक निवेश, वहां पीएमयू की होगी स्थापना
जिन विभागों में प्रस्तावित निवेश की कुल राशि एक लाख करोड़ या एमओयू की संख्या 200 से अधिक होगी, वहां प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (पीएमयू) की स्थापना की जाएगी। जिन विभागों से निवेश की रकम व एमओयू की संख्या इससे कम होगी वहां एमओयू अनुश्रवण प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। शासन स्तर पर संबंधित विभागों के प्रशासनिक प्रमुख पीएमयू के अध्यक्ष होंगे। पीएमयू की प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक अवश्य होगी।
जिन विभागों में प्रस्तावित निवेश की कुल राशि एक लाख करोड़ या एमओयू की संख्या 200 से अधिक होगी, वहां प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (पीएमयू) की स्थापना की जाएगी। जिन विभागों से निवेश की रकम व एमओयू की संख्या इससे कम होगी वहां एमओयू अनुश्रवण प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। शासन स्तर पर संबंधित विभागों के प्रशासनिक प्रमुख पीएमयू के अध्यक्ष होंगे। पीएमयू की प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक अवश्य होगी।
तीन स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त
सरकार ने निवेश प्रस्तावों पर समयबद्ध कार्रवाई के लिए निवेश की जा रही रकम के हिसाब से नोडल अधिकारी नामित किए हैं। उद्योग बंधु निवेश को सुगम बनाने व प्रोत्साहन का कार्य पहले की तरह करेगा, लेकिन एमओयू के नोडल विभाग प्रत्येक एमओयू के लिए एक विभागीय नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा। 500 करोड़ रुपये से कम के प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के सापेक्ष मंडल स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाएगा।
500 करोड़ से 2000 करोड़ तक के प्रत्येक एमओयू के सापेक्ष विशेष सचिव व निदेशक स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाएगा। 2000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्येक एमओयू के लिए विभागों के प्रशासनिक प्रमुख नोडल अधिकारी होंगे। नोडल अधिकारी निवेश प्रस्ताव की दिन-प्रतिदिन की प्रगति ट्रैक करने के साथ एमओयू करने वाले निवेशक के संपर्क में रहेंगे।
सरकार ने निवेश प्रस्तावों पर समयबद्ध कार्रवाई के लिए निवेश की जा रही रकम के हिसाब से नोडल अधिकारी नामित किए हैं। उद्योग बंधु निवेश को सुगम बनाने व प्रोत्साहन का कार्य पहले की तरह करेगा, लेकिन एमओयू के नोडल विभाग प्रत्येक एमओयू के लिए एक विभागीय नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा। 500 करोड़ रुपये से कम के प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के सापेक्ष मंडल स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाएगा।
500 करोड़ से 2000 करोड़ तक के प्रत्येक एमओयू के सापेक्ष विशेष सचिव व निदेशक स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाएगा। 2000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्येक एमओयू के लिए विभागों के प्रशासनिक प्रमुख नोडल अधिकारी होंगे। नोडल अधिकारी निवेश प्रस्ताव की दिन-प्रतिदिन की प्रगति ट्रैक करने के साथ एमओयू करने वाले निवेशक के संपर्क में रहेंगे।