कांठ हिंसा: SSP के बयान पर बढ़ा बवाल, BJP सख्त
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मुरादाबाद के एसएसपी धर्मवीर सिंह के कांठ घटना पर दिए गए सियासी बयान ने बवाल बढ़ा दिया है।
भाजपा ने एसएसपी के बयान को सियासी बताते हुए उनके निलंबन की मांग की है।
पूर्व पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि एसएसपी का बयान मर्यादा की हदों को पार करने वाला है। राजनीतिक बयानबाजी का काम अधिकारी का नहीं है।
मुरादाबाद के एसएसपी ने शनिवार को कांठ थाना में पत्रकार वार्ता में कहा था कि कांठ बवाल के लिए भाजपा जिम्मेदार है।
'सपा के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे SSP'
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एसएसपी के इस बयान को मर्यादा की हदें पार करने वाला करार दिया।
इससे एसएसपी की मानसिक स्थिति का अंदाज लगाया जा सकता है। ऐसे अधिकारी के रहते कांठ में शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती।
वाजपेयी ने पलटवार करते हुए कहा कि एसएसपी के कारण कांठ में हिंसा भड़की। एसएसपी ने एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की।
उन्होंने जाटव समाज के मंदिर का लाउडस्पीकर तो उतरवा दिया। पर, दूसरे वर्ग के धर्मस्थल पर एक की जगह चार लाउडस्पीकर लगवा दिए।
आरोप लगाया कि एसएसपी सपा कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं। आखिर क्या वजह है कि एसएसपी को खरोंच तक नहीं आई और जिलाधिकारी को इतनी चोट लग गई।
जो एसएसपी अपने जिले के एसडीएम व एडीम को न पहचानता हो। इन अधिकारियों से अभद्रता कर बैठता हो। उसकी मानसिकता का अंदाज सहजता से लगाया जा सकता है।
'नहीं देना चाहिए था ऐसा बयान'
पूर्व पुलिस महानिदेशक केएल गुप्ता भी एसएसपी की इस तरह की बयानबाजी को अनुचित करार देते हैं। कहते हैं कि पुलिस अधिकारी का काम बयान देना नहीं कार्रवाई करना है।
अगर एसएसपी को लगा था कि भाजपा के लोग जिम्मेदार हैं तो उन्हें अब तक कार्रवाई कर देनी चाहिए थी। दोषियों को सबूत सहित न्यायालय के सामने पेश करते।
वह तो किया नहीं। कौन चुनाव लड़ेगा और कौन जीतेगा, यह सब देखना पुलिस अधिकारियों का काम नहीं है। उसके लिए दूसरे लोग हैं।
मुख्य सचिव ने दिया निर्देश
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा है कि कांठ में गड़बड़ी करने वालों से सरकार सख्ती से निपटेगी। उपद्रवियों के साथ किसी तरह की रियायत नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने माना कि कांठ में हालात नियंत्रण में हैं लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थिति सामान्य करने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।
शनिवार को कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक में उन्होंने प्रमुख सचिव गृह राकेश बहादुर व डीजीपी एएल बनर्जी से कांठ के हालात की जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारी खुद असामाजिक तत्वों पर निगाह रखें। साथ ही खुफिया तंत्र को और सक्रिय किया जाए।