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डॉ. अंबेडकर को दीक्षा देने वाले डॉ. प्रज्ञानंद का निधन, सांस लेने में थी तकलीफ

Thu, 30 Nov 2017 08:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 30 Nov 2017 08:55 PM IST
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monk pragyanand died after an illness
डॉ. प्रज्ञानंद का पार्थिव शरीर व उनके अनुयायी - फोटो : amar ujala

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को बौद्ध धर्म की दीक्षा देने वाले बौद्ध भिक्षु डॉ. प्रज्ञानंद (90)  का केजीएमयू में बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे निधन हो गया। उन्हें सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने पर 27 नवंबर को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। वहां से उन्हें गांधी वार्ड में शिफ्ट किया गया।

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अंतिम क्षणों में केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार व पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. संतोष समेत अन्य डॉक्टर मौजूद थे। उनके अंतिम दर्शन के लिए कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी अस्पताल पहुंचे। प्रज्ञानंद के निधन से उनके अनुयायियों में शोक की लहर है।
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बौद्ध भिक्षु डॉ. प्रज्ञानंद का जन्म 18 दिसंबर 1927 को श्रीलंका में हुआ था। उनके पिता शिक्षक और मां गृहिणी थी। एक बहन और तीन भाइयों में वह सबसे छोटे थे। बचपन श्रीलंका में बीता। 1938 में प्रज्ञानंद लखनऊ आ गए थे। यहां रिसालदार पार्क के आश्रम में गुरु बोधानंद से मिले। बोधानंद ने प्रज्ञानंद को अपने आश्रम में रखा और उन्हें दीक्षा दी।
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नागपुर में दी थी अंबेडकर को दीक्षा
बौद्ध भिक्षु के सेवादार सरताज ने बताया कि 14 अप्रैल 1956 को नागपुर में जिन सात भिक्षुओं ने मिलकर डॉ. भीमराव अंबेडकर को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी उनमें से एक प्रज्ञानंद भी थे। प्रज्ञानंद ने 29 साल की उम्र में अंबेडकर को दीक्षा दी थी। सरताज के अनुसार, प्रज्ञानंद पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे।

प्रज्ञानंद ने बनाया था रिसालदार पार्क को बौद्ध धर्म का केंद्र

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बौद्ध धर्म के प्रचारक भिक्षु प्रज्ञानंद ने राजधानी के रिसालदार पार्क को बौद्ध धर्म का केंद्र बनाया है। साथ ही यहां बौद्ध विहार बोधानंद की स्थापना की। उन्होंने देश भर में प्रचार प्रसार के साथ ही कई हस्तियों को बौद्ध धर्म का अनुयायी बनाया। 13 साल की उम्र में 76 साल पहले श्रीलंका से आए प्रज्ञानंद ने लालकुआं स्थित रिसालदार पार्क को अपनी कर्मस्थली बनाया। यहां रहते हुए शिक्षा- दीक्षा में लगे रहे और बोधानंद की नींव रखी। बाद में बोधानंद विहार मंदिर के अध्यक्ष भिक्षु प्रज्ञानंद भारतीय बौद्ध समिति के अध्यक्ष बने। यहां से उन्होंने अपने शिष्यों के जरिये पूरे देश में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। उनके भक्तों की संख्या सैकड़ों में है।

अंबेडकर का कराया धर्म परिवर्तन
 भिक्षु प्रज्ञानंद से मिलने डॉ. भीमराव अंबेडकर 18 अप्रैल 1948 को लखनऊ के रिसालदार पार्क आए और बौद्ध धर्म के बारे में अध्ययन किया। बौद्ध धर्म के प्रति डॉ. अंबेडकर का प्रेम देख कर प्रज्ञानंद ने छह अन्य धर्मगुरुओं की मौजूदगी में 14 अक्तूबर 1956 को उनका धर्म परिवर्तन कराया।

18 दिसंबर को जन्म दिवस मनाने की तैयारी
18 दिसंबर को प्रज्ञानंद का 90 वां जन्म दिवस मनाने की तैयारी चल रही है। इस मौके पर रिसालदार पार्क में हर साल उनके अनुयायियों का जमावड़ा लगता है। इस बार भी इसकी तैयारी चल रही है। शिशु भिक्षु प्रज्ञा सार के मुताबिक दो दिन पहले अस्वस्थ होने पर उन्हें ट्रॉमा सेंटर में  भर्ती किया गया था।

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