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बेटे को दबोच कर भाग रहे तेंदुए से भिड़ी मां, जबड़े से सुरक्षित बचाया अपने लाल को
Sat, 16 Feb 2019 08:34 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 16 Feb 2019 08:34 PM IST
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बेटे संग मां
- फोटो : अमर उजाला
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बहराइच के कतर्नियाघाट रेंज के कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव एक मां अपने लाल को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया। घटना शनिवार शाम की है, जब अपने घर के आंगन में बेटा खेल रहा था। तभी तेंदुए ने घर में घुसकर बालक पर झपट्टा मारा। बच्चे की चीख सुनकर दौड़ी मां तेंदुए से भिड़ गई। उसने संघर्ष करते हुए बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। इसी बीच गांव के लोग भी हांका लगाते हुए मौके पर पहुंच गये। इस पर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। घायल बालक का पीएचसी में भर्ती कराया गया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव निवासी अच्छेलाल का सात वर्षीय पुत्र अंकुर शुक्रवार शाम को साढ़े सात बजे के आसपास आंगन में खेल रहा था। तभी जंगल से निकलकर एक तेंदुआ दबे पांव घर के अंदर घुस गया। कुछ दूरी पर बरामदे में अंकुर की मां सावित्री खाना बना रही थी। इसी दौरान तेंदुए ने बालक पर हमला कर उसे जबड़े में कसने की कोशिश की। बालक की चीख सुनकर मां आंगन की ओर दौड़ी लेकिन तेंदुआ देखकर पल भर के लिए सहम गई। लेकिन दूसरे ही क्षण उसने बहादुरी दिखाते हुए पास ही पड़े डंडे से तेंदुए पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया।
कड़े संघर्ष के बाद उसने अपने बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। अंकुर के सिर और गले में जख्म हैं। मां की चीख पुकार सुनकर आस-पड़ोस व गांव के लोग हांका लगाते हुए दौड़े। शोर सुनकर तेंदुआ उल्टे पांव जंगल की ओर भाग निकला। तत्काल घटना की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई। वन दरोगा मयंक पांडेय ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। सावित्री ने जिस तरह की बहादुरी दिखाकर अपने बेटे को बचाया उसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा है। इस बीच क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गये हैं।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव निवासी अच्छेलाल का सात वर्षीय पुत्र अंकुर शुक्रवार शाम को साढ़े सात बजे के आसपास आंगन में खेल रहा था। तभी जंगल से निकलकर एक तेंदुआ दबे पांव घर के अंदर घुस गया। कुछ दूरी पर बरामदे में अंकुर की मां सावित्री खाना बना रही थी। इसी दौरान तेंदुए ने बालक पर हमला कर उसे जबड़े में कसने की कोशिश की। बालक की चीख सुनकर मां आंगन की ओर दौड़ी लेकिन तेंदुआ देखकर पल भर के लिए सहम गई। लेकिन दूसरे ही क्षण उसने बहादुरी दिखाते हुए पास ही पड़े डंडे से तेंदुए पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया।
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कड़े संघर्ष के बाद उसने अपने बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। अंकुर के सिर और गले में जख्म हैं। मां की चीख पुकार सुनकर आस-पड़ोस व गांव के लोग हांका लगाते हुए दौड़े। शोर सुनकर तेंदुआ उल्टे पांव जंगल की ओर भाग निकला। तत्काल घटना की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई। वन दरोगा मयंक पांडेय ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। सावित्री ने जिस तरह की बहादुरी दिखाकर अपने बेटे को बचाया उसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा है। इस बीच क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गये हैं।
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आठ दिन बाद भी पिंजरे में नहीं कैद हुआ तेंदुआ
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंत अंतर्गत गूढ़ ग्राम पंचायत के निबिया गौढ़ी गांव में बीते शुक्रवार को 15 वर्षीय किशोर को तेंदुए ने निवाला बना लिया था। इसके बाद खेतों में आवक से लोग परेशान हो गए। ग्रामीणों की शिकायत पर डीएफओ जीपी सिंह ने एक पिंजड़ा स्थापित करवाया। साथ ही मूवमेंट पर नजर रखने के लिए दो थर्मो सेंसर कैमरे लगवाए थे। पिंजड़ा में बकरी बंधी हुई है। लेकिन तेंदुआ नजदीक नहीं गया है। गूढ़ निवासी राजेश कुमार, मनीष पांडेय, संदीप तिवारी, विनय पांडेय ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। वन क्षेत्राधिकारी ककरहा इरफान अहमद अंसारी ने बताया कि डिप्टी रेंजर आरबी राव, वन रक्षक सुनील जायसवाल, वाचर गोलू यादव निरंतर गश्त कर रहे हैं। तेंदुआ खेत की तरफ नहीं आया है। ग्रामीण सजग रहें।