स्वास्थ्य विभाग में खाली हैं तीन हजार पद
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सूबे के अस्पतालों में एक्स-रे व लैब टेक्नीशियन तथा फार्मासिस्टों और नर्सों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं।
इन संवर्गों के तीन हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं लेकिन महानिदेशालय से लेकर शासन में बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियुक्तियों को लेकर संजीदा नहीं हैं।
इससे जहां अस्पतालों में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं प्रशिक्षित बेरोजगार नियुक्ति के लिए आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
इतने पद हैं खाली...
एक्स-रे टेक्नीशियन के 403, लैब टेक्नीशियन के 624, फार्मासिस्ट के 950 और नर्सिंग संवर्ग में 2200 से अधिक पद खाली पड़े हैं लेकिन किसी भी संवर्ग में भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट संवर्ग 7800 का था जो बाद में 5226 और अब मात्र 4885 रह गया है।
बेरोजगार फार्मासिस्ट एसोसिएशन की मानें तो संवर्ग में कुल 1500 पद खाली हैं लेकिन विभाग इनकी संख्या 950 बता रहा है।
एक्स-रे टेक्नीशियनों की भारी कमी
इसी तरह एक्स-रे टेक्नीशियनों के 934 में से 403 पद खाली हैं।
एक्स-रे
सुविधा मुफ्त किए जाने के बाद से एक-एक अस्पताल में रोजाना 150 से 200
एक्स-रे हो रहे हैं, जबकि एक्स-रे टेक्नीशियनों की भारी कमी है।
बेरोजगार एक्स-रे टेक्नीशियन एसोसिएशन का कहना है कि इंटरव्यू हो गए, रिजल्ट भी आ गया लेकिन शासन स्तर पर भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई।
नर्सों की नियुक्ति फंसीं
राजकीय नर्सिंग संवर्ग में 6500 में से 2200 पद खाली पड़े हैं।
राजकीय नर्सिंग संघ के महामंत्री अशोक कुमार बताते हैं कि वर्ष 2005, 2007 और 2009 में 800 से अधिक पदों पर निजी और सरकारी नर्सिंग कॉलेजों से प्रशिक्षित नर्सों का चयन किया गया था।
इसी के विरोध में राजकीय कॉलेजों से प्रशिक्षण लेने वाली नर्सें कोर्ट चली गई थीं।
इसके विरोध में प्राइवेट कॉलेज से नर्सिंग करने वाले भी हाईकोर्ट चले गए थे।
बाद में हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 के पहले की स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इस मामले में शासन अब सेवा नियमावली में संशोधन की तैयारी कर रहा है।
लैब टेक्नीशियन का इंटरव्यू अधर में
लैब टेक्नीशियन के 624 पद खाली हैं। एक्स-रे टेक्नीशियन की तरह ही दिसंबर 2013 में उनका भी इंटरव्यू चल रहा था लेकिन इसे अचानक बीच में ही रोक दिया गया।
2200 के संवर्ग में 624 पद खाली होने से किसी भी अस्पताल में इमरजेंसी पैथोलॉजी सेवा नहीं मिल पा रही।
डिप्लोमा लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के महामंत्री आरके यादव बताते हैं कि महानिदेशालय में बैठे अधिकारियों की
गलतियों का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं प्रशिक्षित लोग बेरोजगार बैठे हुए हैं।